(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ।
परिवाद सं0.369/2016
रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव श्रीवास्तव (मृतक) पुत्र पुत्र पी0डी0 श्रीवास्तव निवासी पवन बिहार आर्मी आफिसर्स इन्कलेव बैंक रोड ओल्ड कैण्ट इलाहाबाद।
प्रतिस्थापित वारिसान:-
आरती श्रीवास्तव पत्नी स्व0 रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव।
आयुष श्रीवास्तव पुत्र स्व0 रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव।
रीति श्रीवास्तव पुत्री स्व0 रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव।
समस्त निवासीगण शान्ती भवन आदर्श नगर नियर रेलवे गोडाऊन रोजा शाहजहॉंपुर यू0पी0-242306
परिवादीगण
बनाम
मेसर्स पार्श्वनाथ डेवलपर्स लि0 द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि पार्श्वनाथ प्लान्ट प्लाट नं0. टी0सी0जी0 8/8 तथा 9/9 विभूति खण्ड गोमतीनगर लखनऊ।
........... विपक्षी
समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार अध्यक्ष ।
माननीय श्री विकास सक्सेना सदस्य।
परिवादी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता- श्री ऋषि सक्सेना।
विपक्षी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री राजेश चड्ढा।
दिनॉक- 28.11.2023
माननीय न्यायमूति अध्यक्ष द्वारा उद्घोषित
निर्णय
उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण द्वय को विस्तार से सुना गया एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का सम्यक रूप से परिशीलन व परीक्षण किया गया।
दौरान् बहस आज उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण द्वय द्वारा इस न्यायालय के सम्मुख कथन किया गया कि प्रस्तुत परिवाद में पूर्व में पारित विभिन्न आदेशों के पश्चात् परिवाद प्रस्तुत किए जाने के उपरान्त 06 वर्ष की अवधि व्यतीत होने के पश्चात् विपक्षी कम्पनी द्वारा परिवादिनी श्रीमती आरती पत्नी स्व0 रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव को आबंटित फ्लैट सं0-सी-21 एस पार्श्वनाथ रॉयल फ्लोर्स का कब्जा दिनांक 06.10.2023 को प्राप्त कराया जा चुका है। तदनुसार उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण द्वारा प्रस्तुत परिवाद को इसी स्तर पर अन्तिम रूप से निस्तारित किए जाने हेतु अपनी-अपनी सहमति व्यक्त की गई, परन्तु अधिवक्ता परिवादिनी द्वारा विलम्बित ब्याज दिलाए जाने हेतु प्रार्थना की गई। तदनुसार परिवाद के गुणदोष पर बिना कोई निष्कर्ष दिए प्रस्तुत परिवाद उपरोक्तानुसार उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण द्वय की सहमति के आधार पर अन्तिम रूप से निस्तारित किया जाता है।
यहॉं यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि विलम्बित ब्याज की देयता ऊपर उल्लिखित अवधि में विपक्षी कम्पनी द्वारा सुनिश्चित नहीं की जावेगी तब परिवादिनी प्रार्थना पत्र देकर प्रस्तुत परिवाद को पुनर्जीवित करा सकती है।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना)
अध्यक्ष सदस्य
सुरेन्द्र कुमार वैय0सहा0 कोर्ट नं0-2