STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
SBI Life Insurance Comapany limited – Appellant
Versus
Shri Sudhakar Dubey – Respondent
SC/9/A/352/2022
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/A/352/2022 null SBI Life Insurance Comapany limited PRESENT ADDRESS - MumbaiNCDRC,UTTAR PRADESH.
.......Appellant(s)
Versus Shri Sudhakar Dubey PRESENT ADDRESS - KaushambiNCDRC,UTTAR PRADESH.
.......Respondent(s)
BEFORE:
HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR , OFFICIATING PRESIDENT HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:
SBI Life Insurance Comapany limited, In-Person FOR THE RESPONDENT:
Shri Sudhakar Dubey, In-Person DATED: INVALID DATETIME
ORDER
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ (
मौखिक)
अपील संख्या-352/2022 एस0बी0आई0 लाइफ इंश्योरेंस कं0लि0 बनाम , श्री सुधाकर दुबे पुत्र श्री राजेन्द्र द्विवेदी व एक अन्य समक्ष:-
1. , माननीय श्री सुशील कुमार कार्यकारी अध्यक्ष।
2. , माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय सदस्य। , अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री सचिन गर्ग , प्रत्यर्थी सं01/परिवादी की ओर से उपस्थित:श्री विष्णु कुमार मिश्रा , प्रत्यर्थी सं02 बैंक की ओर से उपस्थित: श्री साकेत श्रीवास्तव विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक: 01.04.2025 माननीय श्री सुशील कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय
1.
परिवाद संख्या-53/2021 सुधाकर दुबे बनाम एस0बी0आई0 लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लि0 व एक अन्य में , जिला उपभोक्ता आयोग कौशाम्बी द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 25.03.2022 के विरूद्ध प्रस्तुत अपील पर दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना।
2. ,10,526/-
जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी द्वारा दो प्रीमियम के रूप में जमा धनराशि 1 रू0 06 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश पारित किया है।
3. , अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि बीमा पालिसी 12 वर्ष के लिए जारी की गयी थी , परन्तु केवल 02 वर्ष का प्रीमियम जमा किया गया। इसके पश्चात् कोई प्रीमियम जमा नहीं किया गया है
इसलिए जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश विधि विरूद्ध है।
-2- 4.
यह सही है कि बीमा पालिसी 12 वर्ष के लिए जारी की गयी थी। यह भी सही है कि परिवादी द्वारा केवल 02 वर्ष का प्रीमियम जमा किया गया। अत: इस अपील के विनिश्चय के लिए यह विधिक विनिश्चयात्मक बिन्दु उत्पन्न होता है कि क्या बीमा कम्पनी द्वारा बीमा अधिनियम 1938 की धारा-50 के अनुसार अपने दायित्वों का अनुपालन किया गया तथा बीमाधारक को इस आशय की सूचना दी गयी थी कि क्या वह पालिसी को निरन्तर ?
अस्तित्व में रखना चाहते हैं या नहीं
5. , पत्रावली पर ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जिससे यह जाहिर होता हो कि बीमा कम्पनी द्वारा बीमाधारक को इस आशय का कोई नोटिस दिया गया हो। बीमा अधिनियम 1938 की धारा-50 की व्यवस्था निम्न प्रकार से है:-
50. Notice of options available to the assured on the lapsing of a policy. —An insurer shall, [before the expiry of three months from the date on which the premiums in respect of a policy of life insurance were payable but not paid,] give notice to the policy-holder informing him of the options available to him [unless these are set forth in the policy.]
6. , अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि यह नियम प्रश्नगत पालिसी में लागू नहीं होता है परन्तु
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क सारवान नहीं माना जा सकता है क्योंकि धारा-50 लाइफ इंश्योरेंस की प्रत्येक पालिसी में लागू है और प्रस्तुत केस भी लाइफ इंश्योरेंस की परिभाषा में आता है। बीमा कम्पनी पर यह दायित्व धारा-50 के माध्यम से अधिरोपित किया गया है कि बीमाधारक को विकल्प की सूचना दी , जाए। प्रस्तुत केस में विकल्प की कोई सूचना बीमाधारक को नहीं दी गयी इसलिए जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश विधिसम्मत है।
-3-
आदेश
7.
प्रस्तुत अपील खारिज की जाती है।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गयी हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की
जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
( (
सुधा उपाध्याय) सुशील कुमार) सदस्य कार्यकारी अध्यक्ष जितेन्द्र पी0ए0-2 कोर्ट नं0-1 ..................
SUSHIL KUMAR OFFICIATING PRESIDENT ..................
SUDHA UPADHYAY MEMBER
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