राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित)
अपील संख्या:-668/2019
(जिला उपभोक्ता आयोग, फतेहपुर द्धारा परिवाद सं0-132/2014 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 28.02.2019 के विरूद्ध)
आई0सी0आई0सी0आई0 लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड, द्वारा मैनेजर लीगल, आफिस चतुर्थ तल, कार्पोरेट चैम्बर्स, विभूति खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ।
........... अपीलार्थी/विपक्षी सं0-2
बनाम
1- सुखरानी पत्नी स्व0 रघुनन्दल, निवासिनी ग्राम बकन्धा, पोस्ट कोराई, तहसील व जिला फतेहपुर।
…….. प्रत्यर्थी/परिवादिनी
2- स्टेट आफ यू0पी0 द्वारा जिलाधिकारी, फतेहपुर।
…….. प्रत्यर्थी/विपक्षी सं0-1
समक्ष :-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य
अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री बृजेन्द्र चौधरी
प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : श्री विजय शर्मा
दिनांक :- 14-11-2022
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी/आई0सी0आई0सी0आई0 लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड द्वारा इस आयोग के सम्मुख धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, फतेहपुर द्वारा परिवाद सं0-132/2014 श्रीमती सुखरानी बनाम सरकार उ0प्र0 व एक अन्य में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 28.02.2019 के विरूद्ध योजित की गई है।
जिला उपभोक्ता आयोग ने अपीलार्थी/विपक्षी सं0-2 को निर्देशित किया है कि बीमित राशि अंकन 1,00,000.00 रू0 तथा इस राशि पर 07 प्रतिशत का ब्याज परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से जारी किया जाये।
-2-
इस निर्णय एवं आदेश को इन आधारों पर चुनौदी दी गई है कि जिला उपभोक्ता आयोग ने तथ्य एवं साक्ष्य के विपरीत निर्णय पारित किया है, जो अपास्त होने योग्य है।
दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन किया।
परिवाद के तथ्यों के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादिनी के पति की मृत्यु दुर्घटना में दिनांक 23.3.2008 को हो गई थी, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गई थी तथा मृतक का पोस्ट मार्टम हुआ था, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा बीमा क्लेम नहीं दिया गया, अत: इस निर्णय/आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है, सिवाय इसके कि ब्याज अदा करने का आदेश परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि के बजाय निर्णय पारित होने की तिथि से दिये जाने का आदेश दिया जाना चाहिए, अत: अपील आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित आदेश इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी को परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि के स्थान पर निर्णय की तिथि से ब्याज देय होगा।
धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत अपील में जमा धनराशि रू0 25,000.00 मय अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को विधिनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जावे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की बेवसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (सुशील कुमार)
अध्यक्ष सदस्य
हरीश आशु.,
कोर्ट नं0-1