2026 Supreme(Online)(SCDRC) 569
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
National Insurance Co. Ltd – Appellant
Versus
Valmiki Gupta and others – Respondent
SC/9/A/303/2023
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/A/303/2023 National Insurance Co. Ltd PRESENT ADDRESS - Lucknow,UTTAR PRADESH.
.......Appellant(s)
Versus Valmiki Gupta and others PRESENT ADDRESS - Kushinagar,UTTAR PRADESH.
.......Respondent(s)
BEFORE:
HON'BLE MR. JUSTICE AJAI KUMAR SRIVASTAVA , PRESIDENT HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:
National Insurance Co. Ltd, Deepak Kumar Agarwal (Advocate)
FOR THE RESPONDENT:
Valmiki Gupta and others DATED: 23/01/2026
ORDER
(
सुरक्षित) , , राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उ0प्र0 लखनऊ अपील संख्या-303/2023 , नेशनल इंश्योरेन्स कम्पनी लिमिटेड द्धारा रीजनल मैनेजर रीजनल आफिस पंचम तल रीजेन्सी प्लाजा 5 पार्क रोड हजरतगंज लखनऊ। अपीलार्थी/विपक्षी सं0-1 बनाम वाल्मिकी गुप्ता व्यस्क पुत्र नगीना गुप्ता ग्राम मिसिरपट्टी पोस्ट कठकुइया तहसील पडरौना जनपद-कुशीनगर व अन्य।
प्रत्यर्थीगण/परिवादिनी/विपक्षी सं0-3 समक्ष:-
1. , माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव अध्यक्ष।
2. , माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय सदस्य।
:
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित श्री दीपक कुमार अग्रवाल :
प्रत्यर्थीगण की ओर से उपस्थित कोई नहीं
23.01.2026 दिनांक: , माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
1. , , , प्रस्तुत अपील अपीलार्थी बीमा कंपनी द्वारा परिवाद संख्या-153/2019 वाल्मिकी गुप्ता व अन्य , बनाम नेशनल इंश्योरेंस कं0लि0 व अन्य में विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग कुशीनगर द्वारा पारित आलोच्य , निर्णय/आदेश दिनांक 28.12.2022 से क्षुब्ध होकर योजित की गई है जिसके माध्यम से विद्वान जिला , उपभोक्ता आयोग कुशीनगर ने उक्त परिवाद को स्वीकार करते हुए अधोलिखित आदेश पारित किया है :-
''
परिवाद स्वीकार किया जाता है तथा विपक्षीगण संख्या-1 व 2 को निर्देशित किया जाता है कि वे
मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत बीमित राशि का भुगतान परिवादी को दो माह के अन्दर कर दें। इसके विफल रहने पर उपरोक्त राशि पर निर्णय तिथि से 08 प्रतिशत ब्याज विपक्षीगण संख्या-1 व 2 ''
द्धारा परिवादी को देय होगा।
2. , प्रस्तुत अपील के निस्तारण के उद्देश्य से सुसंगत तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी सं0-1 वाल्मिकी
गुप्ता के पुत्र पवन कुमार की मृत्यु दिनांक 15.04.2018 को गुजरात में पानी में डूबने से हो गई। स्थानीय , पुलिस द्धारा मामला अंकित कर शव का पोस्टमार्टम कराया गया। मृतक पवन कुमार भरूच गुजरात में कार्य , करते थे तथा परिवार के मुख्य रोटी अर्जक थे। परिवाद में किए गए कथनों के अनुसार प्रत्यर्थी संख्या-1 , श्री वाल्मिकी के पुत्र की मृत्यु के समय आयु 18 से 70 वर्ष के मध्य थी तथा उनकी वार्षिक आय अंकन 75 000/- , रू0 से कम थी। प्रत्यर्थी सं0-1 के पुत्र अविवाहित होने के कारण परिवार के मुख्य रोटी अर्जक थे , इस कारण वह मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना जिसे अग्रेत्तर विवेचना में योजना शब्द से , , ,00 संशोधित किया जाएगा के अंतर्गत पात्र व्यक्ति थे जिनकी मृत्यु के कारण प्रत्यर्थी संख्या-1 अंकन 5 ,000/- , रू0 प्राप्त करने के अधिकारी हैं। प्रत्यर्थी संख्या-1 ने घटना की सूचना विपक्षी संख्य-3 , जिलाधिकारी को दी किंतु विपक्षी बीमा कम्पनी द्धारा दुर्घटना बीमा दावा का भुगतान मृतक पवन को परिवार का मुखिया न होने एवं अविवाहित होने तथा पारिवाद का मुखिया मृतक के पिता होने के आधार पर निरस्त कर दिया
जिससे क्षुब्ध होकर प्रस्तुत परिवाद संस्थित किया गया है।
बीमा कंपनी के अनुसार शासन द्धारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र एवं ग्राम पंचायत अधिकारी व लेखपाल के
प्रतिवेदन में जो मृत्यु तिथि प्रदर्शित किया गया है उसमे अंतर है। वास्तविकता यह है कि मृतक की मृत्यु दिनांक 13.04.2018 को लगभग 2.00 बजे अंकलेश्वर डैम में अपने मित्रों के साथ नहाते समय हो गई थी। जिसकी सूचना उसके साथ आये मुन्ना यादव ने दो दिन बाद अपने कान्ट्रैक्टर आलम को दिया जिसके उपरान्त दिनांक 15.04.2018 को पुलिस में मामला पंजीकृत कराया गया। यह भी कथन किया गया है कि परिवादी ने जांच अधिकारी के समक्ष यह उल्लिखित किया था कि मृतक के नाम से कृषि भूमि नहीं थी। मृतक की शादी भी नहीं हुई थी तथा वह परिवार के मुखिया भी नहीं थे। जबकि मृतक की मासिक आय अंकन 12000/- रूपये होने का
उल्लेख किया गया है। इस कारण भी परिवादी का दावा अस्वीकृत किया गया।
3.
उभय पक्ष के उपरोक्त वर्णित आशय के अभिकथनों तथा उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के सम्यक , विचारोपरांत विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग कुशीनगर द्वारा प्रश्नगत परिवाद स्वीकार कर उपरोक्त वर्णित , आलोच्य निर्णय/आदेश पारित किया गया है जिससे क्षुब्ध होकर बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत अपील योजित क