STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Urmila Verma, Judicial Member, Liyakat Ali, Member
Narendra Mal Singhvi – Appellant
Versus
Bank Of Baroda – Respondent
193/2022
| Table of Content |
|---|
| 1. dispute over invalid huf ppf account closure and interest recovery. (Para 1) |
| 2. invalid huf ppf accounts accrue only 6% simple interest per annum. (Para 10 , 11 , 12 , 13) |
| 3. bank deficiency is limited to notice delay; interest reclamation is valid. (Para 14 , 15) |
निर्णय सुनाने की दिनांक :- 06.04.2026
निर्णय
यह अपील अपीलार्थीगण/परिवादीगण की ओर से प्रत्यर्थी/विपक्षी बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा जोधपुर के विरुद्ध विद्वान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जोधपुर द्वितीय, जोधपुर के द्वारा परिवाद प्रकरण संख्या 39/2020 बउनवान “नरेन्द्रमल सिंघवी बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा जोधपुर” में पारित निर्णय दि0 17.05.2022 के विरुद्ध प्रस्तुत की है, जिसके द्वारा उन्होंने प्रत्यर्थी/परिवादी का परिवाद पत्र विरुद्ध अपीलार्थी/विपक्षी स्वीकार कर निम्न आदेश पारित किया है:-
“अतः परिवादी नरेन्द्रमल सिंघवी द्वारा विपक्षी बैंक ऑफ बड़ौदा के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 12 के अन्तर्गत प्रस्तुत परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किया जाकर विपक्षी बैंक को आदेशित किया जाता है कि उक्त अवैध कथित पी.पी.एफ. खाते में परिवादी की जमा राशि पर छ: प्रतिशत वार्षिक दर से ही ब्याज राशि का भुगतान करे। उक्त ब्याज दर से अधिक भुगतान की गई राशि विपक्षी बैंक, परिवादी से वसूल करने/कटौती करने के लिए स्वतंत्र है।
परिवादी विपक्षी बैंक से शारीरिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के निमित पाँच हजार व परिवाद व्यय के निमित भी पांच हजार रूपये प्राप्त करने का अधिकारी है। शेष अनुतोष के संबंध में परिवाद खारिज किया जाता है।”
02. परिवादी द्वारा प्रस्तुत परिवाद के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने दि0 24.03.2014 को विपक्षी बैंक में एक पी.पी.एफ. खाता एच.यू.एफ. का खुलवाया था लेकिन विपक्षी बैंक ने दि0 11.10.2018 को परिवादी को एक पत्र इस आशय का जारी किया कि पी.पी.एफ. खाता एच.यू.एफ. के नाम से नहीं खुलवाया जा सकता इसलिए उक्त खाता बन्द करने हेतु लिखित प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। विपक्षी ने उक्त खाता खुलवाते समय कोई सर्कुलर नहीं बताया था तथा अब दि0 01.09.2015 को जारी सर्कुलर बताया है, जो कि दस साल पूर्व दि0 13.05.2005 से प्रभावी होना भी गलत है। इस पर परिवादी ने विपक्षी बैंक को दि0 12.10.2018 को पत्र जारी कर यह निवेदन किया कि यदि उक्त खाता चालू रखने में सक्षम नहीं है तो आप उक्त राशि ब्याज सहित आयकर के नियमानुसार टैक्स सेविंग सावधि जमा में रख सकते हैं किन्तु इसके विपरीत विपक्षी बैंक ने दि0 08.02.2019 को एक पत्र जारी कर समय पूर्व खाता क्लोजर का ब्याज 1,26,650/- रुपये वसूल करने तथा आयकर छूट परिलाभ की भी वसूली करने के लिए कहा। इस प्रकार परिवादी ने विपक्षी बैंक का उक्त कृत्य सेवादोष बताते हुए परिषद में चाहा गया अनुतोष दिलाने की प्रार्थना की है।
03. विपक्षी बैंक ने जवाब परिवाद में यह अभिकथन किया है कि उनके द्वारा सर्कुलर दि0 01.09.2015 के बारे में कई बार फोन से बताया गया लेकिन परिवादी ने लिखित में देने के लिए कहा, इस पर परिवादी को सर्कुलर दि0 01.09.2015 के संबंध में पत्र दि0 11.10.2018 लिखा। इसको स्वीकार करते हुए परिवादी ने दि0 04.10.2018 के बाद खाते में राशि जमा कराना बन्द कर दिया। उक्त सर्कुलर भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार भूतल्क्षी प्रभाव से लागू किया गया है। सर्कुलर के अनुसार ही 1,26,650/- रुपये वसूल करने हेतु परिवादी को पत्र लिखा गया, जो सही है। इस प्रकार विपक्षी बैंक ने अपना कोई सेवादोष नहीं होना बताते हुए परिवादी का परिवाद खारिज किये जाने का निवेदन किया है।
04. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उभय पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज एवं अभिवचनों के आधार पर परिवादी का परिवाद विरुद्ध विपक्षी बैंक आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिससे व्यथित होकर परिवादी ने यह अपील पेश की है।
05. हमने उभयपक्ष के अधिवक्तागण की बहस सुनी एवं पत्रावली का अवलोकन किया।
06. विद्वान अधिवक्ता अपीलार्थी/परिवादीगण ने अपील मीमो में अंकित तथ्यों को दोहराते हुए यह तर्क दिया है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने एच.यू.एफ. के खाते पर 06 प्रतिशत की दर से ही ब्याज दिलाया है, जो सही नहीं है जबकि उनका यह तर्क है कि प्रचलित दरों से पी.पी.एफ. खाते पर ब्याज दिलाया जाना चाहिए। अतः अपीलार्थी की अपील स्वीकार कर परिवाद में चाहा गया अनुतोष दिलाने की प्रार्थना की है।
07. इसके प्रतिकूल विद्वान अधिवक्ता प्रत्यर्थी/विपक्षी बैंक का यह तर्क है कि परिवादी को सर्कुलर दि0 01.02.2015 w.e.f. दि0 13.05.2005 के संबंध में पत्र दि0 11.10.2018 के जरिये सूचित कर दिया था, जिसको स्वीकार कर दि0 04.10.2018 के बाद परिवादी ने पी.पी.एफ. खाते में र
Login now and unlock free premium legal research
Login to SupremeToday AI and access free legal analysis, AI highlights, and smart tools.
Login
now!
India’s Legal research and Law Firm App, Download now!
Copyright © 2023 Vikas Info Solution Pvt Ltd. All Rights Reserved.