Central Information Commission
CIC/ALSOI/A/2025/609883
Second Appeal No. CIC/ALSOI/A/2025/609883
Saurabh Bhosale … Appellant
VERSUS
CPIO: Archaeological Survey of India (Ministry of Culture), New Delhi … Respondents
CORAM: Hon’ble Commissioner Shri P R Ramesh
Date of Decision: 15.05.2026
Relevant dates emerging from the appeal:
| RTI : 08.08.2022 | FA : 12.09.2022 | SA : Nil. |
| CPIO : 23.08.2022 | FAO : 20.09.2022 | Hearing : 15.05.2026 |
O R D E R
1. The Appellant filed an RTI application dated 08.08.2022 seeking information on the following points:
1) िलिवंग मोूमट की ाा अिधक िवृत की जाए.
2) ए. एस. आई के अधीन कु ल िकतने ारक िलिवंग मोूमेट ह? उनकी सूची.
3) िकतने िलिवंग मोूमट म पूजा ान या पिव ल होने की घोषणा की गई है?
4) ए. एस. आई के अंतगत संरित ारकोंम से िकतने नॉन लीिवंग ारक है उनकी संा एवं सूची.
5) नॉन लीिवंग मोूमेट जो पिव ल है उसकी गरमा के संदभम ए.एस.आई के ा िवचार ह?
6) ए. एस. आई का उन ानों पर ा कत और अिधकार होते है?
7) कौनसे िनयम या कायदे या अ िकसी आदेश ारा िलिवंग और नॉन िलिवंग ारकों की वगवारी होती ह? उसी कायदे कानून या आदेश या जीआर की एक त.
2. The CPIO replied vide letter dated 23.08.2022 and the same is reproduced as under :-
1 भारतीय पुरात सवण की परपाटी एवं क सरकार मउ र पर िलए गए िनणय के अनुसार िकसी ारक को संरित घोिषत करने हेतु अिधसूचना जारी करते समय वहाँ जो भी धािमक गितिविधयाँ चलन म होती ह उसे जारी रखा जाता है तथा उसे िलिवंग मोूमट कहा जाता है। केीय संरण म िलए जाने के पात् िकसी भी कार की नई धािमक गितिविध आर करने की अनुमित नहीं दी जा सकती है।
2 to 4 आपको सूिचत िकया जाता है िक वांिछत जानकारी आधोहारी सी० पी० आई० ओ० (ारक) के पास उपल नहीं है।
5, 6 भारतीय पुरात सवण ाचीन संारक, पुरातीय ल एवं अवशेष अिधिनयम 1958 एवं तत िनयमों के तहत देश मकेीय संरित ारकों की सुरा और संरण करता है। िनयमानुसार भारतीय पुरात सवण मसूचीब िकसी भी ारक या ाचीन ल की वुित, ऐितहािसकता, ाप, भौितक प तथा ारक की ि इािद म बदलने का ावधान नहींह।
7 इस संबंध मे कृ पया सूचना संा 1 का संदभहण कर।
3. Dissatisfied with the response received from the CPIO, the Appellant filed a First Appeal dated 12.09.2022 alleging that the information provided was incomplete, false and misleading. The FAA vide order dated 20.09.2022 observed as under:-
“फ़ाइल के अवलोकन पर यह देखा गया हैिक सी.पी.आई.ओ ारा िदनांक 23.8.2022 को आर.टी.आई पोटल एवं ीड पो के माम सेजो जानकारी आवेदक को ा ई है उस जानकारी सेवह संतु नहींहै, इसिलए उनके ारा अपील को ाथिमकता दी गई। कराएं । तथािप, सी.पी.आई.ओ. (ारक) को िनदश िदया जाता हैिक वह आवेदक को पुनः िबंदु संा 2, 3 एवं 4 की सूचना कर ताल ई-मेल जोिक saurabhbhosale77[at]gmail[dot]com के माम सेउपल"
इसके अलावा, सी.पी.आई.ओ. (ारक) को िनदश िदया जाता हैिक उपरो आवेदक ारा मांगी गई सूचना उआर.टी.आई. अिधिनयम, 2005 के तहत िनधारत समय सीमा के अनुसार उपल कराएं । “
4. Aggrieved and dissatisfied, the Appellant approached the Commission with the instant Second Appeal dated Nil.
5. In compliance of order of FAA, a revised reply has been provided to the Appellant vide letter dated 26.10.2022. The relevant extract whereof is as under:
“..यह आपके आर.टी.आई आवेदन पंजीकरण संा ALSOI/R/E/22/00436, िदनांक 8.8.2022 और अपील सं.ALSOI/A/E/22/00178, िदनांक 12.9.2022 के संदभमहै जोिक नोडल अिधकारी (आर.टी.आई) ए.एस. आई मुालय के माम सेा आ हैऔर इसके साथ ही िनदेशक (ारक) और थम अपीलीय ािधकारी के िदनांक 21.9.2022 को जारी आदेश के आलोक महै।
जैसा िक िनदेशक (ारक) और थम अपीलीय ािधकारी ारा सी.पी.आई.ओ (ारक) को पुनः िबंदुसंा 2, 3 एवं 4 की सूचना कर आवक सूचना ई-मेल (mmpatil496@gmail.com) के माम सेआपको उपल करानेके िलए अपील के म मिनदिशत िकया गया है।
आपके ारा मांगी गई जानकारी के संदभमआपको सूिचत िकया जाता हैिक भारतीय पुरात सवण, ारक अनुभाग मिलिवंग एं व नॉन लीिवंग ारको की संा एवं सूची संबंिधत वांिछत जानकारी उपल नहींहै। इस िवषय मेकायगित पर हैकाय पूणहोतेही भारतीय पुरात सवण की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी..“
Facts emerging in Course of Hearing:
Appellant: Not present
Respondent: Dr. Akshat Kaushik, CPIO/ASI and Shri Harpreet Singh- participated in the hearing.
6. A written submission has been received from the Appellant and same has been taken on record for perusal. The relevant extract whereof is as under:
सिवनय िनवेदन हैिक उपरो करण के संबंध ममुझेसुनवाई सूचना ा ई है, िजसके अनुसार मेरी ितीय अपील की सुनवाई िदनांक 15/05/2026 को िनधारत की गई है।
महोदय, सुनवाई के िदन मेरेकायालय का कायिदवस होनेके कारण सुनवाई म गत प सेउपत होना मेरेिलए लगभग असंभव है। तथािप, मनेअपने कायालय मअवकाश हेतुआवेदन ुत िकया है। यि
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