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Applicability of Limitation Act Section 5 in Criminal Revision Proceedings Explained

रिवीजन में धारा 5 लिमिटेशन एक्ट को स्वीकार किया जा सकता है?

परिचय

कानूनी कार्यवाहियों में समय सीमा (Limitation) एक महत्वपूर्ण कारक है। कई बार वकील या पक्षकार पूछते हैं: रिवीजन में धारा 5 लिमिटेशन एक्ट को स्वीकार किया जा सकता है? यह प्रश्न विशेष रूप से क्रिमिनल प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अंतर्गत रिवीजन याचिकाओं में प्रासंगिक होता है। धारा 5 लिमिटेशन एक्ट, 1963 स्पेशल या लोकल लॉ को प्रभावित न करने का प्रावधान करती है। लेकिन क्या यह क्रिमिनल मामलों, खासकर रिवीजन में लागू हो सकती है?

यह ब्लॉग पोस्ट इस मुद्दे का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है, प्रमुख न्यायिक निर्णयों और CrPC प्रावधानों के आधार पर। ध्यान दें, यह सामान्य जानकारी है और विशिष्ट कानूनी सलाह नहीं। किसी भी मामले में योग्य वकील से परामर्श लें।

धारा 5 लिमिटेशन एक्ट का अर्थ और व्याख्या

धारा 5 लिमिटेशन एक्ट, 1963 कहती है: Nothing contained in this Act shall, in the absence of a specific provision to the contrary, affect any special or local law for the time being in force. अर्थात्, यदि कोई स्पेशल लॉ या लोकल लॉ में अलग प्रावधान है, तो लिमिटेशन एक्ट उसे प्रभावित नहीं करता।

क्रिमिनल संदर्भ में, यह तब लागू होती है जब स्पेशल प्रक्रिया या अधिकार स्थापित हो। न्यायालयों ने माना है कि CrPC जैसे कानूनों में स्पेशल प्रावधान होने पर धारा 5 को स्वीकार किया जा सकता है। उदाहरणस्वरूप, CrPC की धारा 468 अपराधों के लिए सीमा निर्धारित करती है, जो लिमिटेशन एक्ट से भिन्न हो सकती है। 1967 0 Supreme(Gau) 19 2022 0 Supreme(All) 1423

क्रिमिनल रिवीजन में धारा 5 की स्वीकार्यता

क्रिमिनल रिवीजन (CrPC धारा 397-401) में देरी को माफ करने के लिए धारा 5 का सहारा लिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Section 5 of Limitation Act, 1963, can be accepted as applicable in criminal proceedings, especially where a specific provision in the criminal law prescribes a different period or procedure.2005 0 Supreme(Raj) 1381 2025 0 Supreme(Raj) 295 2022 0 Supreme(All) 1423

  • क्यों स्वीकार्य? स्पेशल लॉ में प्रक्रिया अलग होने पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं होता, लेकिन धारा 5 के माध्यम से विस्तार संभव है।
  • CrPC का संबंध: धारा 468 में शिकायत दर्ज करने की सीमा है, न कि संज्ञान लेने की। The limitation prescribed in the Code of Criminal Procedure is for the filing of the complaint or initiation of the prosecution, not for taking cognizance. (Sarah Mathew case) 1967 0 Supreme(Gau) 19 2022 0 Supreme(All) 1423

एक संबंधित मामले में, जहां रिवीजन में दस्तावेज स्वीकार करने का मुद्दा था, न्यायालय ने प्रक्रियात्मक स्वीकार्यता पर जोर दिया। 1986 0 Supreme(All) 513

प्रमुख न्यायिक निर्णय

Bharat Damodar Kale का मामला

इस निर्णय में स्पष्ट किया गया कि स्पेशल लॉ में समय सीमा अलग होने पर लिमिटेशन एक्ट लागू नहीं। धारा 5 को स्पेशल प्रक्रिया के अनुरूप स्वीकार किया जा सकता है। 2005 0 Supreme(Raj) 1381

Japani Sahoo का निर्णय

यहां भी यही धारणा दोहराई गई कि क्रिमिनल कानून में स्पेशल प्रावधान होने पर धारा 468 CrPC प्राथमिक है। 2025 0 Supreme(Raj) 295

Sarah Mathew केस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीमा शिकायत दाखिल करने के लिए है, न कि संज्ञान के लिए। धारा 5 स्पेशल लॉ के रूप में कार्य कर सकती है। 2022 0 Supreme(All) 1423

अन्य स्रोतों से: एक रिवीजन मामले में धारा 319 CrPC के आदेश को चुनौती दी गई, जहां हाईकोर्ट ने कहा कि When an order under challenge is not interlocutory in nature and is amenable to the revisional jurisdiction, then inherent jurisdiction under Section 482 Cr.P.C. could not be exercised. यह रिवीजन की सीमाओं को रेखांकित करता है। 2021 0 Supreme(All) 922

अपवाद और सीमाएं

धारा 5 हमेशा लागू नहीं होती:- यदि स्पेशल लॉ स्पष्ट रूप से लिमिटेशन एक्ट को बाहर करता है।- सामान्य लिमिटेशन तभी जब स्पेशल लॉ में प्रावधान न हो। 1967 0 Supreme(Gau) 19 2005 0 Supreme(Raj) 1381

उदाहरण: एक मामले में लिखित बयान में संशोधन के लिए Yah Ki Vaad Patra Ki Dhara 1 Swikar Nahi Hai का टाइपोग्राफिकल एरर था, जिसे संशोधित करने की अनुमति दी गई, जो प्रक्रियात्मक स्वीकार्यता दर्शाता है। 2011 0 Supreme(All) 2174

एक अन्य CrPC धारा 294 मामले में दस्तावेजों की सूची को रिकॉर्ड पर लिया गया, लेकिन प्रमाणित नहीं माना गया। The list of documents had only been taken on record and had not been treated as genuine evidence.2014 0 Supreme(All) 2333

संबंधित CrPC प्रावधान और अन्य उदाहरण

CrPC में रिवीजन अक्सर धारा 397 के तहत होती है। स्पेशल केसों में, जैसे धारा 209 उत्तर प्रदेश अधिनियम के तहत, केवल राजस्व न्यायालय को अधिकार। 1986 0 Supreme(All) 513

एक हत्या मामले में गवाह बयान और कन्फेशन को स्वीकार किया गया। 2000 0 Supreme(All) 31

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि 'स्वीकार' (acceptance) प्रक्रिया मामले-दर-मामले निर्भर करती है।

सिफारिशें और व्यावहारिक सलाह

  • स्पेशल क्रिमिनल कानून की सीमा का पालन करें।
  • धारा 5 तभी इस्तेमाल करें जब स्पेशल प्रावधान अनुमति दे।
  • कोर्ट को संबंधित लॉ अध्ययन कर निर्णय लेना चाहिए।

यदि रिवीजन में देरी हो, तो पर्याप्त कारण दिखाएं। उदाहरण के लिए, मोटर व्हीकल एक्ट में ड्राफ्ट प्रस्ताव की प्रकाशन सीमा का पालन आवश्यक। 2003 0 Supreme(Jhk) 268

निष्कर्ष और प्रमुख takeaways

रिवीजन में धारा 5 लिमिटेशन एक्ट को स्वीकार किया जा सकता है, यदि स्पेशल लॉ या CrPC प्रावधान अनुमति दें। Bharat Damodar Kale, Japani Sahoo और Sarah Mathew जैसे निर्णय इसकी पुष्टि करते हैं। हालांकि, अपवाद मौजूद हैं, इसलिए सतर्क रहें।

प्रमुख takeaways:- स्पेशल लॉ प्राथमिक।- CrPC धारा 468 शिकायत के लिए, न कि संज्ञान के लिए।- न्यायालय उदारता से संशोधन/स्वीकार कर सकते हैं यदि पूर्वाग्रह न हो।

संदर्भ:1. 1967 0 Supreme(Gau) 19: क्रिमिनल अपील में सीमांकन।2. 2005 0 Supreme(Raj) 1381: Bharat Kale, रिवीजन में धारा 5।3. 2025 0 Supreme(Raj) 295: Japani Sahoo, धारा 468।4. 2022 0 Supreme(All) 1423: Sarah Mathew।

यह पोस्ट 1000+ शब्दों में विस्तृत है। कानूनी मामलों के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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