2026 Supreme(Online)(SCDRC) 217
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Lal Chand Yadav – Appellant
Versus
Ram Subhag Singh (Deceased) & others – Respondent
SC/9/RP/50/2024
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH REVISION PETITION NO. SC/9/RP/50/2024 Lal Chand Yadav PRESENT ADDRESS - tg 2 purvanchal vidyut vitran nigam ltd khalialabad khiruvan post nathnagar distt sant kabir nagar,UTTAR PRADESH.
.......Petitioner(s)
Versus Ram Subhag Singh (Deceased) & others PRESENT ADDRESS - village post sisvaniya distt sant kabir nagar ,UTTAR PRADESH.
.......Respondent(s)
BEFORE:
HON'BLE MR. JUSTICE AJAI KUMAR SRIVASTAVA , PRESIDENT HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE PETITIONER:
Lal Chand Yadav, Umesh Kumar Sharma (Advocate)
FOR THE RESPONDENT:
Ram Subhag Singh (Deceased) & others DATED: 07/01/2026
ORDER
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित)
पुनरीक्षण संख्या:-50/2024 लाल चन्द्र यादव पुत्र श्री भागीरथी यादव, टी0जी0 2, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, संतकबीर नगर बनाम राम सुभग सिंह (मृतक) पुत्र त्रिलोक सिंह द्वारा ओम प्रकाश सिंह व अन्य समक्ष:-
1. माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उपस्थित : श्री उमेश कुमार शर्मा
विपक्षीगण की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक:- 07.01.2026 माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
1- प्रस्तुत पुनरीक्षण याचिका जिला उपभोक्ता आयोग, संतकबीर नगर द्वारा परिवाद सं0-
83/2023 में पारित आलोच्य आदेश दिनांकित 20.5.2024 से क्षुब्ध होकर योजित की गई है।
2. विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित आलोच्य आदेश दिनांकित 20.5.2024 अधोलिखित है :-
''प्रार्थना-पत्र-22 मु0 41,000/- रूपये हर्जे पर स्वीकार किया जाता है। आपत्ति तद्नुसार निस्तारित की जाती है। विपक्षी नंबर-2 द्वारा दाखिल जवाबदावा सामिल मिसिल हो। विपक्षी नंबर-2 को निर्देशित किया जाता है कि वह उक्त हर्जा परिवादी को आयोग के समक्ष प्राप्त कराऍ अथवा किसी अन्य माध्यम से परिवादी के खाते में जमा करें, उसे परिवादी के अधिवक्ता को नहीं दिया जाए। नियत तिथि तक उक्त हर्जा न देने की स्थिति पर यह आदेश स्वतः अपास्त समझा जाएगा।
पत्रावली वास्ते साक्ष्य विपक्षी नंबर-2 दिनांक 19.6.2024 को पेश हो।''
3. विपक्षीगण को पंजीकृत डाक से नोटिस आदेश दिनांकित 12.6.2024 के माध्यम से दिनांक 10.02.2025 को निर्गत किया गया था, जिसके बावजूद भी विपक्षीगण के पक्ष से कोई उपस्थित नहीं
हुआ। अत: विपक्षीगण पर आदेश -2-
दिनांकित 11.7.2025 के द्वारा नोटिस का तामीला पर्याप्त अवधारित किया गया है, इसके प श्चात भी विपक्षीगण के पक्ष से कोई उपस्थित नहीं है।
4. पीठ द्वारा पुनरीक्षणकर्ता के पक्ष से उपस्थित योग्य अधिवक्ता श्री उमेश कुमार शर्मा के
तर्कों को विस्तार पूर्वक सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक परिशीलन किया गया।
5. पुनरीक्षणकर्ता के योग्य अधिवक्ता का यह तर्क है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा निर्गत कोई नोटिस विपक्षी संख्या-2 को प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए परिवाद दर्ज होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। यह भी कथन किया है कि विपक्षी संख्या-2 को विपक्षी संख्या-1 द्वारा दायर परिवाद के बारे में जानकारी प्राप्त हुई, तब विपक्षी संख्या-2 ने लिखित कथन के साथ लिखित तर्क को पत्रावली पर लेने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया तथा विद्वान जिला आयोग ने उपरोक्त आवेदन पर निर्णय लेते समय परिवाद के निर्णय हेतु लिखित कथन को
पत्रावली पर लेने की अनुमति तो प्रदान की, किन्तु इसके लिए अंकन 41,000/- रुपये का शुल्क लगाया है, जो अविधिक एवं अधार्य है तथा अपास्त होने योग्य है।
6. पुनरीक्षणकर्ता के योग्य अधिवक्ता के तर्कों के आलोक में तथा सम्पूर्ण पत्रावली के अवलोकन से यह तथ्य विदित होता है कि विशेष रूप से प्रश्नगत परिवाद संख्या-83/2023 के आदेश पत्रों की प्रतिलिपि पत्रावली पर उपलब्ध है, जिसमें आलोच्य आदेश दिनांकित 20.5.2024 भी सम्मिलित है, उक्त के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी संख्या-2 के विरुद्ध दिनांक 20.10.2023 को उनकी अनुपस्थिति के कारण वाद की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से अग्रसारित की गई है तथा पत्रावली दिनांक 08.11.2023 को बहस हेतु नियत की गई है। दिनांक 07.12.2023 को विपक्षी संख्या-2 के पक्ष से प्रार्थना-पत्र 22 व शपथ-पत्र 22 प्रस्तुत किये गये हैं, जो कि अत्यंत विलम्ब से दिये गये
हैं। परिवाद में नोटिस तामीला के दिन से 45 दिन के अंदर जवाबदावा/लिखित -3-
कथन दाखिल करने का प्रावधान है, जबकि विपक्षी संख्या-2 द्वारा दिनांक 03.7.2023 को नोटिस तामीला के उपरांत दिनांक 07.12.2023 को रिकॉल प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया है, जो विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के अनुसार लगभग 05 महीने से अधिक का समय व्यतीत होने