राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील सं0-२३१/२०१०
(जिला फोरम/आयोग (प्रथम), आगरा द्वारा परिवाद सं0-१४६/२००१ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक ०८-१०-२००९ के विरूद्ध)
डॉ0 रंजना बंसल मैनेजिंग डायरेक्टर मै0 अशोक सेल्स लि0 आगरा कानपुर रोड, नुनिहाई, आगरा। ...........अपीलार्थी/विपक्षी सं0-१.
बनाम
१. मै0 ओम प्रकाश आइस एण्ड कोल्ड स्टोरेज ११/बी, फाउण्ड्री नगर, आगरा।
............ प्रत्यर्थी/परिवादी।
२. टेलको मार्केटिंग एण्ड पैसेन्जर सपोर्ट डिवीजन, २६वॉं तल, सेण्टर नं0-१, मुम्बई तथा तीन अन्य। ............ प्रत्यर्थीगण/विपक्षी सं0-२ लगायत ५.
समक्ष:-
१- मा0 श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
२- मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री एस0के0 श्रीवास्तव विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी सं0-१ की ओर से उपस्थित : श्री महेन्द्र कुमार मिश्रा विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी सं0-२ से ५ की ओर से उपस्थित: श्री राजेश चड्ढा विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक :- ११-०४-२०२२.
मा0 श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह अपील, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम १९८६ के अन्तर्गत जिला फोरम/आयोग (प्रथम), आगरा द्वारा परिवाद सं0-१४६/२००१ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक ०८-१०-२००९ के विरूद्ध योजित की गयी है।
यह अपील विलम्ब से प्रस्तुत की गई है और विलम्ब को क्षमा करने का प्रार्थना पत्र अपीलार्थी द्वारा दिया गया है।
हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी तथा पत्रावली का सम्यक रूप से परिशीलन किया।
अपीलार्थी ने अपने विलम्ब क्षमा प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसने पहली बार प्रश्नगत निर्णय की नकल के लिए दिनांक २२-१०-२००९ को आवेदन किया। तब उसे
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मालूम हुआ कि परिवादी स्वीकार हो चुका है और उसे प्रमाणित प्रतिलिपि दिनांक २७-१०-२००९ को प्राप्त हुई। उसने इसे लखनऊ स्थित अपने अधिवक्ता को दिनांक १२-११-२००९ को भेजा। सम्बन्धित अधिवक्ता ने पाया कि यह प्रति अपूर्ण है और साथ ही साथ २५,०००/- रू० के ड्राफ्ट के लिए भी उसने सूचना भेजी। प्रबन्ध निदेशक शहर से बाहर थे इसलिए ड्राफ्ट तैयार कर लखनऊ स्थित अधिवक्ता को दिनांक ०७-०२-२०१० को भेजा गया जो भी विलम्ब हुआ वह मानव नियन्त्रण से बाहर था और कोई जानबूझकर विलम्ब नहीं किया गया है। अत: ऐसी स्थिति में विलम्ब क्षमा किया जाए।
प्रत्यर्थी की ओर से आपत्ति की गई और कहा गया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत उचित, युक्ति-युक्त और सन्तोषजनक आधार प्रस्तुत करने पर ही विलम्ब क्षमा किया जा सकता है। इस मामले में एक शपथ पत्र दिया गया है किन्तु शपथ पत्र में अपील और विलम्ब क्षमा प्रार्थना दोनों ही का प्रार्थना पत्र में समावेश किया गया है जो एक अनियमितता है। यदि इसे मान भी लिया जाए कि विलम्ब क्षमा करने का प्रार्थना के साथ है तब भी इस मामले में अन्य तथ्यों को देखना भी आवश्यक है।
सर्वप्रथम हम उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के उद्देश्यों पर विचार करते हैं :-
Now before going to the time limit and effect of delay in filing appeal, it is better to understand the object of The Consumer Protection Act.
The Consumer Protection Act 1986 was enacted to provide for better protection of the interests of consumers and for that purpose to make provision for the establishment of Consumers Councils and other authorities for the settlement of consumers’ disputes and for matters connected therewith (Preamble).
The Act Inter alia, seeks to promote and protect the rights of