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2026 Supreme(Online)(SCDRC) 3490

राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सर्किट बेंच, अजमेर


अपील संख्या:- 76/2025


केनफिन होम्स लिमिटेड, जयपुर शाखा कार्यालय-द्वितीय तल, जेआर प्लाजा, प्लॉट नंबर बी-16, बी-17, बी-18, डिस्ट्रिक शॉपिंग सेन्टर पास, लाल कोठी, जयपुर, राजस्थान जरिये अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता


-अपीलार्थी/विपक्षी


बनाम


यशोदा गुर्जर पत्नी श्री भागचंद गुर्जर, निवासी-बम्बोर गेट, गुर्जरों का मोहल्ला, जयपुर रोड, टोंक, राजस्थान।


-प्रत्यर्थिया/परिवादिया


उपस्थित:


अपीलार्थी/विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विक्रम सिंह


प्रत्यर्थिया/परिवादिया की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राजेन्द्र सिंह राठौड़


बहस सुनने की दिनांक : 28.04.2026


निर्णय सुनाने की दिनांक: 15.05.2026

Petitioner Advocates:VIKRAM SINGH ,Respondent Advocate:

समक्ष:-

माननीय श्री निर्मल सिंह मेड़तवाल, सदस्य (न्यायिक)

माननीय श्री दिनेश कुमार, सदस्य

निर्णय

[द्वारा:-माननीय श्री निर्मल सिंह मेड़तवाल, सदस्य (न्यायिक)]

अपीलार्थी/विपक्षी केनफिन होम्स लिमिटेड ने यह अपील प्रत्यर्थिया/परिवादिया यशोदा गुर्जर के विरुद्ध विद्वान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, टोंक के निर्णय दिनांक 24.01.2025 से व्यथित होकर प्रस्तुत की है।

02. प्रकरण के संक्षेप में तथ्य इस प्रकार से बताये गये हैं कि प्रत्यर्थिया/परिवादिया यशोदा गुर्जर ने अपीलार्थी/विपक्षी केनफिन होम्स लिमिटेड के विरुद्ध इस आशय का परिवाद प्रस्तुत किया था कि उसका प्लॉट 344.62 वर्गगज का है, जो उसके पूर्व मालिक अरविंद सिंह से दिनांक 30.06.2015 को जरिये पंजीकृत विक्रय-पत्र क्रय किया गया था। संपत्ति खरीदने के पश्चात प्रत्यर्थिया/परिवादिया ने उस पर अपीलार्थी/विपक्षी कंपनी से राशि 26,00,000/-रूपये की वित्तीय सुविधा (ऋण) प्राप्त की थी, जिसकी अदायगी प्रत्यर्थिया/परिवादिया को 26,837/-रूपये प्रतिमाह किस्त के हिसाब से 20 वर्ष में अपीलार्थी/विपक्षी को अदा करनी थी, जिसकी प्रारंभिक तिथि दिनांक 01.09.2015 थी।

03. दिनांक 27.03.2019 को प्रत्यर्थिया/परिवादिया ने नियमित रूप से किस्तों की अदायगी की, लेकिन उसके उपरांत अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा प्रत्यर्थिया/परिवादिया की संपत्ति के विरुद्ध सरफेसी एक्ट के तहत कार्यवाही अमल में लाते हुये 17,00,000/-रूपये की राशि ऋण में समायोजित की गई, जिसके तहत कुल 32,55,017/-रूपये प्रत्यर्थिया/परिवादिया के ऋण खाते में जमा किये गये, जो प्रत्यर्थिया/परिवादिया के ऋण खाते से पूर्णतया दर्शित है। उक्त राशि जमा कराये जाने के उपरांत अपीलार्थी/विपक्षी की प्रत्यर्थिया/परिवादिया में कुल 5,44,306/-रूपये की राशि वाजिब बकाया रही है, जिसे प्रत्यर्थिया/परिवादिया हमेशा अपीलार्थी/विपक्षी को अदा करने को तैयार व तत्पर रही है और आज भी तैयार व तत्पर है, लेकिन उसके उपरांत भी अपीलार्थी/विपक्षी के द्वारा जानबूझकर बकाया राशि प्रत्यर्थिया/परिवादिया से प्राप्त नहीं की जा रही है और अनुचित तरीके से अधिक ब्याज दर पर अदा करने के लिये दबाव बनाया जा रहा है, जबकि प्रत्यर्थिया/परिवादिया द्वारा शेष राशि प्राप्त कर संपत्ति के असल दस्तावेज और अन्य कागजात वापस लौटाने और एनओसी देने का आवेदन किया गया, लेकिन सेवादोष करते हुये और अनुचित व्यापार-व्यवहार करते हुये अपीलार्थी/विपक्षी उससे राशि प्राप्त नहीं कर रहे हैं। अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्यर्थिया/परिवादिया के दस्तावेज को फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसकी संपत्ति को अन्य को हस्तांतरित कर दिया है। ऋण अदायगी की समयावधि वर्ष 2035 तक थी, जो अभी तक पूर्ण नहीं हुई है और उससे पूर्व ही, जबकि प्रत्यर्थिया/परिवादिया ने ऋण की लगभग 80 प्रतिशत राशि की अदायगी कर दी है, लेकिन उसके बावजूद उसकी संपत्ति को अंतरित कर दिया गया है। प्रत्यर्थिया/परिवादिया ने अधिवक्ता के जरिये दिनांक 20.06.2024 को नोटिस प्रेषित कर राशि जमा कर दस्तावेज और एनओसी लेने की प्रार्थना की अन्यथा प्लॉट के ऋण की कीमत 37,51,000/-रूपये वापस देने के लिये कहा, लेकिन कोई भी कार्यवाही नहीं की गई, अतः यह परिवाद इस अनुतोष के साथ प्रस्तुत किया कि शेष ऋण राशि प्राप्त कर ऋण अदायगी प्रमाण-पत्र जारी करें और असल दस्तावेज उसे सुपुर्द करें तथा हर्जाना अदा करें।

04. अपीलार्थी/विपक्षी ने जवाब इस आशय का प्रस्तुत किया है कि 26,00,000/-रूपये का गृह ऋण लिया था, तब प्रत्यर्थिया/परिवादिया और उनके पति द्वारा उक्त ऋण राशि के सिक्योरिटी के पेटे अपनी अचल सम्पत्ति को अपीलार्थी/विपक्षी के पास बंधक रखा गया था। मासिक किस्तों के भुगतान में त्रुटि करने पर प्रत्यर्थिया/परिवादिया के खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया तथा बकाया ऋण वसूली हेतु सरफेसी एक्ट, 2002 के विधिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही करते हुये बंधक संपत्ति को राशि 20,00,000/-रूपये में सफल व उच्च बोलीदाता को विक्रय कर दिया गया तथा सफल बोलीदाता के पक्ष में दिनांक 25.03.2019 सरफेसी एक्ट, 2002 के नियम 9(6) के तहत सेल सर्टिफिकेट जारी कर उसका उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन करवा दिया गया और तत्पश्चात् बंधक सम्पत्ति के असल दस्तावेज व कब्जा सफल बोलीदाता अर्थात क्रेता को सौंप दिया गया एवं सार्वजनिक नीलामी में प्राप्त विक्रय प्रतिफल राशि 20,00,000/-रूपये को प्रत्यर्थिया/परिवादिया के ऋण खाते में दिनांक 26.03.2019 को समायोजित करने के पश्चात् भी बकाया ऋण राशि 5,44,306/-रूपये थी, जो कि प्रत्यर्थिया/परिवादिया व उनके पति को उक्त दिनांक तक भुगतान की जानी थी, जिसकी जानकारी प्रत्यर्थिया/परिवादिया व उनके पति को दे दी गई थी, परंतु तत्पश्चात् भी प्रत्यर्थिया/परिवादिया व उन

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