IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
Sandeep Indrajeet Tiwari – Appellant
Versus
Union O.F. India – Respondent
U/S 528 BNSS No. - 30206 of 2025
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 30206 of 2025
Sandeep Indrajeet Tiwari .....Applicant(s)
Versus Union O.F. India
.....Opposite Party(s)
Counsel for Applicant(s) : Dhirendra Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : Ashish Pandey
Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. 528 . . . . , 17 आवेदक की ओर से धारा बी एन एस एस के अंतगर्त यह आवेदन प्ऴ मु०अ०सं०
2023, 8/22/25/29/30 , सन अन्तगर्त धारा एन.डी.पी,.एस. एक्ट थाना एन.सी.बी.(लखनऊ
102 2024 जोन), िजला वाराणसी से उद्भूत स्ऴ वाद सं० सन में अपर िजला व स्ऴ न्यायाधीश कोट र् नं० 14, वाराणसी ्षारा पािरत आ्षेिपत आदेश िदनांक 03.07.2025 को केवल इस अंश/िबदु तक अपास्त िकए जाने हते ु योिजत िकया गया ह,ै िजसके माध्यम से आवेदक की ्िि्वगत जमातलाशी से बरामद वस्तुओं—एक स्वणर् चेन मय पेंडेंट, तीन स्वणर् अंगूिठयां, एक स्वण र् ़्ेसलेट तथा ₹850/- नकद रािश को िरलीज़ करने हते ु ्ऺस्तुत आवेदन
खािरज कर िदया गया था।
2.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं राज्य की ओर से िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना
तथा अिभलेखों का सम्यक् अनुशीलन िकया।
3.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा का तकर् ह ै िक इस मामलें में िदनांक 04.08.2023 को
िगरफ्तारी के प्ाात, आवेदक की जमातलाशी ली गई और उसके कब्ज़े से दस वस्तुएं बरामद की गईं, िजनम ें एक चेन, 3 अंगूिठयां, एक ़्ेसलेट तथा ₹850/- की नकद रािश व अन्य साम्षी शािमल थी, िजसके संबंध में िदनांक 04.08.2023 को एक जमातलाशी फ़दर् तैयार की गई थी। तत्प्ाात, आवेदक ने िदनांक 23.05.2025 को अपनी जमातलाशी से बरामद
release)
वस्तुओं को िनमुर््व ( करने हते ु इस आधार पर एक आवेदन दायर िकया िक आवेदक के अितिर्व उ्व वस्तुओं का अन्य कोई दावेदार नहीं ह;ै इसके अितिर्व, बरामद वस्तएु ं
case property)
मामला संपि्त ( से संबंिधत नहीं ह,ैं अतः उ्व वस्तओंु को आवेदक के प्ष Sub Inspector), में िनमुर््व िकया जाए। आवेदक के िनमुर्ि्व आवेदन पर, उप-िनरी्षक (
Objection)
एन.सी.बी. ने िदनांक 03.07.2025 को इस आधार पर आपि्त ( दािखल की
Narcotics substance) illegal gain after िक मादक पदाथॏल ( के अवैध िव्वय ्ऺितफल (
sale consideration)
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से इन वस्तुओं को खरीदा गया ह।ै यहाँ यह उल्लेख करना ्ऺासिं गक ह ै िक आवेदन के लंिबत Estimate)
रहने के दौरान, आवेदक की ओर से सोने के आभूषणों के संबंध में एक एस्टीमेट (
्ऺस्तुत िकया गया था, िजससे यह दिशत होता ह ै िक सोने की वस्तुएं उसकी पत्नी ्षारा खरीदी गई थीं। िव्षान अपर िजला एवं स्ऴ न्यायाधीश, कोट र् नं. 14, वाराणसी ्षारा पािरत आ्षेिपत
impugned order)
आदेश ( िदनांक 03.07.2025 के माध्यम से आवेदक का स्वणर् चेन मय पेंडेंट, तीन स्वण र् अंगूिठयां, एक स्वणर् ़्ेसलेट तथा ₹850/- नकद रािश की िनमुर्ि्व से संबंिधत िबदु/अंश तक िनमुर्ि्व आवेदन खािरज कर िदया गया ह।ै इससे आ्षेिपत आदेश िदनांक 03.07.2025 पािरत करते समय, संबिं धत न्यायालय ने संबिं धत दस्तावेजों के साथ-
ownership)
साथ ्ऺश्नगत बरामद वस्तुओं पर आवेदक की पत्नी के स्वािमत्व ( पर िवचार नहीं िकया ह।ै आवेदक के अितिर्व, आज तक ्ऺश्नगत बरामद वस्तुओं पर िकसी अन्य ्िि्व ्षारा दावा नहीं िकया गया ह,ै संबंिधत न्यायालय ने आ्षेिपत आदेश िदनांक 03.07.2025 पािरत करते समय इस पहलू की भी उप्षे ा की ह।ै उनके ्षारा अपने तकर् के समथर्न में माननीय
' (
उच्चतम न्यायालय ्षारा सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य' एस.सी., ए.सी.सी. 2003, वॉल्यूम 46, प्षृ 223 में िरपोटडरॏ ) के मामलें में यह िनधार्िरत िकया गया ह ै िक संपि्त के िनस्तारण के अिधकार का ्ऺयोग शी्सता से एवं िववेकपूणर् तरीके से िकया जाना चािहए और इसे लंबे समय तक थाने/मालखाने में रखना उपयोगी नहीं ह,ै परंतु ्ऺस्तुत मामले में, माननीय शीषर् अदालत ्षारा जारी िदशा-िनदरॏशों का संबंिधत न्यायालय ्षारा अनुपालन नहीं
िकया गया ह।ै
4.
इसके िवपरीत, िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आ्षेिपत आदेश का समथर्न करते हुए तकर् िदया िक बरामद वस्तुएं एवं नकद रािश अवैध मादक पदाथॏल के ्िापार से अिजत लाभ का िहस्सा हो सकती ह,ैं अतः िवचारण न्यायालय ्षारा िनमुर्ि्व आवेदन िनरस्त िकया जाना
न्यायसंगत ह।ै
5.
उभय प्षकारों के तकॏल एवं अिभलेख पर उपलब्ध साम्षी के अनुशीलन से यह स्प्ि ह ै
िक ्ऺश्नगत वस्तुएं (स्वणर् आभूषण एवं नकद ₹850/-) अिभयु्व/आवेदक की ्िि्वगत जमातलाशी से बरामद की गई थीं, िकतु ऐसा कोई ्ऺत्य्ष साष्य वतमर् ान चरण में ्ऺस्तुत नहीं िकया गया ह ै जो यह िस्ध करे िक यह िविश्ि आभूषण िकसी अपराध की िवषय-वस्तु (
subject matter)
ह ैं या इनके थाने/मालखाने म ें बने रहने से मुकदमे के िवचारण पर कोई अनुकूल ्ऺभाव पड़ेगा। यहां ्ऺ
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