2026 Supreme(Online)(SCDRC) 3029
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Arun Kumar Agrawal, Judicial Member, Ramniwas Saraswat, Member
HDFC Ergo General Insurance Company Ltd. – Appellant
Versus
Damayanti – Respondent
Appeal Number 04/2023
For the Appellants/Petitioners: S.C. Tilawat
For the Respondents: Pramod Dani
A consumer complaint against an insurance company regarding a claim benefit is premature and not maintainable if the claimant has not formally submitted the claim with necessary documentation to the insurer prior to approaching the Consumer Commission.
Headnote:(A) Consumer Protection - Insurance Claim - Premature filing - Absence of prior claim submission - The complainant failed to submit the insurance claim to the insurance company before approaching the District Commission. The Commission held that the complaint was premature and unsustainable in its current form. (Paras 7-11)
Facts of the case:
The complainant's husband purchased a vehicle through bank financing with an insurance policy. Upon his death, the complainant sought relief regarding the outstanding loan amount and insurance benefits, alleging deficiency in service. The District Commission partially allowed the complaint and directed the insurance company to pay the claim. The insurer appealed, arguing that no claim form was ever submitted and the policy documents provided were illegible.
Findings of Court:
The Appellate Commission found that the complaint was filed without any prior claim being lodged with the insurer. It noted that the complainant failed to prove the circumstances justifying the claim, such as proof of death by accident, and had not followed the mandatory procedure of submitting necessary documentation to the insurance company.
Issues: Whether the complaint filed before the District Commission was premature due to the failure to submit a formal insurance claim to the company.
Ratio Decidendi: A consumer complaint regarding an insurance claim is premature and not maintainable if the claimant has not first approached the insurer with the required documentation, thereby depriving the insurer of the opportunity to process the claim.
Result: Appeal partially allowed; trial court order set aside; complainant given liberty to pursue claim as per procedure.
| Table of Content |
|---|
| 1. overview of the dispute and the procedural background. (Para 1) |
| 2. requirement of exhaustion of administrative remedies/claim filing before litigation. (Para 10 , 11) |
| 3. remand to follow due process and formal claim submission. (Para 12) |
निर्णय
[द्वारा:- माननीय श्री अरुण कुमार अग्रवाल, सदस्य (न्यायिक)]
अपीलार्थी/विपक्षी संख्या 2 एच.डी.एफ.सी. इरगो जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लि. ने यह अपील प्रत्यर्थी/परिवादी श्रीमती दमयंती एवं अन्य के विरुद्ध विद्वान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, चित्तौड़गढ़ के द्वारा परिवाद प्रकरण संख्या 372/2021 बनवान "श्रीमती दमयंती बनाम एच.डी.एफ.सी. बैंक एवं अन्य" में पारित निर्णय दि0 03.11.2022 के विरुद्ध प्रस्तुत की है, जिसके द्वारा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रत्यर्थी/परिवादी का परिवाद स्वीकार कर निम्नलिखित आदेश पारित किया है:-
"परिणामस्वरूप, परिवादिया का यह परिवाद विपक्षीगण के विरुद्ध आंशिक रूप से मंजूर किया जाता है, परिवादिया को यह आदेश दिया जाता है कि वह अपने पति की मृत्यु का दावा एक माह में विपक्षी संख्या 2 के यहां पेश करें या विपक्षी संख्या 1 के मार्फत भिजवाये, जिस पर विपक्षी संख्या 2 दावा प्राप्ति के 60 दिवस में क्रेडिट शील्ड इंश्योरेंस के मद में 5,00,000/- रुपये का संदाय विपक्षी संख्या 1 को परिवादिया के मृतक पति जिम्मीलाल सुवालका के ऋण पेते करें। चूंकि विपक्षी संख्या 1 ने परिवादिया के मृतक पति का बीमा होने के बावजूद उसका बीमा क्लेम बार-बार आग्रह के बावजूद विपक्षी संख्या 2 को नहीं भिजवाया, इसलिए न्यायहित में हम यह आदेश देते हैं कि विपक्षी संख्या 1 जिम्मीलाल की मृत्यु दिनांक 21.04.2021 को बकाया राशि पर आगे की अवधि का कोई ब्याज परिवादिया से वसूल नहीं करेगा। परिस्थितियों को देखते हुए यह आदेश दिया जाता है कि इस परिवाद का व्यय दोनों पक्ष अपना-अपना स्वयं वहन करेंगे।"
02. परिवाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार से हैं कि परिवादिया के पति जिम्मीलाल सुवालका ने एक महिन्द्रा गाड़ी एक्सयूवी 300 विपक्षी सं0 एक से फाइनेंस करवाकर खरीदी थी, जिसका बीमा सर्व सुरक्षा प्लान के तहत विपक्षी सं0 2 ने दिनांक 24.10.2019 से 23.10.2024 तक किया हुआ था। वाहन स्वामी जिम्मीलाल की दिनांक 21.04.2021 को मृत्यु हो गई इसलिए विपक्षी सं0 एक के यहां वाहन की बकाया फाइनेंस की राशि 9,86,758/- रुपये माफ होनी थी व अन्य फायदे परिवादिया को मिलने थे, जिसके लिए बार बार निवेदन किया पर संतोषप्रद जवाब नहीं दिया जो विपक्षीगण का सेवादोष है। अतः परिवाद को मंजूर किया जाकर बकाया ऋण राशि माफ कराई जावे व पचास हजार रुपये हर्जा खर्चा दिलाया जावे।
03. विपक्षी संख्या 1 बावजूद तामिल अनुपस्थित रहा इसलिए विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उसके विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई।
04. विपक्षी संख्या 2 की ओर से जवाब परिवाद प्रस्तुत कर यह कथन किया है कि परिवादिया द्वारा प्रस्तुत पॉलिसी अपठनीय व अस्पष्ट होने से कंफर्म नहीं हो सकी। परिवादिया ने कोई क्लेम फॉर्म प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए बीमा कंपनी का कोई सेवादोष नहीं है। परिवादिया का यह परिवाद प्रीमेच्योर हैं, इसलिए परिवाद को खारिज किया जावे।
05. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादिया व विपक्षी संख्या 2 के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनकर, उसके अभिवचनों एवं साक्ष्य के आधार पर आलोच्य निर्णय पारित किया, जिससे व्यथित होकर अपीलार्थी/विपक्षी संख्या 2 ने यह अपील प्रस्तुत की है।
06. हमने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी एवं पत्रावली का अवलोकन किया।
07. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने इस प्रकार का आदेश पारित किया है कि परिवादिया को आदेश दिया जाता है कि अपने पति की मृत्यु का दावा एक माह में विपक्षी संख्या 2 बीमा कम्पनी के यहां पेश करे या विपक्षी संख्या 1 बैंक के माध्यम से भिजवाये, उसके पश्चात् विपक्षी संख्या 2 बीमा कम्पनी 60 दिवस 5,00,000/- रुपये की अदायगी करें और वह अदायगी विपक्षी संख्या 1 बैंक को परिवादिया के मृतक पति जिम्मीलाल सुवालका के ऋण पेते करें अर्थात इस आदेश के अवलोकन से ही स्पष्ट है कि किसी प्रकार का कोई मृत्यु क्लेम प्रत्यर्थी संख्या 1/परिवादिया दमयंती द्वारा अपने मृतक पति जिम्मीलाल सुवालका के संदर्भ में प्रथमत: बीमा कम्पनी विपक्षी संख्या 2 के समक्ष प्रस्तुत किया जाना ही नहीं पाया गया था अन्यथा इस प्रकार का निष्कर्ष विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग का नहीं आता।
08. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश के अवलोकन से पाया गया कि बीमा कम्पनी ने यह स्पष्ट कथन किया था कि जो परिवादिया ने जो पॉलिसी प्रस्तुत की है, वह अपठनीय व अस्पष्ट है, कंफर्म नहीं हो सकी है। परिवादिया ने कोई क्लेम फॉर्म प्रस्तुत नहीं किया है।