( मौखिक )
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।
अपील संख्या: 353/2008
(जिला उपभोक्ता आयोग, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या- 550/2006 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 16-01-2008 के विरूद्ध)
- मैनेजिंग डायरेक्टर, केस्को, सिविल लाइन्स कानपुर नगर।
- एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, केस्को, डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन, नवाब गंज कानपुर नगर।
बनाम
शंकर दयाल सैनी निवासी- 7/217, स्वरूप नगर कानपुर नगर।
प्रत्यर्थी
समक्ष :-
माननीय श्री विकास सक्सेना सदस्य
माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्या
उपस्थिति :
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित – विद्वान अधिवक्ता श्री इशार हुसैन
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित – कोई उपस्थित नहीं।
दिनांक : 26-05-2023
माननीय सदस्या श्रीमती सुधा उपाध्याय द्वारा उदघोषित
प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी मैनेजिंग डायरेक्टर, केस्को, सिविल लाइन्स कानपुर नगर द्वारा विद्वान जिला आयोग, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या- 550/2006 शंकर दयाल सैनी बनाम महाप्रबन्धक केस्को व एक अन्य में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक- 16-01-2008 के विरूद्ध उपभोक्ता संरक्षण 1986 के अन्तर्गत इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
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वाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि परिवादी ने अपने परिसर में अपने पुत्र सुरेश कुमार के व्यवसाय हेतु दुकान बनवाकर कामर्शियल विद्युत कनेक्शन हेतु केसा कानपुर में आवेदन किया व दिनांक17-01-1993 को मु0 300/-रू० जमानत राशि जमा किया। परिवादी का पुत्र कनेक्शन प्राप्त कर साइकिल हवा भरने का व्यवसाय करने लगा तथा विद्युत बिलों का भुगतान लगातार करता रहा। दिनांक 04-02-1997 को विद्युत बिल जमा न होने के कारण परिवादी का विद्युत कनेक्शन टर्मिनल सील तोड़कर मीटर से तार हटाकर विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गयी। परिवादी ने पुन: 140/-रू० रिकनेक्शन शुल्क जमा करके विद्युत आपूर्ति चालू करायी गयी। दिनांक 20-05-2006 को परिवादी के पुत्र की दुकान का विपक्षी के क्षेत्रीय सहायक व अवर अभियन्ता द्वारा निरीक्षण किया गया जिसमें मौके पर एक कम्प्रेशन मशीन 746 वाट एक बल्ब तथा एक ट्यूब लाइट का उपभोग करते पाया गया। उन्होंने कुछ धनराशि की मांग की जो न देने पर मीटर उखाड़ दिया गया तथा कनेक्शन काट दिया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 01-06-2006 को नोटिस भेजकर 20,000/-रू० की मांग की जो अवैधानिक है। अत: परिवादी ने परिवाद जिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया।
विपक्षी ने अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत करते हुए कथन किया है कि दिनांक 20-05-2006 को परिवादी के परिसर में अचानक निरीक्षण किया गया तो उसमें पाया गया कि मीटर पर टर्मिनल सील नहीं है एवं बड़ी सील टैम्पर्ड है। अत: विद्युत अधियिम की धारा 135 के अन्तर्गत कार्यवाही प्रस्तावित करते हुए विद्युत अधिनियम 2003 एवं विद्युत
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आपूर्ति संहिता 2005 के प्राविधानों के तहत राजस्व का निर्धारण रू० 24,764/-रू० किया गया। परिवादी ने उक्त धनराशि जमा न करके परिवाद दाखिल किया जो पोषणीय नहीं है। विपक्षी द्वारा सेवा में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं की गयी है।
जिला आयोग ने उभय-पक्ष को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का परिशीलन करने के उपरान्त परिवाद विद्युत विभाग के विरूद्ध स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
" परिवाद पत्र स्वीकार किया जाता है। विपक्षी को आदेश दिया जाता है कि निर्णय के दिनांक से एक सप्ताह के अन्दर परिवादी का विद्युत कनेक्शन संयोजित करें। विपक्षी द्वारा निर्गत डिमाण्ड की धनराशि निरस्त की जाती है। वाद व्यय के रूप में 1000/-रू० विपक्षी आगे के निर्गत बिलों में समायोजित करें।"
जिला आयोग के उपरोक्त निर्णय से क्षुब्ध होकर परिवाद के विपक्षी की ओर यह अपील प्रस्तुत की गयी है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री इशार हुसैन उपस्थित हुए। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थ