STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Devendra Kachhwaha, President
IndusInd Bank Limited – Appellant
Versus
Daulat Ram – Respondent
191 / 2022
निर्णय
द्वारा : माननीय न्यायाधिपति श्री देवेन्द्र कच्छावाहा, अध्यक्ष
1- अपीलार्थी इण्डसइण्ड बैंक लिमिटेड की ओर से यह अपील अधीनस्थ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, द्वितीय जोधपुर (जिसे निर्णय में आगे जिला उपभोक्ता आयोग के नाम से संबोधित किया जाएगा) द्वारा उपभोक्ता शिकायत संख्या 626/2015 (866/2014) "दौलतराम बनाम इण्डसइण्ड बैंक व अन्य" में पारित निर्णय दिनांक 07.01.2022 से व्यथित होकर प्रस्तुत की गयी है, जिसके द्वारा परिवादी का परिवाद अप्राथी संख्या एक के विरूद्ध स्वीकार किया जाकर निम्नलिखित आदेश पारित किया गया:-
"अतः परिवादी दौलतराम द्वारा विपक्षीगण इण्डसइण्ड बैंक के विरूद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत प्रस्तुत परिवाद स्वीकार किया जाकर विपक्षी संख्या एक बैंक को आदेशित किया जाता है कि परिवादी को आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के निमित्त दस हजार रूपये तथा परिवाद व्यय के निमित्त पांच हजार रूपये की राशि परिवादी को दो माह की अवधि में अदा करे । विपक्षी संख्या दो के विरूद्ध परिवाद खारिज किया जाता है ।"
2- विचाराधीन मामले में अपीलार्थी/परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत कर प्रकट किया कि, परिवादी को अप्राथी संख्या दो पुलिस उपायुक्त द्वारा मोटरसाइकिल संख्या आर.जे. 19 एस.एल.2767 का ई-चालान प्रेषित किया जबकि उक्त मोटर साइकिल अप्राथी संख्या एक द्वारा ऋण राशि की किश्तों की अदायगी नहीं करने के कारण परिवादी से सीजकर दिनांक 27.09.2009 को अपने कब्जे में ली जा चुकी है तथा इसके बाद अप्राथी संख्या एक द्वारा उक्त वाहन को दिनांक 23.11.2009 को आगे बेच भी किया जा चुका है । अप्राथी संख्या एक ने वाहन विक्रय किये जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में इसका नाम हस्तांतरण करने में जानबूझ कर चूक की है जिसका नुकसान परिवादी को उठाना पड़ रहा है तथा चालान का जवाब अधिवक्ता नियुक्त कर उसकी फीस की अदायगी कर अप्राथी संख्या दो को प्रेषित करवाना पड़ा । अप्राथी संख्या एक ने परिवादी को सूचित किये बिना ही उक्त वाहन का विक्रय किया तथा अधिग्रहण में लेने के बाद अविविध तरीके से बेच व हस्तांतरण किया । अप्राथीगण के उक्त कृत्य को सेवा में त्रुटि बताते हुए परिवादी ने परिवाद में वर्णित अनुतोष दिलाये जाने की प्रार्थना की ।
3- अपीलार्थी/अप्राथी संख्या एक की ओर से परिवाद जवाब पेश कर कथन किया गया कि परिवादी द्वारा ऋण की किश्तों की अदायगी में चूक करने के कारण करार की शर्तों के अंतर्गत यह वाहन आधिपत्य में लेने के पश्चात नीलामी के जरिये तीसरे पक्षकार महेन्द्र रामावत पुत्र तुलसीराम निवासी जोधपुर को बेच कर दिया, बेचान करने के बाद तीसरे पक्षकार का यह विधिक दायित्व था कि वह बैंक द्वारा मालिकाना हक ट्रांसफर करवाता । इसकी समस्त जिम्मेदारी खरीदार महेन्द्र रामावत की है तथा विपक्षी बैंक की कार्य प्रणाली में कोई त्रुटि नहीं की गयी है । वाहन का आधिपत्य प्राप्त करने के पश्चात परिवादी व अप्राथी के मध्य कोई संबंध शेष नहीं रहता है, जिसके कारण परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है । अतः परिवादी का परिवाद खारिज किये जाने की प्रार्थना की ।
4- प्रत्यर्थी संख्या दो/अप्राथी संख्या दो की ओर से परिवाद का जवाब पेश कर कथन किया गया कि यातायात नियमों के उल्लंघन के कारण परिवहन विभाग द्वारा उपलब्ध करवाये गये अभिलेख के आधार पर विधि अनुसार नोटिस भेजा गया था । परिवादी, अप्राथी का उपभोक्ता नहीं है । अतः परिवादी का परिवाद खारिज किये जाने की प्रार्थना की गयी ।
5- विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उभय पक्ष के अभिवचनों, साक्ष्य एवं बहस के आधार पर अपीलाधीन निर्णय पारित कर प्रत्यर्थी संख्या एक/परिवादी का परिवाद अपीलार्थी/अप्राथी संख्या एक के विरूद्ध स्वीकार किया गया जिससे व्यथित होकर प्रत्यर्थी संख्या एक/परिवादी द्वारा यह अपील प्रस्तुत की गयी ।
6- अपीलार्थी की ओर से अपील के साथ धारा 5 परिसीमा अधिनियम का प्रार्थनापत्र पेश कर अपील प्रस्तुत करने में हुई सद्भाविक देरी को माफ किये जाने की प्रार्थना की गयी ।
7- प्रत्यर्थी संख्या दो की ओर से कोई उपस्थित नहीं होने से विद्वान अधिवक्ता प्रत्यर्थी संख्या एक की बहस दिनांक 11.02.2026 एवं विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थी की बहस दिनांक 12.02.2026 को सुनी गयी ।
8- विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थी/अप्राथी संख्या एक बैंक द्वारा तर्क दिया गया कि, विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने अपीलाधीन निर्णय पारित करते समय इस तथ्य की ओर ध्यान नहीं दिया कि, अपीलार्थी ने नीलामी में खरीदार तीसरे पक्षकार से मोटर वाहन अधिनियम 1988 के प्रावधान की पालना हेतु शपथपत्र एवं अण्डरटेकिंग ली थी कि खरीदार उक्त वाहन को 30 दिन के भीतर अपने व्यय पर नाम ट्रां
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