STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
Mukesh, Judicial Member, Dinesh Kumar, Member
Anugrah Joy – Appellant
Versus
Prahlad Narayan Swami – Respondent
अपील संख्या:- 08/2025
द्वारा:- माननीय श्री मुकेश, पीठासीन सदस्य (न्यायिक)
यह अपील अपीलार्थी/विपक्षी के द्वारा धारा 73 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में पेश कर आलेखित किया कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी के विरुद्ध परिवाद इस आशय का पेश किया कि परिवादी ने विपक्षी से दिनांक 31.07.2020 को ट्रैक्टर सं. आर जे 14आर.डी. 7502 के लिए 5,10,000/- रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसे 14,194/- रुपये की सम्पूर्ण मासिक किस्तों में अदा करना था। प्रत्यर्थी/परिवादी ने 35 किस्तें जमा करवाई, शेष किस्तें आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जमा कराने में असमर्थ रहा। अपीलार्थी/विपक्षी बैंक द्वारा परिवादी का उक्त ट्रैक्टर दिनांक 22.04.2024 को उठा लिया गया, जबकि प्रत्यर्थी/परिवादी बकाया किस्तों की अदायगी के लिए तैयार है। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा एक आवेदन पत्र धारा 38 (8) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में ट्रैक्टर को वापिस देने और खुर्द-बुर्द नहीं करने के सम्बन्ध में आदेश किया, जिसमें विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा दिनांक 12.11.2024 को अपीलार्थी की अनुपस्थिति में स्थगन आदेश पारित कर दिया गया। अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा स्थगन प्रार्थना पत्र का विस्तृत जवाब दिया। ट्रैक्टर सं. आर जे 14आर.डी. 7502 अपीलार्थी/विपक्षी बैंक के पास हाईपोथिकेटेड था। प्रत्यर्थी/परिवादी ने नियमित किस्तों की अदायगी नहीं की। दिनांक 27.08.2024 को परिवादी को यह सूचित किया गया कि बकाया राशि 3,11,993/- रुपये का वह अविलंब भुगतान करे, उसने भुगतान नहीं किया। अपीलार्थी के विरुद्ध अवमानना याचिका प्रार्थना पत्र विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश किया, जिस पर सुनवाई किये बिना, साक्ष्य लिये बिना दिनांक 30.10.2015 को निम्न आदेश पारित किया:-
"परिवादी द्वारा दिनांक 04.04.2025 को प्रहलाद नारायण स्वामी बनाम अनुग्रह जॉय अवमानना याचिका धारा 72. उ.स. अधिनियम, 2019 आयोग में पेश की। अवमानना याचिका दर्ज होकर विपक्षी को नोटिस जारी किया गया और जवाब हेतु 20.05.2025 को आगामी तारीख पेश की। विपक्षी के अधिवक्ता ने अंडरटेकिंग दी और जवाब के लिए समय चाहा। दिनांक 14.07.2025, 20.08.2020, 25.08.2025, 03.09.2025, 09.09.2025, 13.09.2025, 15.09.25, 17.10.2025 व 29.10.2025 तक पेशी पड़ी। सभी उक्त तारीख पेशी पर दोनों पक्षकारों ने राजीनामा के लिए सहमति दी और दिनांक 13.09.2025 को प्रकरण राष्ट्रीय लोक अदालत में भी रखा गया, लेकिन प्रकरण में कोई राजीनामा नहीं हुआ। परिवादी प्रहलाद नारायण द्वारा स्थगन प्रार्थना-पत्र 10.10.2024 को आयोग में पेश किया। तामील के बावजूद भी विपक्षी हाजिर नहीं होने के कारण स्थगन तामील में जवाब यथा-स्थिति आयोग के द्वारा पारित किया गया। यथा-स्थिति होने के बाद भी विपक्षी द्वारा उक्त ट्रैक्टर को 3,70,000/- रुपये में बेचकर कर दिया। परिवादी द्वारा वाहन के बेचकर के बाद अवमानना याचिका आयोग में पेश की जिसकी प्रकरण संख्या 26/2025 है। जिसमें जिसमें अग्रिम तारीख पेशी 14.11.2025 थी। विपक्षी वकील द्वारा अग्रिम सुनवाई का प्रार्थना-पत्र पेश किया। मूल अवमानना याचिका तलब की गई। परिवादी को अग्रिम सुनवाई की प्रार्थना-पत्र की नकल दिलाई गई, जिसकी नकल परिवादी को दिलाई गई। अवमानना याचिका में पक्षकार अधिवक्ताओं की बहस सुनी गई। अवमानना याचिका पर उपलब्ध दस्तावेज, शपथ पत्र, जवाब, बैंक स्टेटमेंट व इंश्योरेंस पॉलिसी आदि का अवलोकन किया गया। परिवादी द्वारा एक शपथ पत्र सत्यापित नोटरी पेश किया। जिसमें लिखा है कि विपक्षी बैंक के एजेंट द्वारा 22.08.2024 को ट्रैक्टर के साथ मय ट्रॉली भी जब्त की थी। विपक्षी बैंक का कहना है कि हमने ट्रॉली जब्त नहीं की। विपक्षी द्वारा जवाब अवमानना याचिका में इंश्योरेंस में ट्रैक्टर की कीमत 5,70,000/- रुपये है। परिवादी ने ट्रैक्टर खरीदते समय 1,50,000/- रुपये नकद दिये व 4,97,000/- रुपये की किस्त भर दी। इस प्रकार विपक्षी के पास कुल 6,47,000/- रुपये परिवादी ने विपक्षी के यहां जमा करवा दिये। जबकि इंश्योरेंस में ट्रैक्टर की कीमत 5,70,000/- रुपये है। विपक्षी द्वारा उक्त ट्रैक्टर की नीलामी 3,70,000/- रुपये में की गई है। विपक्षी, ट्रैक्टर बेचकर राशि 3,70,000/- रुपये और उपेक्षा व लापरवाही के कारण ट्रैक्टर को कम कीमत पर बेचकर के पेटे 1,30,000/- रुपये कुल राशि 5,00,000/- रुपये एकमुश्त परिवादी को देवें। परिवादी द्वारा ट्रॉली को जब्त करने का शपथ पत्र नोटरी तस्दीक द्वारा 13.09.2025 को पेश किया। इससे यह साबित होता है कि विपक्षी ने ट्रैक्टर साथ ट्रॉली को भी जब्त किया है। परिवादी के उक्त शपथ पत्र का विपक्षी के द्वारा कोई खण्डन नहीं किया गया। परिवादी ने ट्रॉली के संबंध में कोई बिल पेश नहीं किया, लेकिन ट्रॉली के पेटे 1,25,000/- रुपये दिलवाना न्याय
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