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2025 Supreme(Online)(SCDRC) 3977

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
U P P C L – Appellant
Versus
Ram Prakash – Respondent
SC/9/A/2014/656



Petitioner Advocates:D Mehrotra ,Respondent Advocate: Satish Chandra Srivastava, Mujeeb Effendi

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/A/2014/656 null U P P C L PRESENT ADDRESS - -NCDRC,UTTAR PRADESH.

.......Appellant(s)

Versus Ram Prakash PRESENT ADDRESS - -NCDRC,UTTAR PRADESH.

.......Respondent(s)

BEFORE:

HON'BLE MR. VIKAS SAXENA , JUDICIAL MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:

U P P C L, In-Person FOR THE RESPONDENT:

Ram Prakash, In-Person DATED: 28/02/2025

ORDER

( )

सुरक्षित , , राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उ0प्र0 लखनऊ अपील सं0- 656/2014 , (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग औरैया द्वारा परिवाद सं0- 132/2013 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 07.03.2014 के विरुद्ध)

1. Dakhshinanchal Vidyut Vitran Nigam Limited, through Adhishashi Abhiyanta Dakshinanchal Vidyut Vitran Khand, Auriyya District Auraiyya

2.Adhishashi Abhiyanta Dakshinanchal Vidyut Vitran Nigam, Ltd. Auraiyya, District Auraiyya.

…….Appellants Versus Ram Prakash son of Narayan resident of Village Sujanpura, Post Dakhlipur, Pargana & District Auraiyya ………..Respondent समक्ष:-

1. मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य।

2. मा0 श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य। , अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री दीपक मेहरोत्रा

विद्वान अधिवक्ता।

प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।

दिनांक:- 28.02.2025 , माननीय श्री विकास सक्सेना सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय परिवाद सं0- 132/2013 राम प्रकाश बालिग बनाम दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि0 व , एक अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग औरैया द्वारा पारित निर्णय व आदेश दि0 07.03.2014 के विरुद्ध यह अपील राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है।

प्रत्यर्थी/परिवादी ने इन अभिकथनों के साथ परिवाद प्रस्तुत किया कि उसने विद्युत संयोजन हेतु जून 1998 में निर्धारित फीस अपीलार्थीगण/विपक्षीगण के कार्यालय में जमा , किया था किन्तु वर्ष 2008 तक न तो खम्भे गाड़े गये न तो विद्युत सप्लाई हुई। प्रत्यर्थी/परिवादी ने शिकायतें की, किन्तु उसे विद्युत उपलब्ध नहीं करायी गई। इसके बावजूद वर्ष 1998 में विद्युत कनेक्शन चालू दिखाकर उस पर 51,124/-रू0 का गलत और फर्जी बिल भेज दिया गया एवं रिकवरी नोटिस प्रेषित कर दी गई, जिससे व्यथित होकर यह वाद प्रस्तुत किया

गया है।

अपीलार्थीगण/विपक्षीगण का कथन इस प्रकार आया है कि प्रत्यर्थी/परिवादी विद्युत का

लगातार उपभोग कर रहा है। वर्ष 2013 में विद्युत विभाग द्वारा निरीक्षण किये जाने पर यह पाया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादी अवैध रूप से विद्युत का उपभोग कर रहा है। परिवाद खारिज किये जाने की प्रार्थना की गई।

विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रत्यर्थी/परिवादी का परिवाद स्वीकार किया एवं यह निष्कर्ष दिया कि बिना विद्युत सप्लाई के प्रत्यर्थी/परिवादी पर 51,124/-रू0 का बिल प्रेषित किया गया। अत: बिल को वसूल न किये जाने और प्रत्यर्थी/परिवादी को कनेक्शन दिये जाने का

अनुतोष प्रदान किया गया, जिससे व्यथित होकर यह अपील प्रस्तुत की गई है।

अपील में प्रश्नगत निर्णय को पूर्णतया अवैध एवं मनमाना बताया गया। अपील के मेमो के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी वर्षों से अवैध रूप से विद्युत का उपभोग कर रहा था। प्रत्यर्थी/परिवादी ने वर्ष 1998 में आवश्यक धनराशि अदा करके आवेदन किया था, जिस पर उसे कनेक्शन सं0- 989260 स्वीकृत किया गया। प्रत्यर्थी/परिवादी ने वर्ष 1998 में विद्युत कनेक्शन हेतु आवेदन किया था जिसकी 15 वर्ष उपरांत विद्युत कनेक्शन जोड़े जाने हेतु परिवाद प्रस्तुत किया है जो समय-सीमा से बाधित है। लगभग 15 वर्षों से प्रत्यर्थी/परिवादी ने कोई शिकायत कनेक्शन न जोड़े जाने की नहीं की है, जिससे स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी/परिवादी कनेक्शन का उपभोग कर रहा था एवं उसके द्वारा कोई भी विद्युत बकाया नहीं दिया गया जिसके लिये रिकवरी भेजी गई थी। अपीलार्थी/विपक्षी के अनुसार उ0प्र0 राज्य ने ‘’कटिया कनेक्शन विनियमितीकरण योजना’’ चलायी थी। इस योजना के अंतर्गत जो व्यक्ति अवैध रूप से कटिया लगाकर विद्युत का उपभोग कर रहा था उसका विनियमितीकरण वैध कनेक्शन देकर किया गया। इस योजना में ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कोई दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की गई थी। प्रत्यर्थी/परिवादी को भी उक्त योजना के अंतर्गत कनेक्शन दिया गया एवं एक विशिष्ट कनेक्शन संख्या एलाट की गई, चूँकि प्रत्यर्थी/परिवादी बिना देय के विद्युत उपभोग का आदी था। उसके द्वारा उक्त कनेक्शन से निर्धारित धनराशि भी नहीं दी गई, जिस कारण उसके विरुद्ध बकाया धनराशि की वसूली जारी की गई है, चूँकि प्रत्यर्थी/परिवादी ने वर्ष 1998 के 15 वर्ष बाद परिवाद योजित किया है, अत: उस समय के अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, किन्तु इसके उपरांत विद्युत विभाग द्वारा किये

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