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2025 Supreme(Online)(SCDRC) 34228

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Bank of Baroda – Appellant
Versus
Smt Archna Agrwal – Respondent
SC/9/A/2005/1780



Petitioner Advocates:Shailesh Kumar,Ashish Mishra, Madan Singh Bisht ,Respondent Advocate: R K Agrwal

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION UTTAR PRADESH FIRST APPEAL NO. SC/9/A/2005/1780 Bank of Baroda PRESENT ADDRESS - A ,UTTAR PRADESH.

.......Appellant(s)

Versus Smt Archna Agrwal PRESENT ADDRESS - A ,UTTAR PRADESH.

.......Respondent(s)

BEFORE:

HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR , JUDICIAL MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER FOR THE APPELLANT:

Bank of Baroda FOR THE RESPONDENT:

Smt Archna Agrwal DATED: 06/01/2025

ORDER

(

मौखिक)

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ अपील संख्या-1779/2005 बैंक आफ बड़ौदा बनाम राम प्रकाश अग्रवाल (मृतक) प्रतिस्थापित राकेश कुमार अग्रवाल तथा आठ अन्य एवं

अपील संख्या-1780/2005 बैंक आफ बड़ौदा बनाम श्रीमती अर्चना अग्रवाल पत्नी श्री राकेश कुमार अग्रवाल तथा सात अन्य एवं

अपील संख्या-1781/2005 बैंक आफ बड़ौदा बनाम राकेश कुमार अग्रवाल तथा तीन अन्य एवं

अपील संख्या-1782/2005 बैंक आफ बड़ौदा बनाम राकेश कुमार अग्रवाल तथा पांच अन्य :-

समक्ष

1. , माननीय श्री सुशील कुमार सदस्य। 2. , माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय सदस्य।

: 06.01.2025 दिनांक , माननीय श्री सुशील कुमार सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय

1. 377/2002, परिवाद सं0- राम प्रकाश अग्रवाल तथा छ: अन्य बनाम मैसर्स हिन्दुस्तान डेवलमपेंट , 376/2002, कारपोरेशन लि0 (वर्तमान में बदला हुआ नाम मै0 मलानपुर स्टील लि0) तथा दो अन्य परिवाद सं0-

श्रीमती अर्चना अग्रवाल तथा छ: अन्य बनाम मैसर्स हिन्दुस्तान डेवलमपेंट कारपोरेशन लि0 (वर्तमान में बदला

हुआ नाम मै0 -2- , 369/2001, मलानपुर स्टील लि0) तथा दो अन्य परिवाद सं0- राकेश कुमार अग्रवाल बनाम मैसर्स हिन्दुस्तान

378/2002, डेवलमपेंट कारपोरेशन लि0 तथा तीन अन्य तथा परिवाद सं0- राकेश कुमार अग्रवाल तथा चार अन्य बनाम मैसर्स हिन्दुस्तान डेवलमपेंट कारपोरेशन लि0 (वर्तमान में बदला हुआ नाम मै0 मलानपुर स्टील लि0) तथा दो , 26.9.2005 अन्य में विद्वान जिला आयोग द्वितीय बरेली द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक के विरूद्ध क्रमश: , , अपील सं0-1779/2005 अपील सं0-1780/2005 अपील सं0-1781/2005 तथा अपील सं0-1782/2005 बैंक आफ बड़ौदा की ओर से प्रस्तुत की गई हैं। चूंकि उपरोक्त सभी अपीलें जिस निर्णय/आदेश से प्रभावित हैं

उनके तथ्य एवं विधि के एक जैसे प्रश्न निहित हैं इसलिए सभी अपीलों का निस्तारण एक साथ एक ही

निर्णय/आदेश द्वारा किया जा रहा है इस हेतु अपील संख्या-1779/2005 अग्रणी अपील होगी।

2.

उपरोक्त सभी अपीलों में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री एम.एस. बिष्ट तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री अरूण टण्डन को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/पत्रावलियों का अवलोकन किया गया।

3.

विद्वान जिला आयोग ने उपरोक्त सभी परिवादों को स्वीकार करते हुए विपक्षीगण को आदेशित किया है कि वह परिवादीगण के ऋण पत्रों से संबंधित धनराशि का भुगतान एक माह के अंदर करे तथा देय राशि पर 14 प्रतिशत ,000/-

वार्षिक साधारण ब्याज अदा करे तथा क्षतिपूर्ति व वाद व्यय के रूप में अंकन 10 रू0 भी अदा करे। देय ,65,553/- , धनराशि क्रमश: परिवाद सं0-377/2002 के अनुसार अंकन 1 रू0 है परिवाद सं0-376/2002 के ,10,456/- , ,93,604/- 0 अनुसार अंकन 5 रू0 है परिवाद सं0-369/2001 के अनुसार अंकन 2 रू है तथा परिवाद सं0- -3-

378/2002 ,38,716/-

के अनुसार अंकन 4 रू0 है।

4.

उपरोक्त सभी परिवादों के तथ्यों का संक्षिप्त सार यह है कि परिवादीगण द्वारा मैसर्स हिन्दुस्तान डेवलपमेंट , कारपोरेशन लि0 द्वारा जारी ऋण पत्र क्रय किए गए हैं प्रत्येक ऋण पत्र का विक्रय मूल्य अंकन 40/-रू0 है। सभी ऋण पत्रों की सूची प्रत्येक परिवाद के साथ संलग्न की गई है। सभी ऋण पत्र परिवादीगण के नाम विपक्षी सं0-1 एवं 2 द्वारा हस्तांतरित कर दिए गए। इन सभी ऋण पत्रों पर देय ब्याज की राशि 31 जनवरी तथा 31 जुलाई को देय थी। इसी प्रकार प्रत्येक ऋण पत्र की असल धनराशि भी विपक्षी सं0-1 एवं 2 द्वारा परिवादीगण , को प्रतिवर्ष अंकन 10 -10 रूपये की दर से वापस करनी थी जिसकी अदायगी की तिथि दिनांक दिनांक , , , 13.3.2000 दिनांक 13.3.2001 दिनांक 13.3.2002 तथा दिनांक 13.3.2003 थी परन्तु विपक्षी सं0-1 एंव 2 द्वारा अनुबंध की शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया और समय पर भुगतान नहीं किया गया। ब्याज का भुगतान आंशिक रूप से केवल दिनांक 31.7.2000 तक किया गया तथा दिनांक 1.8.2000 से ब्याज का भुगतान करना भी बंद कर दिया गया। ब्याज 14 प्रतिशत की दर से देय था। परिवादीगण द्वारा 18 प्रतिशत की दर से ब्याज राशि

की मांग करते उपरोक्त परिवाद प्रस्तुत किए गए।

5. , विपक्षी सं0-1 एवं 2 द्वारा संयुक्त रूप से लिखित कथन प्रस्तुत किया गया जिसमें यह उल्लेख किया गया , , BIFR कि विपक्षी एक बीमार इकाई है जिसके संदर्भ में एक परिवाद सं0-158/200

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