2026 Supreme(Online)(SCDRC) 260
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
U P POWER CORPORATION Through its chairman – Appellant
Versus
RAJNI KANT NOW VIKAS KUMAR S/o. rajni kant – Respondent
SC/9/FA/24/2026
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/FA/24/2026 (Against the Order dated 23rd November 2022 in Complaint DC/155/CC/252/08 of the District Consumer Disputes Redressal Commission Kannauj)
WITH SC/9/IA/21/2026 (FOR GRANT OF STAY)
U P POWER CORPORATION Through its chairman PERMANENT ADDRESS - KANNAUJKANNAUJ,UTTAR PRADESH.
VIYUT ADHISHASHI ABHIYANTA Through its kannauj PERMANENT ADDRESS - KANNAUJ,UTTAR PRADESH.
EXECUTIVE ENGINEER Through its edd kannauj PERMANENT ADDRESS - KANNAUJ,UTTAR PRADESH.
.......Appellant(s)
Versus RAJNI KANT NOW VIKAS KUMAR S/o. rajni kant PERMANENT ADDRESS - KANNAUJKANNAUJ,UTTAR PRADESH.
.......Respondent(s)
BEFORE:
HON'BLE MR. JUSTICE AJAI KUMAR SRIVASTAVA , PRESIDENT HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:
U P POWER CORPORATION Through its chairman, ISAR HUSAIN (Advocate) VIYUT ADHISHASHI ABHIYANTA Through its kannaujEXECUTIVE ENGINEER Through its edd kannauj FOR THE RESPONDENT:
RAJNI KANT NOW VIKAS KUMAR S/o. rajni kant DATED: 08/01/2026
ORDER
(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ०प्र०, लखनऊ एससी/9/एफए/24/2026 उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड द्धारा चेयरमैन व अन्य .......अपीलार्थी
बनाम विकास कुमार पुत्र स्व0 रजनीकान्त एवं उत्तम कुमार पुत्र स्व0 रजनीकान्त निवासी मौजा सुरसी परगना
तिर्वा जनपद-कन्नौज।
........प्रत्यर्थीगण समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य दिनांक 08.01.2026 माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय
1. अपीलकर्ता के पक्ष से योग्य अधिवक्ता श्री इशार हुसैन को सुना गया।
विलम्ब क्षमा प्रार्थना पत्र का निस्तारण
2. यह आवेदन अपीलार्थी द्धारा अपील को संस्थित करने में हुये 1067 दिन के विलम्ब को क्षमा करने के
लिये प्रस्तुत किया गया है।
3. प्रस्तुत प्रकरण के तथ्य एवं परिस्थितियो ं को दृष्टिगत रखते हुये इसे अंगीकरण के बिन्दु पर निस्तारित किया जाना प्रस्तावित किया जा रहा है। अत: उपरोक्त कारणों से प्रत्यर्थीगण को नोटिस निर्गत किया जाना प्रस्तावित नहीं है।
4. मामले के सुसंगत तथ्य यह है कि परिवादीगण के दादा ने परिवाद संख्या-252/2008 जिला उपभोक्ता आयोग, कन्नौज में इस आशय से योजित किया है कि उनके दादा निजी नलकूप हेतु विद्युत कनेक्शन संख्या- 1196 प्राप्त किये थे। दिनांक 23.11.1996 को ट्रान्सफार्मर जल गया जिसकी शिकायत विपक्षी के यहां की गई। शिकायत का निवारण विपक्षी/विद्युत विभाग द्धारा नहीं किया गया जिससे परिवादीगण के सरसों व आलू की पैदावार अंकन 100000/-की नष्ट हो गई। परिवादी/प्रत्यर्थीगण बराबर विद्युत का उपभोग किया जा रहा है। परिवादी/प्रत्यर्थीगण पर जून 2003 तक अंकन 39881/-रूपये बकाया था। परिवादीगण के दादा के मृत्यु के उपरान्त उनके पिता के नाम से विद्युत कनेक्शन प्रतिस्थापित किया गया जिनकी भी दिनांक 28.09.2019 को मृत्यु हो गई। माह नवम्बर 2025 तक परिवादीगण/प्रत्यर्थीगण पर अंकन 12,63,088/- रूपये सेक्शन-2(15) के अनुसार बकाया है। चूंकि प्रत्यर्थीगण/परिवादीगण द्धारा नियमित रूप से विद्युत का उपभोग किया जा रहा है परन्तु लगभग 27 वर्ष से प्रत्यर्थीगण/परिवादीगण द्धारा विद्युत बकाया का भुगतान नही किया जा रहा है। अत: विलम्ब प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुये अपील अंगीकृत किया जाये। अपीलार्थी
का विलम्ब मर्षण का प्रार्थना पत्र शपथपत्र से समर्थित है।
5. अपीलार्थी के योग्य अधिवक्ता का यह तर्क है कि अपील प्रस्तुत करने में 1067 दिन का विलम्ब है। यह विलम्ब जानबूझकर नहीं किया गया बल्कि परिस्थितिवश हो गया है जिसे क्षमा करते हुये विलम्ब मर्षित किया जाना न्यायोचित है।
6. अपीलार्थी के अधिवक्ता को सुनने तथा अभिलेखों के अवलोकन के पश्चात उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा-41 में अपील प्रस्तुत करने का प्राविधान नीचे उदृत किया जा रहा है:-
‘’जिला उपभोक्ता आयोग द्धारा पारित किसी आदेश से व्यथित होकर कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश के विरूद्ध, तथ्यों या कानून के आधार पर, आदेश की दिनांक से पैंतालिस दिन की अवधि के भीतर, ऐसे प्रारूप से, जैसा कि विहित किया जाए, राज्य आयोग को अपील कर सकेगा।
परन्तु राज्य आयोग उक्त पैंतालिस दिन की अवधि की समाप्ति के पश्चात भी अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उक्त अवधि के भीतर अपील दाखिल न करने के लिये पर्याप्त कारण था।, यह भी प्राविधान है कि किसी व्यक्ति द्धारा की गई कोई अपील, जिससे जिला आयोग के आदेश के अनुसार कोई धनराशि देने की अपेक्षा की जाती है, राज्य आयोग द्धारा त