POCSO /12 के मामले में में : क्या करें?
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह कानूनी सलाह नहीं है। किसी विशिष्ट मामले में योग्य वकील से परामर्श लें।
परिचय: एक आम कानूनी समस्या
भारत में बच्चों के खिलाफ ों से निपटने के लिए () एक विशेष कानून है। लेकिन कई मामलों में पुलिस POCSO की (बालक पर ) या (उसकी सजा) के तहत अपराध दर्ज करने के बावजूद में दाखिल कर देती है, न कि में। सवाल उठता है: POCSO एक्ट की या 12 के चुनाव में पुलिस ने नियमित अदालत में दाखिल की, न कि POCSO कोर्ट में – अब क्या करें?2018 4 Supreme 33
यह समस्या पीड़ित पक्ष के लिए गंभीर है क्योंकि POCSO अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को तेजी से और संवेदनशील न्याय प्रदान करना है। इस लेख में हम सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, प्रक्रिया और उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
मुख्य विधिक निष्कर्ष: विशेष अदालत क्यों अनिवार्य?
POCSO अधिनियम की /12 के तहत यदि पीड़ित 'बच्चा' (18 वर्ष से कम वाला) है, तो मुकदमे का में अनिवार्य है। पुलिस में दाखिल करे तो पीड़ित पक्ष के तहत में दायर कर सकता है। 2018 4 Supreme 33
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: 'आयु' में मानसिक आयु शामिल नहीं होती। 18 वर्ष से अधिक होने पर POCSO लागू नहीं। उदाहरणस्वरूप, एक मामले में पीड़ित की 38 वर्ष होने से खारिज हो गई। 2018 4 Supreme 33
बच्चे की परिभाषा ()
- बच्चा: 18 वर्ष से कम आयु वाला व्यक्ति।
- ही मान्य: मानसिक आयु या विकलांगता का स्थान नहीं ले सकती। 'Age’ in section 2(1)(d) does not cover ‘mental age’.2018 4 Supreme 33
- मानसिक विकलांगता के लिए अलग प्रावधान देती है, लेकिन आयु निर्धारण जैविक ही।
पुलिस द्वारा में : क्या होता है?
कई मामलों में पुलिस IPC धाराओं (जैसे 376(2)(l)) के साथ POCSO जोड़ती है लेकिन में दाखिल कर देती है। 2023 Supreme(Online)(Ker) 55452 उदाहरण:- एक केस में , 354A(1)(i) IPC, 370(4) IPC, (vi) r/w 12 और 7 r/w 8 के तहत POCSO कोर्ट में दाखिल हुई। 2023 Supreme(Online)(Ker) 55452- गोवा मामले में FIR No.43/ की में Ss. 4,8,12,21 POCSO के तहत दाखिल। 2023 0 Supreme(Bom) 2301
यदि POCSO लागू हो तो अदालत स्वयं स्थानांतरण पर विचार कर सकती है। लेकिन FIR में POCSO न होने पर भी बच्चे का चिकित्सकीय परीक्षण के तहत अनिवार्य। Child’s medical examination – Mandatory even though POSCO Act not mentioned in FIR.2018 4 Supreme 33
स्थानांतरण की प्रक्रिया: CrPC धारा 482 याचिका
- याचिका दायर करें: में धारा 482 CrPC के तहत POCSO विशेष अदालत में केस स्थानांतरित करने की प्रार्थना।
- प्रमाण प्रस्तुत: पीड़ित की प्रमाणित करें (जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, )।
- वीडियोग्राफी आदि निर्देश: वीडियोग्राफी, बच्चे की गोपनीयता जैसे POCSO नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकता है। 2018 4 Supreme 33
अन्य मामलों में:- बहु-FIR स्थिति में एक ही ट्रांजेक्शन के लिए एक , दूसरी को supplementary मानें। Multiple FIRs arising from the same transaction are impermissible.2023 0 Supreme(Bom) 2301- POCSO और के ओवरलैप में POCSO की overriding। Provisions of POSCO Act shall have overriding effect.2015 0 Supreme(AP) 765
अपवाद और सीमाएं
- 18+: POCSO लागू नहीं, IPC के तहत । Provisions of are on different base and footing.2018 4 Supreme 33
- मानसिक विकलांगता: अन्य सुरक्षा।
- संस्था प्रमुख की रिपोर्टिंग: के तहत बाध्यता, लेकिन जांच का समय दें। 2016 0 Supreme(Chh) 105
जॉइंट ट्रायल: एक ही ट्रांजेक्शन में अलग-अलग अपराधों के आरोपी एक साथ ट्रायल हो सकते हैं। Persons accused of different offences committed in the course of same transaction can be charged and tried together.2017 0 Supreme(Bom) 363
अन्य संबंधित केस और दिशानिर्देश
- आयु प्रमाण: न होने पर POCSO लागू न मानें। 2020 0 Supreme(Mad) 2306
- रिपोर्टिंग बाध्यता: संस्था प्रमुख को अपराध की जानकारी पर तुरंत रिपोर्ट। Section 19(1) of the POSCO Act can be invoked only when the person concerned was having exclusive knowledge.2017 0 Supreme(Bom) 363
- POSCO कोर्ट क्षेत्राधिकार: विशेष POCSO मामलों के लिए एक्सक्लूसिव ट्रायल। 2022 Supreme(Online)(Mad) 100876
उद्देश्यात्मक व्याख्या: POCSO का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा। Purpose of the legislation... is to protect the children from the sexual assault, harassment and exploitation.2018 4 Supreme 33
सिफारिशें और उपाय
- तत्काल याचिका: में CrPC 482 दाखिल करें।
- जांच में पालन: वीडियोग्राफी, सुनिश्चित।
- मुआवजा: आरोपी मृत्यु पर के तहत अधिकतम मुआवजा। 2018 4 Supreme 33
- पुलिस को निर्देशित करें कि POCSO मामलों में विशेष अदालत में ही दाखिल करें।
निष्कर्ष: बच्चे की सुरक्षा प्राथमिकता
POCSO अधिनियम बच्चों को से बचाने का मजबूत हथियार है, लेकिन सही अदालत में ट्रायल सुनिश्चित करना आवश्यक। में होने पर CrPC 482 याचिका प्रभावी उपाय है, बशर्ते पीड़ित की 18 से कम हो। हमेशा प्रमाण संग्रह करें और विशेषज्ञ सलाह लें।
कुंजी टेकअवेज:- निर्णायक।- विशेष अदालत अनिवार्य।- में स्थानांतरण संभव।
अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट निर्णय 2018 4 Supreme 33 और संबंधित केस पढ़ें। बच्चे के अधिकारों की रक्षा करें!
(शब्द संख्या: लगभग 1050)
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