2026 Supreme(Online)(SCDRC) 2403
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
NATIONAL INSURANCE CO.LTD – Appellant
Versus
JAI MAHESH SINHA – Respondent
SC/22/FA/309/2025
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छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पंडरी, रायपुर संस्थित दिनांक-॥ 0.06.2025 अंतिम तर्क दिनांक-09.02.2026 आदेश दिनांक-09.03.2026.
अपील क्रमांक-एससी / 22 / एफए / 309 / 2025 नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, |
द्वारा-मण्डल प्रबंधक, मण्डल कार्यालय हाऊसिंग बोर्ड बिल्डिंग, नया बस स्टैण्ड, पोस्ट व जिला-राजनांदगांव (छ.ग.) पिन--494444 द्वारा श्री पी. के. पाल, अधिवक्ता aed अपीलार्थी)
seuss STOMA / विरूद्ध TEST, विरूद्ध श्री जय महेश सिन्हा पिता स्व. उमराव सिन्हा, उम्र-48 वर्ष, निवासी वार्ड नं.-03, अंडर ब्रिज के सामने, मोतीपुर, राजनांदगांव, पोस्ट, तहसील व जिला-राजनांदगांव (छ.ग.), fYa-497444 द्वारा श्री हर्षद व्यास, अधिवक्ता वास्ते उत्तरवादी)
.........उत्तरवादी / परिवादी.
समक्ष:
माननीय न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरड़िया, अध्यक्ष माननीय श्री प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य.
अंतिम तर्क में उपस्थित-
अपीलार्थी की ओर से श्री पी. के. पाल, अधिवक्ता। उत्तरवादी की ओर से श्री eva व्यास, अधिवक्ता |
आदेश ( द्वारा- प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य )
अपीलार्थी /विरूद्ध पक्षकार ने यह अपील धारा-44 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2049 के अंतर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, राजनांदगांव (छ.ग) (जिसे आगे संक्षिप्त में संबंधित जिला आयोग संबोधित किया जावेगा) द्वारा प्रकरण कमांक-सीसी / 2024 / 469 पक्षकार “जय महेश सिन्हा विरूद्ध दी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड” में पारित आदेश featH—2.04.2025 जिसके द्वारा उत्तरवादी / परिवादी के परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेशित किया गया है कि “विरूद्ध पक्षकार, परिवादी को आदेश दिनांक से 45 दिवस के भीतर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के सर्वेक्षण रिपोर्ट ओ. पी. प्रदर्श-6 अनुसार 48,87,562 //-(अट्ठारह लाख सतासी हजार पांच सौ बायसठ रूपये) एवं मानसिक क्षतिपूर्ति हेतु 50,000,/-(पचास हजार रूपये) तथा वाद व्यय हेतु 5,000,/-(पांच हजार रूपये) का भुगतान करेगा। विरूद्ध पक्षकार आदेशित समस्त राशि का भुगतान 45 दिवस के भीतर परिवादी को करने में असफल होने पर समस्त राशि पर आदेश दिनांक से भुगतान दिनांक तक 06 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा“, से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत किया है।
##PAGE2##02. संबंधित जिला आयोग के समक्ष उत्तरवादी /परिवादी का परिवाद संक्षिप्त में इस प्रकार रहा है कि उत्तरवादी /परिवादी ने अपनी वाहन हाईवा कमांक-सीजी 08 एएच / 6980 का अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार के समक्ष दिनांक-28.06.2023 से दिनांक-27.06.2024 तक की अवधि के लिए बीमा कराया था जिसका बीमा पॉलिसी PATH—29070037236360002826 एवं बीमित मूल्य--25,00,000 /-(पच्चीस लाख रूपये) था। दिनांक-40.06.2024 को उत्तरवादी /परिवादी का वाहन ग्राम अर्जुन्दा से राजनांदगांव वापस आते समय रात्रि लगभग 8:30 बजे ग्राम सिब्दी, थाना सुरेगांव, जिला बालोद के पास शार्ट-सर्किट होने से जलकर नष्ट हो गया जिसे वैध लाईसेंसधारी चालक दीपक कुमार सेन द्वारा चलाया जा रहा था। दुर्घटना की शिकायत थाना सुरेगांव, जिला बालोद में की गई एवं अपीलार्थी » विरूद्ध पक्षकार को सूचना प्रदान की गई तब अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार द्वारा दुर्घटनाग्रस्त वाहन का सर्वे कराया गया जिन्होंने टोटल लॉस का रिपोर्ट fear) उत्तरवादी » परिवादी द्वारा दिनांक-06.08.2024 को संपूर्ण दस्तावेजों के साथ अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार के पास दावा प्रपत्र प्रस्तुत किया गया, किंतु अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार द्वारा दावा का भुगतान नहीं किया गया जो कि अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार की सेवा में कमी को दर्शाता है जिसके कारण उत्तरवादी /परिवादी को यह परिवाद लाने की
##PAGE3##आवश्यकता पड़ी है। अतः परिवाद स्वीकार करते हुए परिवाद में वांछित अनुतोष दिलाये जाने का निवेदन किया है।
03. संबंधित जिला आयोग के समक्ष अपीलार्थी » विरूद्ध पक्षकार की ओर से लिखित कथन प्रस्तुत कर यह बचाव लिया है कि उत्तरवादी /परिवादी द्वारा दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर अपीलार्थी / विरूद्ध पक्षकार द्वारा श्री टी. पी. एस. भाटिया को सर्वेयर नियुक्त किया गया था जिन्होंने 48,87,562 /-(अट्ठारह लाख wat हजार पांच सौ बायसठ रूपये) की क्षति आंकलित किया था, कितु उत्तरवादी / परिवादी द्वारा दिनांक-40.06.2024 को बिना वैध परमिट व फिटनेस के वाहन का चालन किया जा रहा था जो कि बीमा शर्तों का उल्लंघन है जिसके कारण उत्तरवादी / परिवादी का दावा विधिवत् निरस्त किया गया है जो कि सेवा में कमी का द्योतक नहीं है। अतः परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया
है।
04. संबंधित जिला आयोग ने उभयपक्ष की ओर से प्रस्तुत अभिवचन, शपथ-पत्र एवं दस्तावेजी साक्ष्य की विवेचना पश्चात् उत्तरवादी /परिवादी के परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए