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2026 Supreme(Online)(SCDRC) 259

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Dr. B M Goel – Appellant
Versus
Narendra Singh – Respondent
SC/9/A/613/2004



Petitioner Advocates:V.P.SHERMA ,Respondent Advocate:

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/A/613/2004 Dr. B M Goel PRESENT ADDRESS - A,UTTAR PRADESH.

.......Appellant(s)

Versus Narendra Singh PRESENT ADDRESS - A,UTTAR PRADESH.

.......Respondent(s)

BEFORE:

HON'BLE MR. JUSTICE AJAI KUMAR SRIVASTAVA , PRESIDENT HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:

Dr. B M Goel FOR THE RESPONDENT:

Narendra Singh DATED: 08/01/2026

ORDER

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ (सुरक्षित अपील सं0- 613/2004 (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, आगरा द्वारा परिवाद सं0- 435/1997 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 21.02.2004 के विरुद्ध)

Dr. B.M. Goyal Clinic Situated at Bharatpur Road, Kasba Achnera, Tehsil Kirawali District Agra.

…….Appellant Versus Narendra Singh alias Pappu, S/o Sri Lakhan Singh R/o Kasba Achnera, (Infront of P.S.

Achnera), P.S. Achnera, Tehsil Kirawali District Agra.

……..Respondent समक्ष:-

माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष।

माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री वी0पी0 शर्मा, योग्य अधिवक्ता।

प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।

दिनांक:- 08.01.2026 माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष द्वारा उद्घोषित निर्णय

1. अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम, आगरा द्वारा परिवाद संख्या- 435/1997 में पारित आलोच्य निर्णय एवं आदेश दिनांक 21.02.2004 से क्षुब्ध होकर योजित की गई है जिसके माध्यम से विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा अधोलिखित आदेश पारित किया गया है:-

परिवाद स्वीकृत कर विपक्षी को निर्देश दिया जाता है कि आदेश पारित होने के तीस दिन के अन्दर परिवादी को पत्नी के उपचार में किये खर्चे की बाबत 10,000/-रूपये (दस हजार) तथा पत्नी की मृत्यु, शारीरिक व मानसिक कष्ट व सेवा में कमी की क्षतिपूर्ति हेतु 1,00,000/-रूपया (एक लाख) उक्त अवधि में परिवादी

को भुगतान करे।

निर्धारित अवधि में आदेश का पालन न करने पर निर्धारित अवधि के बाद भुगतान होने तक उपरोक्त धनराशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देय होगी।

2. पीठ द्वारा अपीलार्थी के योग्य अधिवक्ता के तर्कों को विस्तारपूर्वक सुना गया।

आलोच्य निर्णय एवं आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक परीक्षण व परिशीलन किया गया। प्रत्यर्थी के पक्ष से कोई उपस्थित नहीं है तथा न ही आदेश दिनांकित 17.10.2025 में किये गये उल्लेख के अनुसार योग्य अधिवक्ता श्री राम सेवक उपाध्याय ने अपना वकालतनामा ही प्रस्तुत किया है। अत: आदेश दिनांकित

27.11.2025 के माध्यम से प्रत्यर्थी के विरुद्ध एकपक्षीय रूप से कार्यवाही अग्रसारित किया गया।

3. सुसंगत तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने अपनी पत्नी श्रीमती देवेन्द्री के पेट में दर्द होने के कारण दिनांक 19.06.1997 को विपक्षी/चिकित्सक को दिखाये, जिन्होंने दवा दिया तथा दर्द ठीक हो गया। विपक्षी ने श्रीमती देवेन्द्री की कुछ जांचें स्वयं अपनी लेबोरेट्री पर किया। दिनांक 28.06.1997 को विपक्षी द्वारा दवाइयां लिखी गईं जिसके क्रम संख्या- 2 पर जेक्टोफार इंजेक्शन व क्रम संख्या- 4 पर पेनसिलीन इंजेक्शन लिखा गया, जिसे विपक्षी ने बिना जांच किये लगा दिया जिससे रियेक्शन हो गया व इंजेक्शन लगते ही परिवादी की पत्नी ने बताया कि उनकी आंखो ं के सामने अंधेरा हो रहा है, तदोपरांत वे बेहोश हो गईं तथा थोड़ी देर में उनकी मृत्यु हो गई। विपक्षी की लापरवाही, असावधानी, जल्दबाजी व गैर जिम्मेदाराना कृत्यों के कारण परिवादी को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी तथा मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा, जिससे क्षुब्ध होकर परिवादी ने यह परिवाद संस्थित किया है।

4. विपक्षी द्वारा अपने लिखित कथन में यह अभिकथन किया गया है कि परिवादी की पत्नी श्रीमती देवेन्द्री ने दिनांक 19.06.1997 को क्लीनिक पर आकर दिखाया तो उस समय उन्हें ज्वाइंडिस, प्रेग्नेंसी, शरीर पर सूजन व पेट में

दर्द था। विपक्षी ने रूटीन जांचें स्वयं की तथा विशेष जांचें डॉ0 पवन अग्रवाल से कराया एवं प्रारम्भिक उपचार कर एस0एन0 मेडिकल कालेज आगरा उपचार कराने हेतु रेफर कर दिया। परिवादी दिनांक 20.06.1997 को भी अपनी पत्नी को विपक्षी के क्लीनिक पर लेकर आये तब भी उन्हें एस0एन0 मेडिकल कॉलेज आगरा के लिये रेफर किया गया। क्लीनिक पर उन्हें विपक्षी द्वारा जेक्टोफर एवं पेनसिलीन इंजेक्शन दिनांक 19.06.1997 को सेंसिविटी टेस्ट करने के बाद लगाये गये थे। परिवादी ने जानबूझकर दिनांक 19.06.1997 व दिनांक 20.06.1997 के दवाओं के पर्चें दाखिल नहीं किये हैं। परिवादी की पत्नी की मृत्यु इंजेक्शन लगाने के कारण नहीं हुई है न ही दिनांक 28.06

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