राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जयपुर
अपील संख्या:- 437 / 2025
जगबीर सिंह कलकल बनाम श्रीनाथ टावर वेलफेयर सोसायटी
समक्ष:-
माननीय श्री निर्मल सिंह मेड़तवाल, सदस्य (न्यायिक)
माननीय श्री सुरेन्द्र सिंह, सदस्य (न्यायिक)
माननीय श्री जय गौतम, सदस्य
उपस्थित:-
1. अपीलार्थी/परिवादी की ओर से श्री जगबीर सिंह स्वयं उपस्थित
2. प्रत्यर्थी/विपक्षी की ओर से श्री मुकुल चौधरी, अधिवक्ता
बहस सुनने की दिनांक : 05.05.2026
निर्णय सुनाने की दिनांक: 02.06.2026
निर्णय
[द्वारा:-माननीय श्री निर्मल सिंह मेड़तवाल, सदस्य (न्यायिक)]
अपीलार्थी/परिवादी जगबीर सिंह कलकल ने यह अपील प्रत्यर्थी/विपक्षी श्रीनाथ टावर वेलफेयर सोसायटी के विरुद्ध विद्वान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जयपुर प्रथम, जयपुर के निर्णय दिनांक 17.07.2025 से व्यथित होकर प्रस्तुत की है।
02. प्रकरण के संक्षेप में तथ्य इस प्रकार से बताए गए हैं कि अपीलार्थी/परिवादी ने एक परिवाद इस आशय का प्रस्तुत किया था कि उसने अपने पत्र दिनांक 06.11.2011 द्वारा सोसायटी को पत्र लिखा, जिसके जरिए सोसायटी के खर्च और आमदनी के बारे में सूचना मांगी और पत्र में एक प्रोफार्मा भी अंकित किया था। जुलाई, 2009 से जून, 2011 तक का रिकॉर्ड उसे भेजने के लिए लिखा था, किस-किस पर मेंटेनेंस चार्ज कितने बकाया हैं, इसकी सूचना भी नोटिस बोर्ड पर लगाये जाने बाबत लिखा था, लेकिन नोटिस बोर्ड पर भी सूचना नहीं लगाई गई और ना ही रिकॉर्ड अवलोकन को भेजा गया, जबकि सोसायटी के प्रत्येक सदस्य को रिकॉर्ड देखने का अधिकार है। कई बार मांगने के बाद उसे वर्ष 2009-2010 से 2010-2011 का अधूरा रिकॉर्ड भेजा, जिसके अवलोकन के बाद उसने अपने पत्र दिनांक 19.09.2012 के द्वारा सोसायटी को लौटा दिया तथा उक्त वर्षों का लिखित रिकॉर्ड भेजने को लिखा, लेकिन उसे नहीं भेजा गया। उसके द्वारा दिनांक 01.04.2009 से 31.03.2011 तक की पत्रावलियां मांगी गई और नहीं मिलने पर यह कहा गया कि इस अवधि का मेंटेनेंस उसके द्वारा पत्रावलियां प्राप्त होने पर ही अदा किया जाएगा, लेकिन पत्रावलियां नहीं भेजी गईं। उसने अपने पत्र दिनांक 20.07.2014 में भी वर्ष 2009-10 और 2010-11 की पत्रावलियां भेजने को लिखा और यह बताया कि इस अवधि का मेंटेनेंस चार्ज वह दिनांक 09.06.2013 को अदा कर चुका है, इससे आगे की तीन वर्षों की पत्रावलियां भेजने को कहा और यह कहा कि सभी पत्रावलियां प्राप्त होने पर बकाया मेंटेनेंस चार्ज की राशि अदा करेगा। पत्र की प्रतियां लेने से मना करने पर 7 प्रतियां दिनांक 21.07.2014 को सचिव को दी गई। बार-बार लिखने के बाद भी सोसायटी द्वारा रिकॉर्ड नहीं भेजा गया, इस कारण उसके द्वारा दिनांक 01.04.2015 के बाद का मेंटेनेंस चार्ज अदा नहीं किया। दिनांक 31.03.2015 तक उसके ऊपर बकाया चार्ज का हिसाब भी बनाकर नहीं भेजा गया तथा दिनांक 01.04.2015 से आगे का भी एडवांस में बनाकर नहीं भेजा गया।
03. सितंबर, 2014 से उसे बिजली, मिस्त्री और प्लंबर की सुविधा नहीं दी गई और उसका खराब इंटरकॉम भी ठीक नहीं कराया गया, इस बाबत उसने सोसायटी द्वारा रखवाये गये रजिस्टर में शिकायत कई बार लिखवाई थी और ठीक नहीं करने पर स्वयं के खर्चे से ठीक कराया गया था और इस हेतु उसने 670/-रूपए खर्च किए। सोसायटी में दो लिफ्ट लगी हुई है, जिसमें से एक ऑटोमेटिक है, जो काफी समय से खराब है तथा दूसरी लिफ्ट चैनल वाली है, जो बीच-बीच में खराब हो जाती है, जो दिनांक 20.06.2015 को खराब हो गई थी। लिफ्ट दिनांक 25.07.2015 को चालू हुई थी, इस प्रकार 35 दिन लिफ्ट बंद रही, जबकि उसको ठीक कराने के लिए 24 घंटे का समय पर्याप्त है। सोसायटी के पास बैंक में करीब साढ़े छ: लाख रूपए फिक्स्ड डिपॉजिट में थे और बचत खाते में भी राशि होगी। वह टावर की पांचवी मंजिल पर रहता है और लिफ्ट बंद या खराब होने से सुबह-शाम घूमने नहीं जा सका और सीढ़ियां उतरकर गया और पांचवी मंजिल तक पहुंचने के लिए 96 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।
04. दिनांक 12.07.2015 की मीटिंग में यह तय किया गया था कि वह शाम 7:00 से 9:00 बजे तक कार्यालय में आकर पत्रावलियां देख सकता है। दिनांक 13.07.2015 को शाम करीब 7:20 पीएम से 8.20 पीएम तक एक ही पत्रावली का अवलोकन हो सका। उसने दिनांक 14.07.2015 को सचिव को पत्र लिखकर पत्रावलियों पर पेज नंबर डालकर उसे भिजवाने को कहा क्योंकि सोसायटी के पदाधिकारी भी कई पत्रावलियों व रजिस्टर अपने फ्लेट पर ले जाते हैं, लेकिन उसे रिकॉर्ड नहीं भिजवाया गया। दिनांक 04.08.2015 को पत्रावलियों के दस्तावेज की फोटो कॉपी भिजवाने को लिखा तथा फोटोकॉपी का खर्चा स्वयं द्वारा अदा करने का तथ्य भी लिखा था, लेकिन कॉपियां नहीं भेजी गईं, इस कारण उसने मेंटेनेंस चार्ज का भुगतान नहीं किया, उसके ऊपर कोई पेनल्टी नहीं बनती है और यदि कोई पेनल्टी लगाई जाती है तो उसे वसूल करने का अधिकार सोसायटी को नहीं होकर न्यायालय को है। दिनांक 10.08.2015 को उसने 45,988/-रूपए का चेक सोसायटी के सचिव को भेजा, जो दिनांक 01.04.2011 से 31.08.2015 तक की मेंटेनेंस चार्ज की राशि का था। पत्रावली व रिकॉर्ड नहीं दिखाने के कारण राशि अदायगी में देरी हुई। मेंटेनेंस की राशि की रसीद भेजी गई, उसमें लेट फीस की राशि भी वसूल कर ली गई, जो गैर-कानूनी है। अतः नल, बिजली, मिस्त्री की सेवा नहीं देने के कार
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