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Cause Title/Judgement-Entry
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2013/1459
( Date of Filing : 01 Jul 2013 )
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Mahindra & Mahindra Financial Services
-
...........Appellant(s)
Versus
1. Shamsheer Ahamd
-
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Gobardhan Yadav PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER
 
PRESENT:
 
Dated : 05 Oct 2020
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित

अपील संख्‍या-1459/2013

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, द्वितीय बरेली द्वारा परिवाद संख्‍या 292/2009 में पारित निर्णय दिनांक 31.01.2013 के विरूद्ध)

महिन्‍द्रा एण्‍ड महिन्‍द्रा फाइनेन्सियल सर्विसेस लि0। महिन्‍द्रा टावर

फैजाबाद रोड, लखनऊ आन बिहाफ आफ जी.के.एस पैलेस 63

अय्यूब खान, चौपुला रोड, सिविल लाइन्‍स, पी.एस. कोतवाली तहसील,

जिला बरेली।                                   ......अपीलार्थी/विपक्षी

बनाम्

शमशीर अहमद पुत्र नजीर अहमद निवासी ग्राम हरहरपुर, मटकली

पी.एस. हाफिज गंज, तहसील नवाबगंज, जिला बरेली।  ......प्रत्‍यर्थी/परिवादी

समक्ष:-

1. मा0 श्री गोवर्धन यादव, सदस्‍य।

2. मा0 श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री अदील अहमद, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित   : श्री टी0एच0 नकवी, विद्वान अधिवक्‍ता।

दिनांक 29.10.2020

मा0 श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

1.   यह अपील जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम द्वितीय बरेली द्वारा परिवाद संख्‍या 292/2009 में पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दि. 31.01.2013 से व्‍यथित होकर योजित की गई है, जिसके माध्‍यम से विद्वान जिला फोरम ने परिवादी का परिवाद अंशत: आज्ञप्‍त करते हुए विपक्षी/फाइनेन्‍सर को क्रय किए गए वाहन का मूल्‍य रू. 138270/- की धनराशि भुगतान करने और इस पर वाद प्रस्‍तुति से अंतिम भुगतान तक 10 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज का आदेश दिया।

2.   मामले के कथन इस प्रकार है कि परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने एक तिपहिया वाहन महिन्‍द्रा चैम्पियन लोडर, टैम्‍पो दि. 10.12.2004 को क्रय मूल्‍य रू. 173000/- में क्रय किया, जिसमें उसने रू. 43000/- नगद और रू. 130000/- विपक्षी से ऋण कराके विक्रेता को दिया था। ऋण का भुगतान

-2-

विपक्षी द्वारा तय की गई 35 किश्‍त में प्राप्‍त रू. 5268/- प्रतिमाह में किया जाना था। परिवादी के अनुसार वह कुछ समय तक किश्‍तें अदा करता रहा और टैम्‍पो चलता रहा, किंतु टैम्‍पो सही न चलने के कारण परिवादी/प्रत्‍यर्थी द्वारा दिए जाने वाली किश्‍ते टूट गई। पुन: दि. 14.06.2006 के उपरांत प्रत्‍यर्थी ने कुछ धनराशि पुन: विपक्षी को अदा की और इस प्रकार समस्‍त धनराशि रू. 95270/- विपक्षी को अदा कर दिया, किंतु दि. 02.04.2007 को विपक्षी के मातहत कर्मचारीगण ने परिवादी का टैम्‍पो रूकवाकर परिवादी के ड्राइवर से चाभी छीन ली और उक्‍त वाहन कब्‍जे में ले लिया। परिवादी का कथन है कि इसके पूर्व विपक्षी/अपीलार्थी ने परिवादी को कोई नोटिस नहीं दिया था और न ही किश्‍तों का कोई हिसाब ही दिा था। मई 2008 में परिवादी को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, उधम सिंह नगर का पत्र दिनांकित 12.05.2008 प्राप्‍त हुआ, जिससे परिवादी को ज्ञात हुआ कि उसे बिना कोई सूचना दिए ही विपक्षी/अपीलार्थी ने परिवादी का उक्‍त टैम्‍पो किसी व्‍यक्ति तृतीय पक्ष को कर दिया है। परिवादी का कथन आया कि विपक्षी ने सेवा में त्रुटि की है।

3.   विपक्षी ने अपने उत्‍तर पत्र में परिवादी को हायर परचेज एग्रीमेन्‍ट के अधीन तिपहिया वाहन क्रय करने के लिए रू. 130000/- का ऋण देना स्‍वीकार किया। अपीलार्थी के अनुसार उक्‍त ऋण का भुगतान 35 मासिक किश्‍तों में किया जाना था। अपीलार्थी के अनुसार परिवादी ने कभी भी नियमित रूप से ऋण की किश्‍तों का भुगतान नहीं किया, जिसके फलस्‍वरूप हायर परचेज एग्रीमेन्‍ट के अनुसार उसके ऊपर दण्‍डात्‍मक ब्‍याज लगाया गया। बार-बार मांगने पर भी ऋण की अदायगी नहीं की गई। अपीलार्थी का कथन है कि ऋण संविदा के अनुसार ऋण की अदायगी पूर्ण होने तक

-3-

प्रश्‍नगत वाहन का मालिकाना हक विपक्षी का है, इस आधार पर विपक्षी ने परिवाद को खारिज किए जाने की प्रार्थन की।

4.   उभय पक्ष के कथनों एवं समस्‍त अभिलेखीय साक्ष्‍य के अवलोकन के उपरांत विद्वान जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा प्रश्‍नगत निर्णय दिनांकित 31.01.2013 पारित किया गया, जिसमें परिवाद अंशत: आज्ञप्‍त किया गया और विपक्षी को आदेशित किया गया कि वह परिवादी को वाहन मूल्‍य रू. 138270/- की धनराशि व इस पर परिवाद प्



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