2026 Supreme(Online)(SCDRC) 2300
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Devendra Kachhwaha, President
AU Financers (India) Limited – Appellant
Versus
Kailash Chandra – Respondent
Review Petition No. 11 / 2023
Important Points
Subject
Consumer Law - Review Petition
Act Referred
Headnote
(B) Limitation - Review Petition filed beyond the statutory period prescribed under Section 50 of the Act without any application for condonation of delay is barred by limitation. (Para 9)
Facts of the case:
The Appellant filed a review petition against the order dated 07.07.2023 passed by the State Commission in an appeal arising from a District Commission order dated 22.11.2017. The appellant had previously challenged the order before the National Consumer Commission but withdrew the revision petition to file this review application before the State Commission.
Findings of Court:
The commission found that the review petition was filed after the expiry of the one-month period required under Section 50 of the Act, and no application for condonation of delay was filed. Furthermore, no error apparent on the face of the record was identified in the order under review.
Issues: Whether the review petition is maintainable due to limitation and whether there is an error apparent on the face of the record warranting review.
Ratio Decidendi: The review jurisdiction of the State Commission is limited solely to correcting errors apparent on the face of the record, and failure to comply with the statutory limitation period without justification renders the petition non-maintainable.
Result: Review Petition dismissed.
For the Appellants/Petitioners: Manmohan Singh
For the Respondents: Vikas Phophaliya
| Table of Content |
|---|
| 1. procedural history of the dispute and filings. (Para 1 , 2 , 3) |
| 2. arguments presented by both parties regarding the review. (Para 4 , 5 , 6) |
| 3. limited scope of review jurisdiction and limitation bar. (Para 7 , 8 , 9 , 10) |
आदेश
1. उपरोक्त शीर्षक के अनुसार प्रार्थी/अपीलार्थी ने इस आयोग के निर्णय दिनांक 07.07.2023 के विरुद्ध यह पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र दिनांक 01.12.2023 को प्रस्तुत किया है, जिसके द्वारा प्रार्थी/अपीलार्थी ए.यू.फाईनेंसर्स (इण्डिया) लि. की अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाकर निम्नलिखित आदेश पारित किया गया :-
1. विद्वान जिला आयोग द्वारा परिवादी को दिलवायी गयी ऋण राशि 60,000/- रुपये के बाबत दिया गया आदेश अपास्त किया जाता है ।
2. इसी प्रकार विद्वान जिला आयोग द्वारा आर्थिक क्षति के पेटे 50,000/-रुपये के स्थान पर प्रत्यर्थी/परिवादी 20,000/-रुपये प्राप्त, मानसिक क्षति पेटे 20,000/-रुपये के स्थान पर 10,000/-रुपये तथा परिवाद व्यय पेटे 5,000/-रुपये प्रत्यर्थी/परिवादी, अपीलान्ट/विपक्षी से प्राप्त करने का अधिकारी होगा ।
3. इसी प्रकार अपीलान्ट/विपक्षी वाहन को चालू कण्डीशन में पांचों टायर्स व बैटरी नई लगवाकर चालू कण्डीशन में प्राप्त करने का अधिकारी होगा, जिसके लिए अपीलान्ट/विपक्षी ऑथोराईज सर्विस सेंटर अथवा स्थानीय पुलिस विभाग के एमटीओ से प्रमाणपत्र वाहन सुपुर्दगी के समय संलग्न करेगा ।
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2. प्रकरण के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार से है कि प्रार्थी/अपीलार्थी ए.यू.फाईनेंसर्स (इण्डिया) लिमिटेड, ने एक अपील जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बाड़मेर द्वारा परिवाद संख्या 210/2016 में पारित निर्णय दिनांक 22.11.2017 से व्यथित होकर प्रस्तुत की थी । अपीलार्थी की अपील संख्या 204/2017 को इस राज्य आयोग द्वारा आंशिक रूप से स्वीकार किया जाकर उपरोक्तनुसार निर्णय दिनांक 07.07.2023 पारित किया ।
3. प्रार्थी/अपीलार्थी द्वारा अपील संख्या 204/2017 में पारित निर्णय दिनांक 07.07.2023 को माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नई दिल्ली के समक्ष पुनरावलोकन याचिका संख्या 2541/2023 द्वारा चुनौती दी गयी परन्तु बाद में प्रार्थी ने उक्त निगरानी याचिका, पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने की छूट प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए विड्रॉ कर ली । तत्पश्चात मौजूदा पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र आक्षेपित आदेश दिनांक 07.07.2023 के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया है ।
4. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी गयी ।
5. विद्वान अधिवक्ता प्रार्थी/अपीलार्थी ने पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र में अंकित तथ्यों को दोहराते हुए तर्क दिया कि पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र में उल्लेखित आधारों को ही प्रार्थी/अपीलार्थी के तर्क माने जावे । अंतः में प्रार्थी/अपीलार्थी की ओर से पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र स्वीकार करने एवं माननीय राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा अपील संख्या 204/2017 में पारित निर्णय दिनांक 07.07.2023 अपास्त किये जाने की प्रार्थना की गयी ।
6. इसके विपरीत विद्वान अधिवक्ता अप्रार्थी/प्रत्यर्थी की ओर से प्रार्थी/अपीलार्थी के तर्कों का विरोध करते हुए तर्क दिया गया कि आज दिन तक गाड़ी प्रार्थी/अपीलार्थी के पास ही है । माननीय राज्य उपभोक्ता आयोग ने विधि सम्मत निर्णय पारित किया है, जिसमें हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है । अतः प्रार्थी/अपीलार्थी का पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र अस्वीकार किया जावे ।
7. हमने विद्वान अधिवक्ता प्रार्थी/अपीलार्थी एवं अप्रार्थी/प्रत्यर्थी के तर्कों पर मनन किया तथा अपील संख्या 204/2017 में पारित निर्णय दिनांक 07.07.2023 एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया ।
8. स्वीकृत रूप से परिवादी/प्रार्थी के परिवाद को स्वीकार करने का जो आदेश जिला उपभोक्ता आयोग बाड़मेर (राजस्थान) द्वारा परिवाद संख्या 210/2016 में दिनांक 22.11.2017 को पारित किया गया था, उसके विरुद्ध अप्रार्थी ए.यू.फाईनेंस (इण्डिया) लिमिटेड द्वारा अपील संख्या 204/2017 इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी । उक्त अपील आक्षेपित निर्णय दिनांक 07.07.2023 के माध्यम से इस आयोग द्वारा आंशिक रूप से स्वीकार की गयी है जिससे व्यथित होकर निगरानीकर्ता/अप्रार्थी ने माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, के समक्ष निगरानी याचिका प्रस्तुत की थी जिसका क्षेत्राधिकार निर्विवादित रूप से मौजूदा पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र से अधिक विस्तृत है । बावजूद इसके प्रार्थी/अपीलार्थी ने उक्त निगरानी याचिका को विड्रा करते हुए मौजूदा पुनरावलोकन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने का चयन किया है । यह भी विधि का सर्वमान्य सिद्धांत है कि धारा-50 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में इस आयोग के क्षेत्राधिकार बहुत सीमित है । केवल ऐसी त्र