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छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पंडरी, रायपुर


Appeal No. SC/22/FA/496/2025


अपील क्रमांक-एसी/22/एफए/496/2025


शाखा प्रबंधक, मैग्मा एच. डी. आई. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड Vs. कुमारी सामिया


अपीलार्थी की ओर से श्री अभय चंद्रवंशी, अधिवक्ता

उत्तरवादिनी की ओर से श्री अनुराग सिंह, अधिवक्ता


समक्ष: माननीय न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरडिया, अध्यक्ष

माननीय श्री प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य


आदेश दिनांक-09.06.2026

Petitioner Advocates:ABHAY CHANDRAVANSHI ,Respondent Advocate: ANURAG SINGH

आदेश

( द्वारा- प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य )

अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार ने यह अपील धारा-41 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अंबिकापुर, सरगुजा (छ.ग) (जिसे आगे संक्षिप्त में "संबंधित जिला आयोग" संबोधित किया जाएगा) द्वारा प्रकरण क्रमांक-डीसी/389/सीसी/03/2025 पक्षकार "कुमारी सामिया विरुद्ध शाखा प्रबंधक, मैग्मा एच. डी. आई. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड" में पारित आदेश दिनांक-23.06.2025 जिसके द्वारा उत्तरवादिनी/परिवादिनी के परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेशित किया गया है कि "अनावेदक बीमा कंपनी आदेश दिनांक से 60 दिवस के भीतर बीमाधन राशि-15,00,000/-(पंद्रह लाख रुपये) एवं उक्त राशि पर परिवाद प्रस्तुति दिनांक-27.01.2025 से वास्तविक भुगतान दिनांक तक 06 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज व मानसिक क्षति हेतु 5,000/-(पांच हजार रुपये) तथा वाद व्यय हेतु 4,000/-(चार हजार रुपये) भुगतान करेगा अन्यथा 60 दिवस के बाद संपूर्ण अवार्ड राशि पर 08 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा", से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत किया है।

02- संबंधित जिला आयोग के समक्ष उत्तरवादिनी/परिवादिनी का परिवाद संक्षिप्त में इस प्रकार रहा है कि उत्तरवादिनी/परिवादिनी के भाई दिनेश कुमार किस्पोट्टा आ. स्व. राजेन्द्र किस्पोट्टा ने एक वाहन हीरो स्प्लेंडर क्रमांक-सी.जी. 15 डी एक्स/6656 क्रय किया था जिसका अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार से दिनांक-15.04.2022 से दिनांक-14.04.2023 तक ओन डेमेज एवं दिनांक-15.04.2022 से दिनांक-14.04.2027 तक तृतीय पक्ष हेतु बीमा करवाया था जिसका बीमा पॉलिसी क्रमांक-P0023000100/4113/920014 एवं बीमित मूल्य 66,766/-(छैंसठ हजार सात सौ छैंसठ रुपये) है। उक्त बीमा पॉलिसी के तहत मालिक सह चालक की 15,00,000/-(पंद्रह लाख रुपये) का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा भी किया गया था। उत्तरवादिनी/परिवादिनी के पति के भाई दिनेश कुमार किस्पोट्टा की दुर्घटना में दिनांक-18.05.2022 को मृत्यु हो गई जिसकी सूचना दिनांक-18.05.2022 को अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार को रजिस्टर्ड डाक द्वारा दी गई, किंतु अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई जिसके संबंध में उत्तरवादिनी/परिवादिनी ने माननीय जिला आयोग के समक्ष एक परिवाद प्रकरण क्रमांक-सीसी/2023/40 संस्थित किया था जिसमें माननीय जिला आयोग द्वारा दिनांक-15.03.2024 को आदेश पारित करते हुए बीमा कंपनी को 60 दिवस के भीतर दावा निराकृत करने का निर्देश दिया गया था जिसका पालन करते हुए उत्तरवादिनी/परिवादिनी ने बीमा कंपनी के समक्ष दिनांक-23.03.2024 को दावा प्रस्तुत किया एवं पुनः दिनांक-13.09.2024 को आवेदन प्रस्तुत किया, किंतु बीमा कंपनी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई जिसके उपरांत उत्तरवादिनी/परिवादिनी द्वारा दिनांक-23.03.2024 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से आवेदन मय दस्तावेज प्रेषित किया गया जिस पर क्लेम नं.-सी 1244113149862 दिनांक-02.05.2024 उत्तरवादिनी/परिवादिनी को प्रेषित किया गया जिसे भरकर उत्तरवादिनी/परिवादिनी द्वारा दिनांक-13.09.2024 को रजिस्टर्ड डाक से बीमा कंपनी को प्रेषित किया गया, किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई जिसके कारण उत्तरवादिनी/परिवादिनी को यह परिवाद लाने की आवश्यकता पड़ी है। अतः परिवाद में वांछित अनुतोष दिलाये जाने का निवेदन की है।

03- संबंधित जिला आयोग के समक्ष अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार की ओर से लिखित कथन प्रस्तुत कर यह बचाव लिया है कि दिनेश कुमार किस्पोट्टा के नाम से मोटर सायकल क्रमांक-सीजी 15 डी एक्स-6656 बीमा पॉलिसी के शर्तों के तहत दिनांक-15.04.222 से दिनांक-14.04.2023 तक ओन डेमेज एवं दिनांक-15.04.2022 से दिनांक-14.04.2027 तक तृतीय पक्ष हेतु बीमित है एवं उक्त पॉलिसी के तहत स्वामी-चालक हेतु 15,00,000/-(पंद्रह लाख रुपये) का व्यक्तिगत दुर्घटना भी कवर था। उत्तरवादिनी/परिवादिनी द्वारा किसी प्रकार के दस्तावेज जैसे क्लेम फार्म, बीमा, चालक लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, प्रथम सूचना-पत्र, चार्जशीट, मृत्यु प्रमाण-पत्र, शव परीक्षण रिपोर्ट अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार को उपलब्ध नहीं कराया गया था जिसके कारण मृतक का कोई दावा लंबित नहीं था। बीमा पॉलिसी में नामिनी के रूप में विकास किस्पोट्टा उल्लेखित है इसलिए उत्तरवादिनी/परिवादिनी को दावा का अधिकार नहीं है। उत्तरवादिनी/परिवादिनी द्वारा माननीय जिला आयोग के समक्ष पूर्व में प्रकरण क्रमांक-सीसी/2023/40 प्रस्तुत किया गया था जिसमें अपीलार्थी/विरुद्ध पक्षकार के बचाव को मान्य करते हुए माननीय जिला आयोग द्वारा उत्तरवादिनी/परिवादिनी को बीमा कंपनी के समक्ष मृत्यु दावा समस्त दस्तावेजों सहित प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था, किंतु उत्तरवादिनी/परिवादिनी द्वारा उक्त आदेश क

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