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2026 Supreme(Online)(Raj) 15514

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR


S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 7460/2022



1. Prashant Bansal Son Of Shri Shiv Dayal Gupta, Resident Of 65 Shiva Colony, Tonk Phatak, Jaipur.


2. Surendra Kumar Bansal Son Of Shri Prem Chand Bansal, Resident Of 47 Shripuram Colony, Gurjar Ki Thadi, Jaipur.


----Petitioners


Versus



1. State Of Rajasthan, Through P.p.


2. Kavita Pareek Wife Of Shri Radhakrishan Pareek, Aged About 46 Years, Resident Of 5-D-12, Second Floor, Government Multi Story Building, Gandhi Nagar, Jaipur (Rajasthan).


----Respondents


Connected With


S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 7256/2023



Kavita Pareek W/o Radhakrishan Pareek, Aged About 51 Years, Resident Of 5-D-12, Second Floor, Multistory Flats, Gandhi Nagar, Jaipur, Rajasthan.


----Petitioner


Versus



State Of Rajasthan, Through P.p.


----Respondent



For Petitioner(s) : Mr. Dinesh Kumar Garg


Mr. Ghanshyam Das Bansal


For Respondent(s) : Mr. Vijay Singh Yadav PP


Ms. Chhaya Sharma for


Mr. T.P. Singh Parmar


HON'BLE MR. JUSTICE CHANDRA PRAKASH SHRIMALI


Order







1.Arguments Concluded On:30/04/2026
2.Judgment Reserved On:30/04/2026
3.Full Judgment/Operative Part Pronounced:Full Judgment
4.Pronounced On:15.05.2026

एकलपीठ विविध आपराधिक याचिका संख्या 7460/2022 व एकलपीठ आपराधिक विविध याचिका संख्या 7256/2023 एक-दूसरे से संबंधित होने और उनमें समान पक्षकार होने के कारण से दोनों याचिकाओं को एक साथ इस आदेश में निर्णित किया जाना न्यायसंगत उचित प्रतीत होता है।

आराधिक विविध याचिका संख्या 7460/2022 में याचीगण/अभियुक्तगण ने प्रत्यर्थी संख्या 2 कविता पारिक द्वारा याचीगण/अभियुक्तगण के विरुद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 240/2019 पुलिस थाना प्रतापनगर जयपुर सिटी, पूर्व को याचिका में अंकित आधारों पर अपास्त करने हेतु प्रस्तुत की है। याचिका संख्या 7256/2023 याची/परिवादिया कविता पारिक द्वारा याचीगण/अभियुक्तगण के विरुद्ध दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 240/2019 पुलिस थाना प्रतापनगर जिला जयपुर सिटी (पूर्व) ने विधिनुसार स्वतंत्र व निष्पक्ष अनुसंधान करने के लिए सीबी-सीआईडी के द्वारा किए जाने हेतु याचिका प्रस्तुत की गई है।

याचिका संख्या 7460/2022 के याचीगण/अभियुक्तगण प्रशांत बंसल और सुरेन्द्र कुमार बंसल के विद्वान अधिवक्ता का बहस के दौरान यह तर्क रहा है कि प्रत्यर्थी संख्या 2 कविता पारिक ने याचीगण/अभियुक्तगण के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 240/2019 पुलिस थाना प्रतापनगर जयपुर, सिटी, पूर्व में दर्ज कराई थी, जिसमें प्रत्यर्थी संख्या 2 ने याचीगण/अभियुक्तगण के साथ अन्य व्यक्तियों को आरोपित करते हुए इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई कि परिवादिया अभियुक्त संख्या 1 को अपने पुराने घर का पड़ोसी होने के नाते पिछले 15 वर्ष से जानती है। अभियुक्तगण परिवादिया के गांधीनगर स्थित पते पर उसके पति को ब्याज पर दिये रुपये वापिस लेने के, परिवादिया व उसके पति के पास रुपयों की व्यवस्था नहीं होने के कारण से तथा परिवादिया के सरकारी कर्मचारी होने के कारण से अभियुक्त संख्या 2 ने परिवादिया से 2 चैक क्रमशः 992283, 992284 व रकम क्रमशः 10,00,000/-रुपए और 100 रुपए के सिक्योरिटी पेटे प्राप्त किए और परिवादिया के प्लॉट संख्या 44 श्याम विहार कॉलोनी श्योपुर, हल्दीघाटी मार्ग, प्रतापनगर, जयपुर को 10,00,000/-रुपए की साई पेटे विक्रय करवाने की एक लिखावट दी और परिवादिया से खाली स्टांप पर अभियुक्तगण ने हस्ताक्षर करवा लिए और उसके पति से भी 10-12 रिक्त चैक पर तथा खाली स्टांप व पाई पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए।

नोटबंदी के बाद रुपए नहीं होने के कारण से जब परिवादिया के पति द्वारा रुपए लौटाए नहीं गए तो अभियुक्तगण ने परिवादिया द्वारा दिया गया 10,00,000/-रुपए का चैक क्रमांक 992283 को अपने बैंक में लगाकर अनादरित करवा लिया और चैक अनादरण की कोई कार्यवाही नहीं की और माह, जुलाई, 2018 में अभियुक्तगण ने परिवादिया के घर का ताला तोड़कर कब्जा कर लिया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रतापनगर स्थित प्लॉट पर बिजली विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत करके स्वयं के नाम से बिजली का कनेक्शन ले लिया और अभियुक्तगण ने परिवादिया के खिलाफ मानसरोवर थाने में प्लॉट की रजिस्ट्री उनके नाम नहीं कराने की झूठी एफ.आई.आर. भी लिखवा दी। जबकि परिवादिया ने अभियुक्तगण के साथ उक्त प्लॉट को बेचने का कोई इकरार नहीं किया, न ही कोई स्टांप क्रय किया, इत्यादि रिपोर्ट पर पुलिस द्वारा धारा 420, 406, 467, 468, 380 एवं 120बी भारतीय दंड संहिता में अन्वेषण कर अंतिम रिपोर्ट संख्या 83/2019 अदम वकू सिविल नेचर में प्रस्तुत की।

तत्पश्चात अपर सिविल न्यायाधीश एवं महानगर मजिस्ट्रेट क्रम संख्या 2 जयपुर, महानगर के आदेश दिनांक 18.02.2020 से पुनः पुलिस ने अनुसंधान कर अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की। पुलिस ने यह माना कि परिवादिया ने वादग्रस्त प्लॉट के संबंध में इकरारनामा याचीगण/अभियुक्तगण के पक्ष में निष्पादित किया है तथा याचीगण/अभियुक्तगण का इकरारनामा, रसीद व अन्य कोई दस्तावेज फर्जी नहीं बताया है। अन्वेषण के दौरान विवादरहित दस्तावेजों को विवादित हस्ताक्षरों से एफएसएल परीक्षण हेतु भिजवाया गया। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी परिवादिया द्वारा दस्तावेज और रसीद निष्पादित किया जाना बताया गया है। जिस पर अनुसंधान कर थानाधिकारी पुलिस थाना प्रताप नगर पूर्व ने पुनः अंतिम रिपोर्ट संख्या 67/2024 अदम वकू अदम झूठ (तितम्बा) में प्रस्तुत की।

याचीगण/अभियुक्तगण के विद्वान अधिवक्ता का यह भी तर्क रहा है कि वस्तुतः प्रत्यर्थी संख्या 2 कविता पारिक द्वारा आपराधिक कृत्य किया गया है और उसके द्वारा वादग्रस्त प्लॉट का इकरारनामा निष्पादित करने पर 15,50,000/- रुपए वादग्रस्त प्लॉट की बेचान राशि के रूप में लेने पर तथा प्लॉट का आधिपत्य याचीगण/अभियुक्तगण को देने पर भी उसके द्वारा विक्रय पत्र निष्पादित नहीं कराया गया। प्रत्यर्थी संख्या 2 कविता पारिक ने विक्रय पत्र निष्पादित करने में

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