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Cause Title/Judgement-Entry
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2007/2471
( Date of Filing : 12 Nov 2007 )
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Pragya Clinic
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Smt Anita Singh
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Rajendra Singh PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR JUDICIAL MEMBER
 HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER
 
PRESENT:
 
Dated : 23 May 2022
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

                                                      (सुरक्षित)

अपील सं0- 2471/2007  

(जिला उपभोक्‍ता आयोग, गोरखपुर द्वारा परिवाद सं0- 267/2004 में   पारित निर्णय/आदेश दिनांक 28/09/2007 के विरूद्ध)

Pragya Clinic, 33 kasya Road, Civil Lines, Gorakhpur Through its Proprietor Dr. Anju Mishra.

  1.                                                                            Appellant
  •  
  1. Smt Anita Singh, W/O Shri Manoj Kumar Singh, R/O Ganna Vikas Vidyalay, Khalilabad, District Sant Kabir Nagar.
  2. The New India Assurance Co. Ltd. City Branch, Cinema Road, Gorakhpur, Through its Branch Manager.
  • Respondents  

समक्ष

  1. मा0 श्री राजेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य
  2. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्‍य
  3. मा0 श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य

उपस्थिति:

अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता:-श्री विकास अग्रवाल  

प्रत्‍यर्थी सं0 1 की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता:-श्री अम्‍बरीश कौशल श्रीवास्‍तव

दिनांक:-08.07.2022

माननीय श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

  1.            यह अपील विद्धान जिला उपभोक्‍ता फोरम गोरखपुर द्वारा परिवाद सं0 267/2004 श्रीमती अनीता सिंह बनाम डा0 श्रीमती       अन्‍जू मिश्रा व अन्‍य में पारित निर्णय व आदेश दिनांकित 28.09.2007 के विरूद्ध योजित की गयी है। निर्णय के माध्‍यम से परिवादिनी का परिवाद स्‍वीकार करते हुए विपक्षीगण को चिकित्‍सीय उपेक्षा एवं असावधानी के फलस्‍वरूप क्षतिपूर्ति के रूप में रूपये 3,00,000/- एवं वाद व्‍यय मय ब्‍याज दिलाये जाने के आदेश पारित किये हैं।
  2.           प्रत्‍यर्थी सं0 1/परिवादिनी ने परिवाद इन अभिकथनों के साथ योजित किया था कि परिवादिनी का विवाह फरवरी 2002 में हुआ था। परिवादिनी गर्भधारण की अवधि में प्रतिवादी चिकित्‍सक से परामर्श लेती रही। गर्भधारण के अंतिम चरण में प्रसव पीड़ा दिनांक 09.10.2003 को हुई। प्रसव कुशलतापूर्वक सम्‍पन्‍न होने की आशा में परिवादिनी को प्रतिवादी के नर्सिंग होम प्रज्ञा क्‍लीनिक में दिनांक 10.10.2003 को भर्ती कराया गया। क्‍लीनिक पर रूपये 35,172/- व्‍यय हुए। परिवादिनी के अनुसार विपक्षी ने अधिक से अधिक  धन वसूल करने के लिए सामान्‍य प्रसव के स्‍थान पर ऑपरेशन के द्वारा प्रसव प्रक्रिया पूरी की। दिनांक 20.10.2003 को परिवादिनी को डिस्‍चार्ज किया गया किन्‍तु विपक्षी के चिकित्‍सा में कमी उपेक्षा व लापरवाही का कारण प्रार्थिनी को अनेक तकलीफें बनी रही। परिवादिनी का टांका दिनांक 23.10.2003 को खुल गया, जिसको ठीक करने के लिए विपक्षी ने रूपये 5,000/- वसूल किये, इसकी कोई रसीद नहीं दी गयी। परिवादिनी की तकलीफें बरकरार रही, जिस कारण दिनांक 28.10.2003 को पुन: प्रतिवादी को दिखाया जिन्‍होंने कहा कि ऑपरेशन पुन: करना पडे़गा। ऑपरेशन में पुन: 64,844/- रू0 व्‍यय हुये, जिसकी कोई रसीद प्रत्‍यर्थी सं0 1/परिवादिनी को प्रदान नहीं की गयी। परिवादिनी के अनुसार पुन: प्रतिवादी ने चिकित्‍सा सेवा में कमी उपेक्षा व लापरवाही का परिचय देते हुए दुबारा ऑपरेशन में एक प्‍लास्टिक पाइप पेट के कोने मे लगा दिया और कहा कि स्थिति सामान्‍य होने पर उसे निकाल दिया जायेगा। ऑपरेशन के कारण प्रार्थिनी की स्थिति और चिन्‍ताजनक हो गयी। यूटेरस से गंदगी भारी मात्रा में बाहर आने लगी। खाना बिल्‍कुल हजम नहीं हो रहा था। अत: प्रार्थिनी के परिवार के सदस्‍य घबरा गये तथा गंभीर हालत में दिनांक 26.12.2003 को जगरानी हॉस्पिटल, लखनऊ ले गये, जहां उसे पुन: भर्ती किया गया तथा हॉस्पिटल के चिकित्‍सक डॉक्‍टर संजय श्रीवास्‍तव ने प्रार्थिनी का ऑपरेशन किया तथा लापरवाही के साथ प्‍लास्टिक का लगाया हुआ पाइप पेट के अंदर पाया गया, जिसे ऑपरेट करके निकाला गया तथा प्रार्थिनी की यूटेरस को भी ऑपरेट करके निकालना पड़ा, जिस कारण प्रार्थिनी भविष्‍य में सन्‍तान उत्‍पत्ति से वंचित हो गयी है, जिससे व्‍यथित होकर यह परिवाद प्रस्‍तुत किया गया और प्रार्थिनी ने प्रतिवादी से रू0 1.5 लाख रूपये क्षतिपूर्ति के




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