IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR
Jitendra Kumar – Appellant
Versus
State Of Rajasthan – Respondent
S.B. Civil Writ Petition No. 12757/2026
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HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR
S.B. Civil Writ Petition No. 12757/2026 CNR: RJHC020258572026 | URN: CW / 2009U / 2026
Jitendra Kumar S/o Sh. Ramesh, Aged About 24 Years, R/o Dhwaja Mauroli, Police Station Sadar Bayana, District Bharatpur,
Rajasthan.
----Petitioner Versus
1. State Of Rajasthan, Through Principal Secretary (Home), Govt. Of Rajasthan, Secretariat, Jaipur.
2. Principal Secretary, Department Of Social Justice Empowerment, Govt. Of Rajasthan, Secretariat, Jaipur.
3. Nodal Officer (Under Rule 9 Of The Sc/st (Poa Rules
1995) Cum Secretary), Department Of Information Technology And Communication, Govt. Of Rajasthan,
Secretariat, Jaipur.
4. Director General Police, Police Headquarters, Lal Kothi, Jaipur.
5. Director Of Prosecution, Govt. Of Rajasthan, Secretariat, Jaipur.
6. Adg Police, C.i.d. (Crime Branch), Police Headquarters, Lal Kothi, Jaipur.
7. Adg Police (Civil Rights), Police Headquarters, Lal Kothi, Jaipur.
8. Superintendent Of Police, District Bharatpur, Bharatpur.
9. Station House Officer, Sadar Bayana, District Bharatpur, Rajasthan.
----Respondents
For Petitioner(s) : Mr. Satish Kumar For Respondent(s) : Mr. Rajendra Singh Shekhawat, PP
HON'BLE MRS. JUSTICE SHUBHA MEHTA
Order
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18/08/2026
याची अधिवक्ता उपस्थित | विद्वान लोक अभियोजक उपस्थित | प्रकरण के
वर्तमान् अन्वेषण अधिकारी श्री दिनेश कुमार मीणा, अति0 पुलिस अधीक्षक, सिविल राईट्स, पुलिस मुख्यालय, जयपुर उपस्थित |
विद्वान लोक अभियोजक ने दिनांक 48.08.2026 की तथ्यात्मक Rud प्रस्तुत की |
यह याचिका याची ने निष्पक्ष अन्वेषण (fair investigation) किये जाने
हेतु प्रस्तुत की है।
याची के विद्वान अधिवक्ता का कहना है कि याची ने एक प्रथम सूचना
रिपोर्ट संख्या 428 / 2024 पुलिस थान सदर बयाना, जिला-भरतपुर में दर्ज करवाई थी और अभियुक्त पक्ष द्वारा भी एक कॉस प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 429/ 2024 इसी थाने में दर्ज करवाई गई थी। उनका तर्क है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट को दर्ज हुए 02 वर्ष 03 माह का समय व्यतीत हो चुका है, परन्तु अब तक नतीजा प्रस्तुत नहीं किया गया है। उनका तर्क है कि मामला धारा 447, 48, 749, 323, 325, 344, 308, 447, 504, 506 भारतीय दण्ड संहिता व धारा 3-4(आर)(एस), 3-4(वीए) अनुसूचित जाति / जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अपराधों से संबंधित है। उनका तर्क है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियम, 4995 के नियम 702) में अधिनियम के अन्तर्गत अपराधों से संबंधित प्रकरणों में 60 दिवस में आरोपपत्र प्रस्तुत किया जाना होता है और विलम्ब की स्थिति में अन्वेषण अधिकारी पर कारण लिखित में स्पष्ट करने का दायित्व है। उनका aw है कि इसी नियम के उपनियम 3 के प्रावधानों के अन्तर्गत सचिव गृह विभाग, सचिव अनुसूचित जाति विकास विभाग, अभियोजन निदेशक, अभियोजन भारसाधक अधिकारी, पुलिस महानिदेशक या भारसाधक पुलिस आयुक्त को हर तीन माह की अवधि के बाद सभी लम्बित अन्वेषण, जो कि अन्वेषण अधिकारी द्वारा किये जा रहे हैं, का पुनर्विलोकन (review) करने संबंधी प्रावधान है। उनका तर्क है कि वर्तमान् प्रकरण में निर्धारित अवधि 60 दिन, लगभग दो वर्ष पूर्व ही व्यतीत हो चुकी है तथा विलम्ब का कोई समुचित कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रकरण में अब तक 5-6 बार अन्वेषणकर्ता बदल चुके हैं। उनका कहना है कि हर
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अन्वेषण अधिकारी बार-बार पूर्व में की गईं अन्वेषण की तस्दीक के लिए याची को
बुलाता है और इससे स्वयं याची का ही उत्पीड़न (#8/3557700) हो रहा है।
वर्तमान् अन्वेषण अधिकारी श्री दिनेश कुमार मीणा, अति0 पुलिस अधीक्षक ने न्यायालय के समक्ष प्रकट किया कि वे इस प्रकरण में दिनांक 23.07.2026 से अन्वेषण अधिकरी हैं तथा उन्होंने संबंधित प्रकरण में अभियुक्तगण के विरूद्ध जुर्म प्रमाणित पाया है और इस आशय की cease रिपोर्ट भी प्रस्तुत की है। अन्वेषण अधिकारी तथा विद्वान लोक अभियोजक ने न्यायालय के समक्ष प्रकट किया कि दो सप्ताह के भीतर वे
न्यायालय में नतीजा प्रस्तुत कर देंगे।
हमने उभयपक्षों को सुना। पत्रावली का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया।
प्रकरण में लगभग 26-27 माह की लम्बी अवधि के उपरान्त भी अन्वेषण पूर्ण नहीं होना चिन्ताजनक है और इस अन्वेषण के पूर्ण नहीं होने का कोई समुचित कारण अब तक इस न्यायालय के समक्ष द
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