राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक
अपील संख्या-1871/2008
मेरठ डेवलपमेन्ट अथारिटी, मेरठ द्वारा सेक्रेटरी। .......अपीलार्थी@विपक्षी
बनाम
सुरेन्द्र कुमार सनसनवाल पुत्र श्री एस.एस.सनसनवाल निवासी एच.एन.
272, कटवारिया सराय, पी.ओ. हौज खास, न्यू दिल्ली।
.......प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. मा0 डॉ आभा गुप्ता, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री पुनीत बिसारिया, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री टी0एच0 नकवी, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक 02.03.2022
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या 177/2008 सुरेन्द्र कुमार सनसनवाल बनाम मेरठ विकास प्राधिकरण मेरठ में पारित निर्णय व आदेश दिनांक 05.07.2008 के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गई है। परिवाद स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता मंच द्वारा विपक्षी को आदेशित किया गया है कि परिवादी को आवंटित भूखंड का कब्जा परिवादी को देकर उसके पक्ष में विक्रय विलेख निष्पादित कराया जाए। अंकन रू. 2000/- क्षतिपूर्ति और रू. 2000/- परिवाद व्यय के रूप में भी अदा करने के लिए आदेशित किया गया है।
2. इस निर्णय व आदेश के विरूद्ध अपील इन आधारों पर प्रस्तुत की गई है कि जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय अवैध है और क्षेत्राधिकार का सही प्रयोग नहीं किया गया है। अपीलार्थी द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गई है। स्वयं परिवादी ने नियमित रूप से धनराशि अदा नहीं की है। यह भी उल्लेख किया गया है कि चूंकि स्वयं परिवादी ने कब्जा प्राप्त नहीं किया है, इसलिए विकास कार्य नहीं किया गया।
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3. दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना गया। प्रश्नगत निर्णय/ आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया गया।
4. जिला उपभोक्ता मंच ने अपने निर्णय में स्पष्ट निष्कर्ष दिया है कि परिवादी द्वारा उसे आवंटित भूखंड का मूल्य जमा करा दिया गया, परन्तु स्वयं प्राधिकरण द्वारा कब्जा अदा नहीं किया गया। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि किसानों द्वारा आपत्ति करने के कारण कब्जा सुपुर्द नहीं किया जा सका। इस स्थिति में भी यह कहा जा सकता है कि प्राधिकरण द्वारा परिवादी के प्रति सेवा में कमी की गई, इसलिए जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार प्रतीत नहीं होता है। तदनुसार अपील खारिज होने योग्य है।
आदेश
अपील खारिज की जाती है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय-व्यय भार स्वंय वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की वेबसाइड पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(सुशील कुमार) (डॉ आभा गुप्ता) सदस्य सदस्य
राकेश, पी0ए0-2
कोर्ट-2