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Cause Title/Judgement-Entry
STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Complaint Case No. C/2011/129
( Date of Filing : 28 Nov 2011 )
 
1. Saraswati Steel
a
...........Complainant(s)
Versus
1. Syndicate Bank
a
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER
 
PRESENT:
 
Dated : 28 Nov 2023
Final Order / Judgement

(मौखिक)

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

परिवाद संख्‍या-129/2011

M/S Saraswati Steel, D-4 Industrial Area-II & other 

Vs.

Syndicate Bank & other

समक्ष:-                                                            

1. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्‍य।

2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्‍याय, सदस्‍य।

परिवादीगण की ओर से उपस्थित   :कोई नहीं  

विपक्षीगण की ओर से उपस्थित: कोई नहीं  

दिनांक : 28.11.2023 

माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

  1.       यह परिवाद विपक्षी बैंक के विरूद्ध अनुतोष की याचना हेतु प्रस्‍तुत की गयी है, परंतु परिवाद पर बल देने के लिए कोई उ‍पस्थित नहीं है। अत: स्‍वयं पीठ द्वारा परिवाद पत्र का अवलोकन किया गया।
  2.       परिवाद पत्र का अवलोकन किया गया तथा वांछित अनुतोष पर विचार किया गया। परिवादी द्वारा विपक्षी बैंक से ऋण प्राप्‍त किया गया था तथा इस अनुतोष की मांग की गयी है कि बैंक को निषेधित किया जाये कि गिरवी रखी हुई सम्‍पत्ति का बलपूर्वक कब्‍जा न लिया जाये और कानूनी प्रक्रिया अपनाने के पश्‍चात ही कार्यवाही की जाए, साथ ही अंकन 18,62,076/-रू0 82 पैसे परिवादी के खाते में वापस जमा करने का अनुरोध किया गया। सिंडीकेट बैंक द्वारा प्रस्‍तुत किये गये विवरण के अवलोकन से जाहिर होता है कि परिवादी पर 523.78/- लाख रू0 बकाया है। परिवादी की लिमिट 500 लाख रूपये की थी। परिवादी द्वारा 5,00,000/-रू0 की किश्‍त का भुगतान नहीं किया गया तथा इस राशि पर 3,83,000/-रू0 का ब्‍याज भी बकाया था। यह भी उल्‍लेखनीय है कि परिवादी उच्‍च व्‍यापारिक संस्‍थान है, जिसके द्वारा लाखों रूपयों का सम्‍व्‍यवहार किया गया है, इसलिए बैंक को अपने द्वारा दिये गये ऋण की वसूली से रोकने का आदेश उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत पारित करना न्‍यायोचित नहीं है। अत: यह परिवाद खारिज होने योग्‍य है।   
  3.  

              परिवाद खारिज किया जाता है।

  आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय एवं आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।

(सुधा उपाध्‍याय)(सुशील कुमार)

सदस्‍य सदस्‍य

संदीप सिंह, आशु0 कोर्ट 3

 
 
[HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR]
PRESIDING MEMBER
 
 
[HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY]
MEMBER
 
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