HIGH COURT OF RAJASTHAN (JAIPUR BENCH)
Uma Shanker Vyas, J
Rajasthan State Industrial Development And Investment Corporation Limited – Appellant
Versus
Madan Mohan – Respondent
S.B. Civil Miscellaneous Appeal No. 2519/2015|2513/2015|2520/2015|2521/2015|2522/2015|2728/2015|2753/2015|2761/2015|2762/2015|3084/2015
वर्तमान सभी 10 अपीलें धारा 54 भू-अवाप्ति अधिनियम-1894 (आगे "अधिनियम-1894" कहा जावेगा) के तहत विद्वान अपर जिला न्यायाधीश, करौली (आगे "रेफरेंस न्यायालय" कहा जावेगा) द्वारा दीवानी विविध रेफरेंस प्रकरण संख्या 01/12 से 05/12 में पारित कॉमन निर्णय दिनांक 31.03.2015 से व्यथित होकर प्रस्तुत की गयी हैं।
सुसंगत व विवाद रहित तथ्य यह है कि राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लिमिटेड, जयपुर (जिसे आगे "रीको" कहा जावेगा) को हिण्डौन कस्बे में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु भूमि की आवश्यकता होने से "अधिनियम-1894" की धारा 4 के तहत अधिसूचना दिनांक 16.10.2002 जारी की, जिसका प्रकाशन दिनांक 30.10.2002 को हुआ, धारा 6 के तहत दिनांक 15.10.2003 को घोषणा जारी की गई, जिसका प्रकाशन दिनांक 17.10.2003 को हुआ तथा उसके पश्चात् विधिक प्रक्रिया अपनाई जाकर अपीलार्थी-दावेदारान रमेश की खसरा नम्बर 183/10072 की 19 एयर, दावेदार यादराम आदि की खसरा नम्बर 181 की 25 एयर, दावेदार मदन मोहन वगैरह की खसरा नम्बर 183 की 38 एयर, दावेदार द्वारिका आदि की खसरा नम्बर 184 की 25 एयर तथा दावेदार-खातेदार भीमसेन आदि की खसरा नम्बर 181/9776 की 36 एयर भूमि अवाप्त की गयी, जिसके उपरांत अवाप्तशुदा भूमि के मुआवजे के संबंध में न्यायालय भू-अवाप्ति अधिकारी-उप जिला कलक्टर, हिण्डौन सिटी (आगे "भू-अवाप्ति अधिकारी" कहा जावेगा) के द्वारा दिनांक 18.05.2004 को प्रोविजनल अवार्ड जारी किया गया, जिसके अनुसार प्रत्येक खसरा नंबर की अवाप्तशुदा भूमि में से 10 फीट की गहराई तक के व्यावसायिक दर अनुसार 600/-रूपये प्रतिवर्ग फीट की दर से तथा शेष पीछे की भूमि को असिंचित कृषि भूमि मानकर 23,715/-रूपये प्रति एयर की दर से मुआवजा दिलाया गया, लेकिन राज्य सरकार द्वारा इसका अनुमोदन नहीं कर दिनांक 10.08.2005 के पत्र के माध्यम से यह निर्देश दिया गया कि संपूर्ण अवाप्तशुदा भूमि कृषि भूमि है, अतः भूमि के कुछ भाग के संबंध में व्यावसायिक दर से मुआवजा दिलाया गया है, वह उचित नहीं है।
भू-अवाप्ति अधिकारी द्वारा दिनांक 31.08.2005 के पत्र के माध्यम से अवार्ड 18.05.2004 को उचित बताया, परंतु राज्य सरकार की ओर से पत्र दिनांक 06.09.2005 के माध्यम से संपूर्ण भूमि को कृषि भूमि मानकर ही अवार्ड पारित किये जाने का निर्देश दिया जिस पर भू-अवाप्ति अधिकारी द्वारा दिनांक 17.09.2005 को पारित अवार्ड को संशोधित करने में असमर्थता व्यक्त की, परंतु अंततः राज्य सरकार के पत्र क्रमांक दिनांक 26.09.2005 में दिये गये निर्देशों के अनुसार ही अवार्ड पारित किये जाने का आदेश दिया गया जिस पर दिनांक 30.09.2005 को भू-अवाप्ति अधिकारी द्वारा अंतिम अवार्ड जारी किया गया जिसे दिनांक 13.01.2006 को संशोधित किया गया और उसके पश्चात पुनः दिनांक 26.02.2006 को संशोधित करते हुए अंतिम अवार्ड पारित किया गया, जिसके अनुसार संपूर्ण भूमि को असिंचित कृषि भूमि मान कर 23,715/-रूपये प्रति एयर की दर से मुआवजा दिलाये जाने का आदेश दिया गया।
भू-अवाप्ति अधिकारी द्वारा पारित अंतिम अवार्ड से व्यथित व असहमत होकर "अधिनियम-1894" की धारा 18 के तहत आपत्तियां/दावे प्रस्तुत कर रेफरेंस न्यायालय को भिजवाने का निवेदन किया जिस पर भू-अवाप्ति अधिकारी द्वारा पांचों अपीलार्थी/भूमिधारक/दावेदार की आपत्तियों को रेफरेंस न्यायालय को प्रेषित किया, जहां पांच रेफरेंस प्रकरण संख्या 1/12 से 5/12 के रूप में पंजीकृत हुए तथा एक ही अपीलधीन आदेश दिनांक 31.03.2015 के माध्यम से पांचों रेफरेंस प्रकरणों का निस्तारण किया गया। रेफरेंस न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 31.03.2015 के माध्यम से राज्य मार्ग की सीमा से लगती 40 फीट की गहराई में स्थित भूमि के लिए 600/-रूपये प्रतिवर्ग फीट तथा शेष भूमि के लिए 23,715/-रूपये प्रति एयर की दर से मुआवजा दिलाया गया। अन्य लाभ के संबंध में जो आदेश दिया गया, उसके बाबत विवाद नहीं है।
अपीलार्थी/दावेदार/भूमिधारक द्वारा मुआवजा राशि को अपर्याप्त होना बताते हुए कुल पांच एकल पीठ दीवानी विविध अपील संख्या 2753/2015, 2762/2015, 2728/2015, 3084/2015 व 2761/2015 प्रस्तुत की गयी जबकि रीको की ओर से मुआवजा राशि को अधिक बताते हुए अपीलधीन निर्णय दिनांक 31.03.2015 से व्यथित होकर कुल पांच दीवानी विविध अपील संख्या 2513/2015, 2522/2015, 2519/2015, 2521/2015 तथा 2520/2015 प्रस्तुत की गयी।
चूंकि उपरोक्त सभी दस अपीलें एक ही अपीलधीन निर्णय दिनांक 31.03.2015 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी हैं तथा विवाद बिन्दु भी एक ही है, अतः इन सभी दस अपीलों का इस एक ही निर्णय के माध्यम से निस्तारण किया जा रहा है।
अपीलार्थी-भूमिधारक द्वारा मुख्य रूप से यह आपत्ति ली गयी है कि अवाप्तशुदा भूमि हिण्डौन नगर पालिका क्षेत्र में स्थित है, इसका व्याव
Login now and unlock free premium legal research
Login to SupremeToday AI and access free legal analysis, AI highlights, and smart tools.
Login
now!
India’s Legal research and Law Firm App, Download now!
Copyright © 2023 Vikas Info Solution Pvt Ltd. All Rights Reserved.