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2026 Supreme(Online)(Raj) 18970

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR


[2026:RJ-JP:19931]


S.B. Civil Miscellaneous Appeal No. 4434/2019



1. मिन्टू उर्फ मंजू देवी पत्नि स्व. श्री शंकर लाल, उम्र 34 वर्ष


2. निकिता पुत्री स्व. श्री शंकर लाल, उम्र 14 वर्ष


3. लक्की पुत्र स्व. श्री शंकर लाल, उम्र 12 वर्ष


4. पवन पुत्र स्व. श्री शंकर लाल, उम्र 10 वर्ष


(प्रार्थीगण संख्या 2 लगायत 4 नाबालिग जरिये प्राकृतिक संरक्षिका माता मिन्टू उर्फ मंजू देवी पत्नी स्व. श्री शंकर लाल जाट)


5. पूरन मल पुत्र स्व. श्री चूना राम, उम्र 70 वर्ष


6. सिणगारी देवी पत्नी श्री पूरन मल, उम्र 68 वर्ष


समस्त निवासीयान ग्राम कल्याणपुरा, पो0 मारखी, तहसील शाहपुरा, जिला जयपुर।



बनाम


1. सूरजकरण पुत्र हरकचन्द जाट, निवासी नान्दला, पुलिस थाना नसीराबाद सदर, जिला अजमेर, राजस्थान।


(हाल वाहन चालक ट्रेक्टर नंबर आरजे01-आरए-1562)


2. भंवर लाल पुत्र श्री हरकचन्द, निवासी 26, मैन बाजार खाती मोहल्ला, लीडी तहसील पीसागंज, जिला अजमेर, राजस्थान।


(हाल पंजीकृत स्वामी वाहन ट्रेक्टर नंबर आरजे01-आरए-1562)


3. एचडीएफसी अर्गो जनरल इन्श्योरेन्स क.लि. जरिये प्रबन्धक, कार्यालय सी-302, उपासना टावर, सी-स्कीम, जयपुर, राज0।


(बीमा कंपनी वाहन ट्रेक्टर नंबर आरजे01-आरए-1562)


---प्रार्थीगण/रेस्पोडेन्ट


For Appellant(s) : Mr. Rakesh Kumar Bhargava, Adv.

For Respondent(s) : Ms. Anjali Assat, Adv. for Mr. Virendra Agrawal, Adv.


HON'BLE MR. JUSTICE ASHUTOSH KUMAR


11/05/2026

Judgment

1. अपीलार्थीगण मिन्टू उर्फ मंजू देवी व अन्य द्वारा यह अपील धारा 173 मोटर वाहन अधिनियम-1988 के तहत न्यायालय मोटर दुर्घटना वाद न्यायाधिकरण, शाहपुरा, जिला जयपुर (जिसे आगे 'विद्वान अधिकरण' के नाम से संबोधित किया जाएगा) द्वारा क्लेम याचिका संख्या-96/2015, मिन्टू उर्फ मंजू देवी व अन्य बनाम सूरजकरण व अन्य में पारित निर्णय दिनांक 11.03.2019 के विरुद्ध प्रस्तुत की गई है।

2. अपीलार्थीगण मिन्टू उर्फ मंजू व अन्य द्वारा विद्वान अधिकरण के समक्ष, शंकरलाल की मोटर वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप कुल 78,10,000/- रुपये क्लेम प्राप्त करने हेतु क्लेम याचिका प्रस्तुत की गयी थी। विद्वान अधिकरण द्वारा उक्त क्लेम याचिका में अपीलार्थीगण को कुल 12,07,427/- रुपये की क्षतिपूर्ति राशि मय ब्याज 9 प्रतिशत सालाना की दर से दिलवाई गयी है। विद्वान अधिकरण के उक्त आक्षेपित निर्णय से व्यथित होकर हस्तगत अपील, अपीलार्थीगण की ओर से क्षतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी किये जाने हेतु प्रस्तुत की गयी है।

3. दौरान बहस विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थीगण का तर्क रहा कि विद्वान अधिकरण द्वारा वक्त घटना मृतक की मासिक आय 5,642/- रुपये (26 दिनों के आधार पर) निर्धारित की जाकर त्रुटि कारित की है, जबकि मृतक वक्त घटना ड्राईवरी व ट्रांसपोर्ट के कार्य से 16,000/- रुपये मासिक आय अर्जित करता था। विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थीगण का यह भी तर्क रहा कि विद्वान अधिकरण द्वारा कंसोर्टियम की मद में तथा अन्य मदों में भी अत्यधिक कम राशि दिलवाई गयी है, जिनमें बढ़ोतरी की जावे। अतः अपीलार्थीगण की ओर से प्रस्तुत अपील को स्वीकार किया जाकर विद्वान अधिकरण द्वारा पारित निर्णय को संशोधित कर क्षतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी किये जाने की प्रार्थना की गयी। विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थीगण की ओर से अपने तर्कों के समर्थन में न्यायिक दृष्टान्त Special Leave Petition (Civil) Diary No. 8684/2025 (SC), Sundari Devi & Ors. Vs. Ram Singh & Ors. प्रस्तुत किया गया।

4. इसके विपरीत विद्वान अधिवक्ता प्रत्यर्थी बीमा कम्पनी की ओर से अपीलार्थीगण के उपरोक्त तर्कों का विरोध करते हुए विद्वान अधिकरण द्वारा पारित किये गये निर्णय की पुष्टि किये जाने तथा अपीलार्थीगण की ओर से संस्थित की गयी अपील को निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया।

5. दोनों पक्षों की बहस सुनी गयी। पत्रावली का अवलोकन किया गया।

6. पत्रावली के अवलोकन से प्रकट होता है कि मामले की घटना दिनांक 16.04.2015 की बताई गई है तथा वक्त घटना अपीलार्थीगण द्वारा मृतक का मेसर्स शंकरलाल ट्रांसपोर्ट कंपनी का प्रोपराईटर होना, जिसके नाम दो ट्रक होना तथा मृतक द्वारा ड्राईवरी व ट्रांसपोर्ट का कार्य करना, जिससे उसका 16,000/- रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित करना बताया गया है। किन्तु मृतक की आय के संबंध में अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिकरण के समक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की गयी है। इन परिस्थितियों में विद्वान अधिकरण द्वारा मृतक को वक्त घटना कुशल श्रेणी का श्रमिक मानते हुए उसकी आय 26 दिनों के आधार पर 5,642/- रुपये मासिक निर्धारित की गई है।

7. हस्तगत मामले में मृतक ट्रक ड्राइवर के अतिरिक्त दो ट्रकों का मालिक भी था। जिस संबंध में अपीलार्थीगण की ओर से मृतक का चालन अनुज्ञापत्र प्रदर्श-20 तथा मृतक के नाम वाहनों के पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदर्श-21 व 22 प्रदर्शित करवाये गये हैं। ऐसी स्थिति में निश्चित रूप से मृतक ट्रक स्वामी होने के नाते वह अतिरिक्त आय भी अर्जित करता होगा। इस संबंध में सुन्दरी देवी (उपरोक्त) के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने ऐसे व्यक्ति को, जो कि ट्रक का स्वामी था व ट्रक चलाकर आय अर्जित करता था कि मासिक आय 15,000/- रुपये निर्धारित करते हुए क्षतिपूर्ति राशि का आंकलन किया है। इसी प्रकार Civil Appeal Nos. 6981-82/2022 (SC), Gurpreet Kaur & Ors. Vs. United India Insurance Company Ltd. & Ors. के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने ट्रक स्वामी व ट्रक चालक का कार्य करने वाले व्यक्ति की आय 25,000/- रुपये मानी जाकर क्षतिपूर्ति निर्धारित की है। हस्तगत मामले में भी अपीलार्थीगण की ओर से मृतक को ट्रक का स्वामी होने के नाते आय अर्जित करना व ट्रक को चलाकर भी आय अर्जित करना बताया गया है। मृतक के स्वामित्व के जो ट्रक थे, उनसे अभी भी आय कुछ हो रही होगी। ऐसी स्थिति में माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टांत सुन्दरी देवी (उपरोक्त) व गुरप्रीत कौर (उपरोक्त) का अवलंब लेते हुए, मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए तथा मृतक का ट्रक चलाकर व ट्रक मालिक होने के नाते हम, उसकी सकल आय 12,000/- रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाना उचित समझते हैं।

8. विद्वान

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