STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Gautam Chauradia, President, Pramod Kumar Verma, Judicial Member
Manoj Kumar Kulu – Appellant
Versus
B.M., Indusind Bank – Respondent
Appeal No. SC/22/FA/206/2025
| Table of Content |
|---|
| 1. nature of the dispute involving vehicle seizure and loan default during covid-19. (Para 1) |
| 2. court's analysis on maintainability of consumer complaint despite arbitration proceedings. (Para 10) |
| 3. remand of the matter for fresh adjudication on merits by the district commission. (Para 11) |
आदेश
(द्वारा- प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य)
अपीलार्थी/परिवादी ने यह अपील धारा-41 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बस्तर, स्थान जगदलपुर (छ.ग) (जिसे आगे संक्षिप्त में "संबंधित जिला आयोग" संबोधित किया जाएगा) द्वारा प्रकरण क्रमांक-सीसी/62/2022 पक्षकार "मनोज कुमार कुलू विरुद्ध शाखा प्रबंधक, इंडसइंड बैंक एवं एक अन्य" में पारित आदेश दिनांक-19.03.2025 जिसके द्वारा अपीलार्थी/परिवादी के परिवाद को निरस्त किया गया है, से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत किया है।
02. संबंधित जिला आयोग के समक्ष अपीलार्थी/परिवादी का परिवाद संक्षिप्त में इस प्रकार रहा है कि अपीलार्थी/परिवादी को उत्तरवादी क्र.-1/विरुद्ध पक्षकार क्र.-1 द्वारा वाहन क्रमांक-सीजी 04 एल.के.-4898 हेतु 16,30,352/-(सोलह लाख तीस हजार तीन सौ बावन रुपये) का रिफायनेंस दिनांक-30.09.2019 को किया गया था जिसका मासिक किश्त 58,100/-(अठावन हजार एक सौ रुपये) नियत किया गया था। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा उपरोक्त मासिक किश्त नियमित रूप से अदा की जा रही थी, किंतु वर्ष 2020 में कोविड-19 के कारण अपीलार्थी/परिवादी का उक्त वाहन से आय पूर्ण रूप से बंद हो गया जिसके कारण चन्द किश्तों की अदायगी नहीं की जा सकी जिसकी सूचना उत्तरवादी क्र.-1/विरुद्ध पक्षकार क्र.-1 को देते हुए शीघ्र ही बकाया किश्त की राशि अदा करने का निवेदन किया गया, किंतु अपीलार्थी/परिवादी उक्त वाहन में माल भरकर आ रहा था तब बिना किसी पूर्व सूचना के अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपीलार्थी/परिवादी का वाहन जबरन जप्त कर लिया गया। अपीलार्थी/परिवादी किश्तों की राशि अदा करने हेतु तत्पर था उसके बाद भी उत्तरवादी क्र.-1/विरुद्ध पक्षकार क्र.-1 द्वारा उक्त वाहन विक्रय कर दिया गया। उत्तरवादी क्र.-1/विरुद्ध पक्षकार क्र.-1 द्वारा दिनांक-30.09.2019 को अपीलार्थी/परिवादी को 16,30,352/-(सोलह लाख तीस हजार तीन सौ बावन रुपये) का रिफायनेंस किया गया एवं तत्काल उपरोक्त दिनांक को ही अपीलार्थी/परिवादी की अनुमति के बगैर अपीलार्थी/परिवादी के दूसरे लोन एकाउंट या कान्ट्रेक्ट नं.-FRJ00390E में 3,32,708/-(तीन लाख बत्तीस हजार सात सौ आठ रुपये) ट्रांसफर कर दिया जो कि विधि विरुद्ध है। वर्ष 2020 में संपूर्ण विश्व कोविड-19 महामारी से ग्रस्त था जिसे देखते हुए केन्द्रीय सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मोराटोरियम की सुविधा एवं मोराटोरियम पीरियड घोषित किया गया था जिसका पालन उत्तरवादी क्र.-1/विरुद्ध पक्षकार क्र.-1 द्वारा नहीं कर अवधिक रूप से अपीलार्थी/परिवादी के वाहन को कब्जे में लेकर विक्रय कर दिया गया है जो कि उत्तरवादीगण/विरुद्ध पक्षकारगण की व्यावसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता को दर्शाता है जिसके कारण अपीलार्थी/परिवादी को यह परिवाद लाने की आवश्यकता पड़ी है। अतः परिवाद में वांछित अनुतोष दिलाये जाने का निवेदन किया गया है।
03. उत्तरवादीगण/विरुद्ध पक्षकारगण की ओर से संबंधित जिला आयोग के समक्ष लिखित कथन प्रस्तुत कर परिवाद में उल्लेखित अभिवचनों को अस्वीकार करते हुए यह बचाव लिया है कि उत्तरवादीगण/विरुद्ध पक्षकारगण अपनी संस्था के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं। अपीलार्थी/परिवादी प्रश्नाधीन वाहन को दो बार फाइनेंस करवा चुका है, इस कारण अपीलार्थी/परिवादी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा-2 (घ) के तहत "उपभोक्ता" की श्रेणी में नहीं आता है। अपीलार्थी/परिवादी, कोरोना काल खत्म होने के बाद भी नियमित रूप से निर्धारित पूरी किश्त की राशि नहीं पटाता था। अपीलार्थी/परिवादी कुल तीन बार फाइनेंस करवा चुका है तथा उसे फाइनेंस के नियम अच्छी तरह से मालूम है, उससे कोई जबरदस्ती हस्ताक्षर नहीं करवाए गए हैं। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा फाइनेंस रकम जमा नहीं करने के कारण उत्तरवादीगण/विरुद्ध पक्षकारगण द्वारा कार्यवाही करते हुए आर्बिट्रेशन के समक्ष परिवाद संस्थित किया जिसकी नोटिस अपीलार्थी/परिवादी को दिनांक-07.06.2021 को मिलने के पश्चात् आर्बिट्रेशन की कार्यवाही से बचने के लिए यह परिवाद संस्थित किया है जो कि प्रचलन योग्य नहीं है। अतः परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया गया है।
04. संबंधित जिला आयोग ने उभयपक्ष की ओर से प्रस्तुत अभिवचन, शपथ-पत्र एवं दस्तावेजी साक्ष्य की विवेचना पश्चात् अपीलार्थी/परिवादी के परिवाद को निरस्त किया है जिसके विरुद्ध यह अपील है।
05. अपीलार्थी/परिवादी की ओर
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