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2026 Supreme(Online)(Raj) 19148

IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR
Surendra Khinchi – Appellant
Versus
The Bar Council Of Rajasthan – Respondent
S.B. Civil Writ Petition No. 9369/2026



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[2026:RJ-JP:35534]

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR

S.B. Civil Writ Petition No. 9369/2026 CNR: RJHC020492832026 | URN: CW / 20877U / 2026

Surendra Khinchi S/o Brijmohan Khinchi, R/o A185, Char Darwaja Bahar, Near Samudik Kendra, Mandi Khatikan, Jaipur,

Rajasthan - 302002.

----Petitioner Versus

1. The Bar Council Of Rajasthan, Through Its Chairman, Rajasthan High Court Campus, Jhalamand, Jodhpur.

2. High Court Of Judicature For Rajasthan, Through Registrar General, Rajasthan High Court, Jodhpur / Jaipur

Bench.

3. State Of Rajasthan, Through Chief Secretary, Secretariat, Jaipur.

4. Advocate General, Rajasthan, High Court Campus, Jaipur. 5. The Bar Council Of India, Through Its Secretary, New

Delhi.

----Respondents

For Petitioner(s) : Mr. Vishal Soni For Respondent(s) : Mr. Prateek Kasliwal

Mr. Sandeep Pathak Mr. Arnab Singh

Mr. Nikhilesh Katara

HON'BLE MRS. JUSTICE SHUBHA MEHTA

Order

Date of conclusion of arguments 27.07.2026
Date on which the judgment was reserved 27.07.2026
Whether the full judgment or only the operative part was pronounced Full judgment
Date of Pronouncement 03-09-2026

यह याचिका याचिकाकार की ओर से इस आशय की प्रस्तुत की गई है

कि वह डॉ० भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर से वर्ष 2025 का विधि

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[2026:RJ-JP:35534] (2 of 3) [CW-9369/2026] स्नातक है। उसने बार राजस्थान अधिवक्ता परिषद में एडवोकेट के रूप में अपना नामांकन करवाने के लिए अधिवक्ता अधिनियम i96 के प्रावधानों के अंतर्गत एक प्रार्थाा-पत्र मय आवश्यक दस्तावेज एवं Yow अयाची संख्या-4 को प्रस्तुत कर दिया। उसने ई-मेल के जरिए भी एक प्रतिवेदन इसी आशय के लिए पृथक से प्रेषित किया। परंतु राजस्थान अधिवक्ता परिषद के चल रहे चुनावों एवं प्रशासनिक कारणों से उसका

प्रार्थान-पत्र अभी तक निस्तारित नहीं किया गया है।

बहस सुनी गई |

दौराने बहस विद्वान अधिवक्ता याची का तर्क रहा है कि याची का

नामांकन नहीं होने के कारण याची को भारी परेशानी हो रही है तथा उसके विधि व्यवसाय प्रारम्भ करने के अधिकार विपरीत रूप से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उसका व्यावसायिक कैरियर एवं आजीविका को भी गम्भीर संकट उत्पन्न हो गया है। अधिवक्ता अधिनियम 4964 की धारा 58 के अंतर्गत प्रावधान हैं कि यदि राज्य अधिवक्ता परिषद जब अपने कार्य करने में असमर्थ हो तो नामांकन सम्बन्धी कार्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा संपादित किए जावेंगे। नामांकन प्रक्रिया को चुनावों एवं प्रशासनिक कारणों से अनिश्चित काल के लिए टाला नहीं जा सकता है। अतः याची के पक्ष में रिट जारी कर अयाचीगण को आदेश दिया जावे कि वे याची का नामांकन अविलम्ब यथाशीघ्र एक निश्चित समयावधि में पूर्ण करें अथवा विकल्प में धारा 58 अधिवक्ता अधिनियम 4964 के तहत विधि अनुसार उसका नामांकन करने के लिए अयाची संख्या-2 को निर्देशित किया

जावे।

अयाचीगण की ओर से अग्रिम नोटिस पर विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित हैं, जिन्होंने प्रकट किया कि वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया के चलते नामांकन सम्बन्धी कार्य नहीं हो रहे हैं तथा ऐसे कार्यों को करने के लिए किसी प्रकार की कोई समिति गठित नहीं हो रखी है। पूर्व में दिनांक 24.02.2026 को ऐसे कार्यों के लिए समिति बनाई हुई थी जिसे उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षण समिति द्वारा दिनांक 42.03.2026 को निरस्त कर दिया है। अतः प्रार्थी सहित अन्य कई अभ्यर्थियों को वर्तमान में कोई समिति अस्तित्व में

नहीं होने से नामांकन (Enrollment) & कार्य में परेशानी हो रही है।

विचार किया गया। पत्रावली का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया गया।

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पत्रावली के अध्ययन से Whe होता है कि पक्षकारों के मध्य यह स्वीकृत स्थिति है कि याची की ओर से नामांकन हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर रखा है, जो अभी अयाचीगण के पास लम्बित है तथा इस प्रकरण की बहस के समय तक अधिवक्ता परिषद के चुनावों की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी तथा नामांकन के कार्य हेतु कोई समिति कार्यरत नहीं थी। जो तदर्थ समिति गठित की गई थी वह दिनांक 42.03.2026 के आदेश से निरस्त कर दी गई थी, इस कारण याचिकाकार के प्रार्थना-पत्र का निस्तारण

नहीं हुआ है।

वर्तमान में अधिवक्ता परिषद राजस्थान के चुनावों की प्रक्रिया सम्पन्न हो

चुकी है एवं परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं, इस तथ्य का न्यायिक संज्ञान इस न्यायालय द्वारा लिया जा सकता

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