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2026 Supreme(Online)(SCDRC) 1732

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
S.B.I. GENERAL INSURANCE CO.LTD – Appellant
Versus
SMT. LAXMI DEVI – Respondent
SC/CB5/8/A/49/2024



Petitioner Advocates:S P KATARA 9414243931 Pardeepkatara 9414303464 pardeep Vashisth 94142 43931 ,Respondent Advocate:

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राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सर्किट बैंच, भरतपुर (राज.)

अपील संख्या :-- 49 /2024 समक्ष:

माननीय श्री मुकेश, सदस्य (न्यायिक)

माननीय श्री दिनेश कुमार, सदस्य एसबीआई जनरल इंश्योरेन्स कम्पनी foo पंजीकृत एवं प्रधान कार्यालय नटराज 404, 204 व 304 Sted एक्सप्रेस हाइवे एवं अंधेरी Hoot जंक्शन, अंधेरी पूर्व, मुम्बई जरिये विधि प्रबन्धक, एस बी आई ज0इ0क0लि0 46 पूसा रोड, करौल बाग, मैट्रो पिलर नं.

429 केसामने नईदिलल्‍ली

---अपीलार्थी.. विपक्षी

बनाम

4- श्रीमती लक्ष्मी देवीपत्नि श्री रामकिशोर, निवासी-टोंडाभीम जिला करौली

-:प्रत्यर्थी,/ परिवादिया

2- शाखा प्रबन्धक, एस Sens बैक, शाखा टोडाभीम जिला करौली

--प्रत्यर्थी, विपक्षी

उपस्थित:- शअभश्री सत्यप्रकाश कटारा, अधिवक्ता ---अपीलार्थी / विपक्षी

श्री प्रदीप वशिष्ठ, अधिवक्ता -:प्रत्यर्थी /परिवादिया

श्री राजेन्द्र खण्डेलवाल, अधिवक्ता -- प्रत्यर्थी / विपक्षी

बहस सुनने की दिनांक. :- 09/42/2025 निर्णय सुनाने की दिनांक :- 44/03 /2026 — निर्णय i

4-- अपीलार्थी /विपक्षी एस बी आई ने यह अपील प्रत्यर्थी » परिवादिया लक्ष्मीदेवी एवं शाखा प्रबन्धक, एसबीआई, शाखा टोडाभीम के विरूद्ध जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, करौली कैम्प कोर्ट हिण्डौनसिटी (जिसे -आगे निर्णय में सुविधा की दृष्टि से संक्षेप में जिला उपभोक्‍ता आयोग -के नाम से संबोधित किया जावेगा) के निर्णय दिनांक 25/04 / 2024 4 व्यथित होकर राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सर्किट बेंच, भरतपुर के समक्ष दिनांक 23/04/2024 को प्रस्तुत की है।

2- प्रकरण के संक्षेप में तथ्य इस प्रकार से बताये गये है कि परिवादिया का पुत्र अजय गंगवाल का विपक्षी नं0 4 के बैंक में एक बचत खाता सं0 6407660430 था जिस पर एस.बी.आई जनरल इश्योरेंस द्वारा बीमा योजना के तहत उक्त खाते पर दुर्घटना बीमा दिया गया। वर्तमान में एस.बी.बी.जे. की शाखाओं का एस.बी.आई. में

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राज्य उपभोक्ता आयोग, सकिंट बैंच, भरतपुर अपील संख्या- 49 / 2024 विलय हो जाने से वर्तमान में उक्त शाखा एस.बी.आई की शाखा है। विपक्षी सं० 2 व 3 की कपनी द्वारा परिवादिया के पुत्र अजय गंगवाल का विपक्षी Go 4 की शाखा में स्थित बचत खाते से उसका एक वर्ष का लाइफ इंश्योरेंस दिनांक 28 /40 /44 से 28 / 40,/ 45 तक 20 लाख wo कि लिये किया गया जिसकी एकमुश्त fed 4000 wo थी जिसे परिवादिया के पुत्र ने विपक्षी Go 4 की शाखा में अपने खाते से दिनांक 28.0.4 को ही जमा करा दिया जिसकी vl परिवादिया के पुत्र के खाते की पासबुक में की गई। उक्त पॉलिसी के तहत बीमाधारी की दुर्घटना में मृत्यु होने पर विपक्षीगण द्वारा 20 लाख रू0 की Rep कवर होने से उक्त पॉलिसी के मुताबिक पॉलिसी बीमधारी के नोमिनी या उसके विधिक वारिसों को देय थी। परिवादिया के पुत्र की ट्रेन दुर्घटना में दिनांक 04.44.44 को जवाहर सर्किट में स्वर्गवास हो गया जिसकी उक्त दिनांक को ही मर्ग रिपोर्ट जवाहर सकिट थाना जयपुर दर्ज की जाकर दिनांक 05.(.44 को उसका पोस्टमार्टम किया गया तथा लाश का पंचनामा कर लाश सुपूर्दगी में दी गयी तथा उक्त संपूर्ण कानूनी कार्यवाही की जाकर थाने वालों ने बाद अनुसंधान संपूर्ण जांच कर ट्रेन दुर्घटना में अजय गंगवाल की मृत्यु मानकर उसकी जांच रिपोर्ट एस.डी.एम. जयपुर पूर्व के यहां पेश की जिसे दिनांक 45.04.5 को एस.डी.एम. जयपुर द्वारा मंजूर किया गया। इसके पश्चात्‌ परिवादिया द्वारा उक्त इंश्योरेंस पॉलिसी में नोमिनी होने के कारण उसकी gs राशि 20 लाख wo प्राप्त करने के लिये ae फॉर्म विपक्षी do 4 से वेरीफाई करवाते हुए उसे विपक्षी Go 2 व 3 के यहाँ भेज दिया जिस पर विपक्षी Go 2 ने परिवादिया के क्लेम 40 472247 पर दर्ज करते हुए दिनांक 42.04.47 को फाइनल पुलिस रिपोर्ट की कॉपी मांगी जिस पर दिनांक 04.02.47 को परिवादिया ने समस्त दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां विपक्षी सं० 2 को रजिस्टर्ड डाक दिनांक 04.02.47 को भिजवा दी परंतु विपक्षी सं० 2 ने दिनांक 05.05.47 को उक्त दस्तावेजों की गलत रूप से पुनः मांग की जबकि समस्त दस्तावेज रजिस्टर्ड डाक से Prorat दिये गये थे। पषरिवादिया ने विपक्षीगण को अपने अधिवक्ता पुरषोत्तम गोयल के मार्फत एक रजिस्टर्ड नोटिस दिनांक 49.06.7 प्रेषित करवाया परंतु उक्त नोटिस प्राप्त होने पर भी विपक्षीगण, परिवादिया को इंश्योरेंस पॉलिसी का gis नहीं दे रहे है। इस प्रकार विपक्षीगण का कृत्य सेवादोष की परिधि में आता है। अन्त में परिवाद पत्र में

वर्णित अनुतोष दिलाये जाने की प्रार्थना की गयी है।

3- विपक्षीगण ने अपने जवाब में यह कथन किया है कि मृतक की बीमा पॉलिसी में स्पष्ट अंकित है कि मृतक द्वारा आत्महत्या करने पर बीमा कंपनी किसी प्रकार की

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राज्य उपभोक्ता आयोग, सकिंट बैंच, भरतपुर अपील संख्या- 49 / 20

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