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छत्तीसगढ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम, 2005

क्रमांक 2 सन् 2005

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S.15-क अनुसूची-2 को संशोधित करने की राज्य शासन की शक्ति

—(1) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा, अनुसूची-2 को संशोधित कर सकेगी और तदुपरि उक्त अनुसूची तदनुसार संशोधित हो जाएगी:

परन्तु चोषित माल से भिन्न उसमें विनिर्दिष्ट किसी माल के संबंध में वर की दर अनुसूची में विनिर्दिष्ट ठीक उच्चतर स्तर में विहित कर की दर से अधिक नहीं होगी;

परन्तु यह और भी कि यदि किसी माल को अनुसूची के किसी एक भाग में से निकालकर तथा किसी दूसरे में अंत:स्थापित करके या की जाए या जोड़ी जाए तो ऐसे माल के संबंध में कर की दर अनुसूची में विनिर्दिष्ट ठीक उच्चतर स्तर में विहित कर की दर से अधिक नहीं होगी।

(2) कर की दर में वृद्धि करने संबंधी कोई भी अधिसूचना, इस धारा के अधीन तब तक जारी नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसी अधिसूचना जारी करने के अपने आशय की, ऐसी पूर्व सूचना, जैसी कि राज्य सरकार युक्तियुक्त समझे, राजपत्र में नहीं दे दी जाती।

(3) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, यथासंभव शीघ्र, विधानसभा के पटल पर रखी जाएगी।


S.15ख व्यावृत्ति

—(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा तथा ऐसे निबंधनों तथा शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि उसमें विनिर्दिष्ट की जाए,

  • (एक) (क) व्यापारियों के किसी वर्ग को, या
  • (ख) किसी माल या माल के किसी वर्ग को, पूर्णत: या अंशत: इस अधिनियम के अधीन कर के भुगतान से, ऐसी कालावधि के लिए, जैसा कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए,
  • (दो) किसी व्यापारी या व्यापारियों के किसी वर्ग को इस अधिनियम के किसी उपबंध से या धारा 71 के अधीन बनाए गए नियम के किसी उपबंध से ऐसी कालावधि के लिए, जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए,

चाहे भविष्यलक्षी प्रभाव से या भूतलक्षी प्रभाव से छूट दे सकेगी।

(2) इस धारा के अधीन जारी की गई किसी अधिसूचना को उस कालावधि को, जिसके लिए उसे प्रवृत्त रहना था, अवसान होने के पूर्व विखंडित किया जा सकेगा और ऐसा विखंडन हो जाने पर ऐसी अधिसूचना प्रवृत्त नहीं रह जाएगी। किसी पूर्ववर्ती अधिसूचना को विखंडित करने वाली अधिसूचना का भविष्यलक्षी प्रभाव होगा।

(3) छत्तीसगढ़ वाणिज्यक कर अधिनियम, 1994 (छत्त ० ग० अधिनियम क्रमांक 5 सन् 1995) (जो इसमें, इसके

S.37

(तीन) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कर के तौर पर किसी रकम की कटौती करने के लिए अपेक्षित किसी व्यक्ति से, भिन्न कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन कर के तौर पर किसी रकम का संग्रहण नहीं करेगा। उपरोक्त (एक) से (तीन) में विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा कर का कोई भी संग्रहण इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार ही किया जाएगा अन्यथा नहीं।

(2) किसी व्यक्ति द्वारा उपधारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन से संगृहीत कोई रकम या किसी व्यक्ति द्वारा कर के रूप में या किसी अन्य रीति से संगृहीत कोई रकम, जो इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन देय नहीं है, और जो उसके द्वारा उस व्यक्ति को जिससे वह संगृहीत की गई थी लौटाई नहीं गई है, राज्य सरकार के पक्ष में समपहरणीय होगी।

(3) यदि आयुक्त को, इस अधिनियम के अधीन की किन्हीं कार्यवाहियों के अनुक्रम में या अन्यथा, यह विश्वास करने का कारण है कि कोई रकम उपधारा (2) के अधीन समपहरणीय है तो वह, उस व्यक्ति पर, जिसने ऐसी रकम संगृहीत की है, एक सूचना विनिर्दिष्ट प्ररूप में तामील कराएगा जिसमें उससे यह अपेक्षा की जाएगी कि वह यह कारण दर्शाए कि क

S.55 उच्च न्यायालय को मामले का विवरण

—(1) 2[अधिकरण] द्वारा किसी व्यापारी को या आयुक्त को धारा 48, धारा 49, धारा 56 के अधीन किसी आदेश के संवीपित किए जाने की तारीख से साठ दिन के भीतर, ऐसा व्यापारी या आयुक्त, लिखित आवेदन द्वारा, जिसके साथ उस दशा में जबकि आवेदन किसी व्यापारी द्वारा किया जाये, एक सौ रुपये की फीस संलग्न होगी 2[अधिकरण] से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसे आदेश से उद्भूत होने वाले विधि संबंधी किसी प्रश्न को उच्च न्यायालय को निर्दिष्ट करे, और जहाँ 2


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