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राजस्थान भूजल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण बिल, 2024

बिल, 2024

26 जुलाई, 2024 (प्रस्तुतीकरण तिथि)

यह राजस्थान भूजल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण बिल, 2024 पर आधारित एक विधायी संक्षिप्त (Legislative Brief) है, जिसमें बिल की मुख्य विशेषताओं, प्रमुख मुद्दों और विश्लेषण का विवरण दिया गया है।

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S.1 मुख्य विशेषताएं

  • बिल भूजल के संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक राज्य भूजल प्राधिकरण की स्थापना करता है।
  • सभी गैर-कृषि उपयोगकर्ताओं को भूजल उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त करनी होगी और मात्रा-आधारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
  • भूजल की अनाधिकृत निकासी, ड्रिलिंग या प्रदूषण पर दंड लगाया जाएगा, जिसका निर्धारण राज्य सरकार द्वारा नियमों के माध्यम से किया जाएगा।
  • कृषि उपयोगकर्ताओं, जो भूजल का 85% उपयोग करते हैं, को अनुमति लेने और शुल्क भुगतान करने की आवश्यकता से छूट दी गई है।
  • बिल नियमों के माध्यम से अनाधिकृत कार्यों के लिए दंड निर्धारित करता है जो एक्सेसिव डेलीगेशन यानी अत्यधिक प्रत्यायोजन हो सकता है।
  • बिल में प्राधिकरण के निर्णयों के विरुद्ध अपील करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

S.2 भाग क: बिल की मुख्य विशेषताएं

जल राज्य सूची के तहत आने वाला विषय है लेकिन इसके बावजूद भूजल का रेगुलेशन और प्रबंधन, राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर किया जाता है। राजस्थान भूजल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण बिल, 2024 को राजस्थान विधानसभा में 26 जुलाई, 2024 को पेश किया गया था। इसे 1 अगस्त, 2024 को सेलेक्ट कमिटी को भेजा गया था।

प्रमुख प्रावधान:

  • भूजल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण: बिल राजस्थान भूजल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण की स्थापना करता है। इसकी अध्यक्षता सरकार के सचिव या मुख्य भूजल अभियंता के पद पर रह चुके व्यक्ति द्वारा की जाएगी।
  • भूजल निकासी हेतु अनुमतियां और शुल्क: कृषि उपयोग को छोड़कर भूजल के सभी उपयोगकर्ताओं को मौजूदा और प्रस्तावित निकासी संरचनाओं के लिए अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा। प्राधिकरण किफ़ायती, दक्षता, समता और स्थिरता के सिद्धांतों के आधार पर शुल्क लगाएगा।
  • प्राधिकरण के कार्य: राज्य भूजल संरक्षण और प्रबंधन योजना की समीक्षा करना, राज्य को जोन्स में वर्गीकृत करना, और जल अधिकारों का सुझा

S.3 भाग ख: प्रमुख मुद्दे और विश्लेषण

बिल के विश्लेषण में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उभरे हैं:

  • भूजल के उपयोग को रेगुलेट करने की चुनौतियां: भारत में भूजल स्वामित्व भूमि स्वामित्व से जुड़ा है। बिल इसे विनियमित करने का प्रयास करता है, लेकिन निजी स्वामित्व वाले मॉडल को चुनौती देता है।
  • 85% भूजल उपयोग को अनुमतियों और शुल्क से छूट दी गई है: बिल कृषि उपयोगकर्ताओं को छूट देता है, लेकिन इसके पीछे का तर्क स्पष्ट नहीं है।
  • शुल्क संरचना को लागू करने के लिए अवसंरचना विस्तार की जरूरत: मीटरिंग सिस्टम और डेटा प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के खर्च को लेकर अस्पष्टता है।
  • प्रवेश और निरीक्षण की शक्तियों के मद्देनजर सुरक्षा उपायों का अभाव: बिल में अन्य कानूनों (जैसे खाद्य सुरक्षा और मानक एक्ट, 2006) की तरह तलाशी या निरीक्षण के दौरान सुरक्षा उपायों का उल्लेख नहीं है।
  • अपील की कोई व्यवस्था नहीं: प्राधिकरण के निर्णयों के विरुद्ध अपील करने के लिए कोई स्पष्ट तंत्र निर्दिष्ट नहीं है।
  • अत्यधिक प्रत्यायोजन

S.4 अनुलग्नक - तालिका 1: चुनिंदा राज्यों में भूजल रेगुलेशन के बीच तुलना

प्रावधान राजस्थान मॉडल बिल कर्नाटक महाराष्ट्र पंजाब उत्तर प्रदेश
शामिल सरकार का स्तर जिला समितियों के साथ राज्य स्तरीय प्राधिकरण ग्राम पंचायत और नगरपालिका की उप-समितियां, जिला परिषद, राज्य परिषद केवल राज्य स्तरीय प्राधिकरण राज्य और जिला प्राधिकरण, पंचायतें राज्य स्तरीय प्राधिकरण, सलाहकार समिति और परिषद राज्य प्राधिकरण, जिला परिषद, ग्राम पंचायत की उप-समितियां, ब्लॉक, पंचायत, नगर समितियां
जिला प्राधिकरण की संरचना निर्दिष्ट नहीं हां लागू नहीं लागू नहीं लागू नहीं हां
पर्यावरण प्रभाव आकलन निर्दिष्ट नहीं उद्योगों/अवसंरचना के लिए अनिवार्य निर्दिष्ट नहीं निर्दिष्ट नहीं निर्दिष्ट नहीं प्रावधान है
पंजीकरण/शुल्क से छूट प्राप्त उपयोगकर्ता कृषि को अनुमतियों और शुल्कों से छूट दी गई<

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