SupremeToday Landscape Ad
Back
Next
Judicial Analysis Court Copy Headnote Facts Arguments Court observation
Listen Audio Icon Pause Audio Icon
judgment-img

2026 Supreme(Online)(SCDRC) 3313

राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बेंच, जोधपुर


अपील संख्या 128/2024


अधिशाषी अभियंता एवं लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय जल अभियांत्रिकी विभाग बालोतरा


जरिए अधिकारी जितेश कुमार मीणा पुत्र श्री भरत लाल जी मीणा सहायक अभियंता, जन


स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग उपखण्ड, बालोतरा । -- अपीलार्थी/अपीलार्थी


बनाम


अयूब खान पुत्र श्री वली मोहम्मद जाति मोयला मुसलमान निवासी कितपाला तहसील पचपदरा


जिला बाड़मेर । -- प्रत्यर्थी/परिवादी


उपस्थित :


अपीलार्थी की ओर से प्रतिनिधि श्री रौनक ।


प्रत्यर्थी अनुपस्थित ।


बहस सुनी जाने की दिनांक:- 06.03.2026


निर्णय सुनाए जाने की दिनांक:- 30.04.2026

Petitioner Advocates:MAHENDRA CHANGANI ,Respondent Advocate: RAJESH BHARGAV

निर्णय

द्वारा: माननीय न्यायाधिपति श्री देवेन्द्र कच्छावाहा, अध्यक्ष

1- यह अपील अपीलार्थी/अपीलार्थी अधिशाषी अभियंता एवं लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय जल अभियांत्रिकी विभाग बालोतरा ने प्रत्यर्थी/परिवादी अयूब खां के विरुद्ध विद्वान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बाड़मेर (कैम्प बालोतरा) (जिसे निर्णय में आगे जिला आयोग के नाम से संबोधित किया जाएगा) के द्वारा उपभोक्ता परिवाद संख्या 115/2022 "अयूब खान बनाम अधिशाषी अभियंता एवं लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जल अभियांत्रिकी विभाग" में पारित निर्णय दिनांक 06.07.2023 के विरुद्ध प्रस्तुत की है, जिसके द्वारा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी का परिवाद विरुद्ध अप्राथी आंशिक रूप से स्वीकार कर निम्न आदेश पारित किया :-

"अप्राथी आज से पन्द्रह दिन के अंदर-अंदर परिवादी द्वारा प्रस्तुत जन दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपियों हेतु आवेदन दिनांक 28.03.2022 में उल्लेखित प्रतिलिपियों बाबत विप्राथी के विभाग के प्रतिलिपि देने से संबंधित नियम व प्रावधानों के अनुसार देय शुल्क की कुल राशि (प्रतिलिपि शुल्क की राशि के आंशिक भुगतान पेटे अदा की गयी राशि 100/-रुपये समायोजन की जाकर) अदा करने के पंद्रह दिन के भीतर-भीतर परिवादी को आवेदन दिनांक 28.03.2022 में उल्लेखित जन दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करावे एवं परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति पेटे 5000/-रुपये एवं परिवाद व्यय पेटे 5000/-रुपये अदा करे। इन दोनों राशियों का भुगतान परिवादी द्वारा प्रतिलिपि शुल्क की कुल राशि जमा करवाने के पंद्रह दिन के भीतर नहीं होने पर इन दोनों राशियों पर भी आदेश की दिनांक से अदायगी तक 8 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा।"

2- परिवाद के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी द्वारा दिनांक 28.03.2022 को अप्राथी कार्यालय में संधारित जन दस्तावेज की सत्यापित प्रतियां व निरीक्षण हेतु भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 76 व 74 के तहत आवेदन रजिस्टर्ड पोस्ट से किया, जिसके साथ आंशिक भुगतान पेटे 100/- रुपये का भारतीय पोस्टल ऑर्डर भी भेजा गया। बावजूद आवेदन परिवादी को आज तक वांछित दस्तावेज की सत्यापित प्रतियां उपलब्ध नहीं करवायी गयी। इस पर परिवादी द्वारा कानूनी नोटिस प्रेषित करते हुए उसमें वर्णित विभिन्न दस्तावेज की प्रतियां उपलब्ध कराने का निवेदन किया जो अप्राथी को दिनांक 05.05.2022 को प्राप्त हो गया। बावजूद नोटिस परिवादी को आज दिन तक मांगे गये जन दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाये गये। अप्राथी ने जानबूझकर भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 व 76 का उल्लंघन किया है। अप्राथी के उक्त कृत्य को सेवा में त्रुटि बताते हुए परिवादी ने परिवाद में वर्णित अनुतोष दिलाये जाने की प्रार्थना की।

3- अप्राथी की ओर से जिला आयोग के समक्ष बावजूद तामील कोई उपस्थित नहीं होने से उसके विरुद्ध दिनांक 07.10.2022 को एक पक्षीय कार्यवाही का आदेश दिया गया। अप्राथी की ओर से कोई जवाब भी पेश नहीं किया गया।

4- विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उभय पक्ष के अभिवचनों, दस्तावेज एवं बहस के आधार पर परिवादी का परिवाद विरुद्ध अप्राथी आंशिक रूप से स्वीकार कर अपीलधीन निर्णय पारित किया, जिससे व्यथित होकर अपीलार्थी/अप्राथी ने यह अपील प्रस्तुत की है।

5- प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं होने से अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता की बहस सुनी। प्रत्यर्थी की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत की गई है।

6- आदेशिका दिनांक 06.03.2026 में अपीलार्थी की ओर से उपस्थित प्रतिनिधि श्री रौनक को सूचित किया गया था कि, अपीलार्थी चाहे तो निर्णय से पूर्व प्रत्यर्थी को नकल देकर लिखित बहस प्रस्तुत कर सकते हैं, तत्पश्चात् अब तक अपीलार्थी की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत नहीं की गई है।

7- कार्यालय रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा अपील 294 दिवस की देरी से प्रस्तुत की गई है तथा देरी को क्षमा करने हेतु धारा 5, परिसीमा अधिनियम के अन्तर्गत सशपथ प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया है, जिसमें यह आधार लिया गया है कि प्रत्यर्थी के कोई नोटिस विभाग को प्राप्त नहीं हुए, न ही साधारण प्रक्रिया से नोटिस आये तथा जिस पते पर डाक भेजी गई, वह पता भी पूर्ण नहीं था, इसलिए अपीलार्थी उपस्थित नहीं हो सके। अपीलार्थी को अपीलधीन निर्णय की जानकारी सर्वप्रथम 22.03.2024 को हुई, उसके पश्चात् विभागीय स्तर पर अपील प्रस्तुत करने में 20 दिन की जो देरी हुई है, उसे माफ किया जावे।

8- प्रत्यर्थी ने इस प्रार्थना-पत्र का जवाब प्रस्तुत करते हुए प्रार्थना-पत्र में उल्लेखित कथनों का खण्डन किया है और प्रार्थना-पत्र को खारिज करने की प्रार्थना की है।

9- निर्विवादित रूप से अपीलधीन निर्णय अपीलार्थी के विरुद्ध एकपक्षीय पारित किया गया है। माननीय सर्वोच्च न्याया

Click Here to Read the rest of this document
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
SupremeToday Portrait Ad
supreme today icon
logo-black

An indispensable Tool for Legal Professionals, Endorsed by Various High Court and Judicial Officers

Please visit our Training & Support
Center or Contact Us for assistance

qr

Scan Me!

India’s Legal research and Law Firm App, Download now!

For Daily Legal Updates, Join us on :

whatsapp-icon Back to top