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Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33 : POCSO अधिनियम की धारा 11‑12 के अनुसार बाल यौन अपराध की रिपोर्टिंग और जांच विशेष अदालत में की जानी चाहिए, परन्तु इस मामले में पुलिस ने आरोप पत्र सामान्य अदालत में दायर किया और इसे आईपीसी की धारा 376(2)(l) के तहत दर्ज किया, इसलिए केस को विशेष POCSO कोर्ट में नहीं भेजा गया।Checking relevance for Sachidanand Sinha VS Collector Patna...

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सारांश: सेक्शन 11 या 12 POSCO एक्ट के चुनाव और पुलिस द्वारा चार्जशीट फाइल करने का मामला

मुख्य बिंदु और अंतर्दृष्टि

  • पुलिस का चार्जशीट फाइल करना: कई मामलों में, पुलिस ने POSCO अधिनियम के तहत आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में दाखिल किया है। यह आरोप पत्र विशेष POSCO कोर्ट में दाखिल किया जाता है, न कि पहले सामान्य कोर्ट में। उदाहरण के तौर पर, ["AJAY vs THE STATE OF KARNATAKA AND ANR - Karnataka"] में कहा गया है कि पुलिस ने आरोप पत्र POSCO कोर्ट में ही दाखिल किया है, न कि पहले सामान्य कोर्ट में।

  • अधिनियम का स्थानांतरण और प्रक्रिया: कुछ मामलों में, आरोप पत्र सामान्य कोर्ट से POSCO कोर्ट में स्थानांतरित किए गए हैं, या पहले सामान्य कोर्ट में दाखिल होने के बाद POSCO कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है। ["THANNIRU LAKSHMAIAH @ LAKSHMAN v/s STATE BY IMANGALA POLICE - Karnataka"] में बताया गया है कि आरोप पत्र POSCO अधिनियम के तहत दाखिल किया गया है, और अभियुक्त को जमानत भी दी गई है।

  • चार्जशीट और कोर्ट का निर्णय: कई मामलों में, आरोप पत्र के दाखिले के बाद जमानत या अग्रिम जमानत की याचिका खारिज हो जाती है। उदाहरण के तौर पर, ["THANNIRU LAKSHMAIAH @ LAKSHMAN v/s STATE BY IMANGALA POLICE - Karnataka"] में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद जमानत खारिज की गई है।

  • चार्जशीट का स्थान और प्रक्रिया: कुछ मामलों में, पुलिस ने चार्जशीट पहले सामान्य कोर्ट में दाखिल की, फिर उसे POSCO कोर्ट में स्थानांतरित किया। ["RAVI @ RAITHA S/O KALAPPA@ KATALINGAPPA vs STATE OF KARNATAKA - Karnataka"] में बताया गया है कि आरोप पत्र POSCO अधिनियम के तहत दाखिल किया गया है, और आरोपियों को जमानत दी गई है, लेकिन केस अभी भी ट्रायल के अधीन है।

  • अधिनियम की धाराएं और प्रक्रिया: सेक्शन 11 और 12 POSCO एक्ट का उल्लेख किया गया है, जो विशेष ट्रायल और आरोप पत्र की प्रक्रिया से संबंधित हैं। पुलिस द्वारा चार्जशीट फाइल करने के बाद, कोर्ट इन मामलों का संज्ञान लेकर निर्णय लेता है, जैसे कि जमानत या अग्रिम जमानत देना या खारिज करना।

विश्लेषण और निष्कर्ष

  • पुलिस का चार्जशीट फाइल करना: सामान्यतः, पुलिस POSCO एक्ट के तहत आरोप पत्र विशेष POSCO कोर्ट में ही दाखिल करती है, भले ही मामला पहले सामान्य कोर्ट में दर्ज हो। यह प्रक्रिया अधिनियम की धाराओं के अनुसार होती है, और कोर्ट इन मामलों का संज्ञान लेकर निर्णय लेती है।

  • चयनित कोर्ट का महत्व: सेक्शन 11 और 12 POSCO एक्ट का प्रयोग विशेष ट्रायल के लिए किया जाता है, जिसमें आरोप पत्र पहले सामान्य कोर्ट में दाखिल होने के बाद POSCO कोर्ट में ट्रांसफर किया जाता है।

  • प्रक्रिया का उद्देश्य: पुलिस द्वारा आरोप पत्र का फाइलिंग और कोर्ट का निर्णय, दोनों का उद्देश्य पीड़ित बच्चे का संरक्षण और न्याय सुनिश्चित करना है। कोर्ट का निर्णय जमानत या अग्रिम जमानत से संबंधित हो सकता है, और यह अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार होता है।

संक्षेप में

पुलिस POSCO एक्ट के तहत आरोप पत्र पहले सामान्य कोर्ट में दाखिल कर सकती है, फिर उसे विशेष POSCO कोर्ट में ट्रांसफर कर सकती है। कोर्ट इन मामलों में जमानत या अन्य निर्णय लेता है, और यह प्रक्रिया अधिनियम की धाराओं के अनुरूप होती है। पुलिस का चार्जशीट फाइल करने का स्थान और कोर्ट का निर्णय, दोनों ही कानून के तहत निर्धारित हैं।

संदर्भ: ["AJAY vs THE STATE OF KARNATAKA AND ANR - Karnataka"], ["THANNIRU LAKSHMAIAH @ LAKSHMAN v/s STATE BY IMANGALA POLICE - Karnataka"], ["RAVI @ RAITHA S/O KALAPPA@ KATALINGAPPA vs STATE OF KARNATAKA - Karnataka"]

POCSO धारा 11/12 के मामले में सामान्य अदालत में चार्जशीट: क्या करें?

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह कानूनी सलाह नहीं है। किसी विशिष्ट मामले में योग्य वकील से परामर्श लें।

परिचय: एक आम कानूनी समस्या

भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए POCSO अधिनियम, 2012 (Protection of Children from Sexual Offences Act) एक विशेष कानून है। लेकिन कई मामलों में पुलिस POCSO की धारा 11 (बालक पर यौन उत्पीड़न) या धारा 12 (उसकी सजा) के तहत अपराध दर्ज करने के बावजूद चार्जशीट सामान्य अदालत में दाखिल कर देती है, न कि विशेष POCSO अदालत में। सवाल उठता है: POCSO एक्ट की धारा 11 या 12 के चुनाव में पुलिस ने चार्जशीट नियमित अदालत में दाखिल की, न कि POCSO कोर्ट में – अब क्या करें?Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

यह समस्या पीड़ित पक्ष के लिए गंभीर है क्योंकि POCSO अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को तेजी से और संवेदनशील न्याय प्रदान करना है। इस लेख में हम सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, प्रक्रिया और उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

मुख्य विधिक निष्कर्ष: विशेष अदालत क्यों अनिवार्य?

POCSO अधिनियम की धारा 11/12 के तहत यदि पीड़ित 'बच्चा' (18 वर्ष से कम जैविक आयु वाला) है, तो मुकदमे का विचारण विशेष POCSO अदालत में अनिवार्य है। पुलिस सामान्य अदालत में चार्जशीट दाखिल करे तो पीड़ित पक्ष CrPC की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय में स्थानांतरण याचिका दायर कर सकता है। Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: 'आयु' में मानसिक आयु शामिल नहीं होती। जैविक आयु 18 वर्ष से अधिक होने पर POCSO लागू नहीं। उदाहरणस्वरूप, एक मामले में पीड़ित की जैविक आयु 38 वर्ष होने से स्थानांतरण याचिका खारिज हो गई। Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

बच्चे की परिभाषा (धारा 2(1)(d))

  • बच्चा: 18 वर्ष से कम आयु वाला व्यक्ति।
  • जैविक आयु ही मान्य: मानसिक आयु या विकलांगता जैविक आयु का स्थान नहीं ले सकती। 'Age’ in section 2(1)(d) does not cover ‘mental age’.Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33
  • मानसिक विकलांगता के लिए धारा 5(k) अलग प्रावधान देती है, लेकिन आयु निर्धारण जैविक ही।

पुलिस द्वारा सामान्य अदालत में चार्जशीट: क्या होता है?

कई मामलों में पुलिस IPC धाराओं (जैसे 376(2)(l)) के साथ POCSO जोड़ती है लेकिन चार्जशीट सामान्य अदालत में दाखिल कर देती है। SUDHAKUMARI V. vs STATE OF KERALA REPRESENTED BY THE HOME SECRETARY - 2023 Supreme(Online)(Ker) 55452 उदाहरण:- एक केस में चार्जशीट धारा 363, 354A(1)(i) IPC, 370(4) IPC, POCSO की धारा 11(vi) r/w 12 और 7 r/w 8 के तहत POCSO कोर्ट में दाखिल हुई। SUDHAKUMARI V. vs STATE OF KERALA REPRESENTED BY THE HOME SECRETARY - 2023 Supreme(Online)(Ker) 55452- गोवा मामले में FIR No.43/2023 की चार्जशीट POCSO कोर्ट पणजी में Ss. 4,8,12,21 POCSO के तहत दाखिल। Akshay Rangayya VS State of Goa - 2023 Supreme(Bom) 2301

यदि POCSO लागू हो तो अदालत स्वयं स्थानांतरण पर विचार कर सकती है। लेकिन FIR में POCSO न होने पर भी बच्चे का चिकित्सकीय परीक्षण धारा 27 के तहत अनिवार्य। Child’s medical examination – Mandatory even though POSCO Act not mentioned in FIR.Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

स्थानांतरण की प्रक्रिया: CrPC धारा 482 याचिका

  1. याचिका दायर करें: उच्च न्यायालय में धारा 482 CrPC के तहत POCSO विशेष अदालत में केस स्थानांतरित करने की प्रार्थना।
  2. प्रमाण प्रस्तुत: पीड़ित की जैविक आयु प्रमाणित करें (जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, ऑसीफिकेशन टेस्ट)।
  3. वीडियोग्राफी आदि निर्देश: उच्च न्यायालय वीडियोग्राफी, बच्चे की गोपनीयता जैसे POCSO नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकता है। Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

अन्य मामलों में:- बहु-FIR स्थिति में एक ही ट्रांजेक्शन के लिए एक चार्जशीट, दूसरी को supplementary मानें। Multiple FIRs arising from the same transaction are impermissible.Akshay Rangayya VS State of Goa - 2023 Supreme(Bom) 2301- POCSO और SC/ST एक्ट के ओवरलैप में POCSO की धारा 42A overriding। Provisions of POSCO Act shall have overriding effect.State of A. P. VS Mangali Yadagiri - 2015 Supreme(AP) 765

अपवाद और सीमाएं

जॉइंट ट्रायल: एक ही ट्रांजेक्शन में अलग-अलग अपराधों के आरोपी एक साथ ट्रायल हो सकते हैं। Persons accused of different offences committed in the course of same transaction can be charged and tried together.BALASAHEB @ SURYAKANT YASHWANTRAO MANE VS STATE OF MAHARASHTRA - 2017 Supreme(Bom) 363

अन्य संबंधित केस और दिशानिर्देश

उद्देश्यात्मक व्याख्या: POCSO का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा। Purpose of the legislation... is to protect the children from the sexual assault, harassment and exploitation.Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33

सिफारिशें और उपाय

  • तत्काल याचिका: उच्च न्यायालय में CrPC 482 दाखिल करें।
  • जांच में पालन: वीडियोग्राफी, मेडिकल परीक्षण सुनिश्चित।
  • मुआवजा: आरोपी मृत्यु पर CrPC 357 के तहत अधिकतम मुआवजा। Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33
  • पुलिस को निर्देशित करें कि POCSO मामलों में विशेष अदालत में ही चार्जशीट दाखिल करें।

निष्कर्ष: बच्चे की सुरक्षा प्राथमिकता

POCSO अधिनियम बच्चों को यौन शोषण से बचाने का मजबूत हथियार है, लेकिन सही अदालत में ट्रायल सुनिश्चित करना आवश्यक। सामान्य अदालत में चार्जशीट होने पर CrPC 482 याचिका प्रभावी उपाय है, बशर्ते पीड़ित की जैविक आयु 18 से कम हो। हमेशा प्रमाण संग्रह करें और विशेषज्ञ सलाह लें।

कुंजी टेकअवेज:- जैविक आयु निर्णायक।- विशेष अदालत अनिवार्य।- उच्च न्यायालय में स्थानांतरण संभव।

अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट निर्णय Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33 और संबंधित केस पढ़ें। बच्चे के अधिकारों की रक्षा करें!

(शब्द संख्या: लगभग 1050)

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