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2021 0 Supreme(MP) 364 : POCSO अधिनियम के तहत यदि कोई अपराध किया गया है, तो उसका परीक्षण विशेष अदालत (Special Court) द्वारा किया जाना चाहिए, जैसा कि धारा 28 और धारा 42‑A में निर्धारित है। इसलिए पुलिस द्वारा सामान्य (regular) अदालत में चार्ज‑शीट दाखिल करना, जब मामला POCSO अधिनियम के तहत है, उचित नहीं माना जाता; इसे विशेष अदालत में लाना आवश्यक है। यह दस्तावेज़ इस बात को स्पष्ट करता है कि POCSO के मामलों में सामान्य अदालत की बजाय विशेष अदालत को ही अधिकार प्राप्त है, जबकि यह धारा 11 या 12 के विशिष्ट प्रावधानों की व्याख्या नहीं करता।Checking relevance for LK (Prosecutrix) vs State of Delhi NCT...

Checking relevance for ASHISH KUMAR VS STATE OF U. P. ...

2015 0 Supreme(All) 580 : सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के अनुसार, यदि पुलिस द्वारा दायर चार्ज‑शीट में कोई भी पोको (POCSO) अधिनियम की धारा (जैसे धारा 11‑रिपोर्टिंग या धारा 12‑बच्चे के बयान की रिकॉर्डिंग) के तहत अपराध नहीं है, तो मजिस्ट्रेट को वह चार्ज‑शीट विशेष पोको कोर्ट को नहीं भेजना चाहिए। मजिस्ट्रेट को पहले आईपीसी के तहत अपराधों की दायित्वता पर विचार करके संज्ञान लेना चाहिए और यदि बाद में यह पाया जाता है कि पोको अधिनियम की कोई धारा (जैसे धारा 11 या 12) लागू होती है, तो ही वह केस को पोको अधिनियम के विशेष कोर्ट (जो सत्र अदालत के बराबर माना गया है) में भेज सकता है। इसलिए, जब पुलिस ने चार्ज‑शीट सामान्य (नियमित) कोर्ट में दायर की है और उसमें पोको अधिनियम के तहत कोई आरोप नहीं है, तो वह विशेष पोको कोर्ट में नहीं भेजी जा सकती; इसे सामान्य कोर्ट में ही निपटाया जाना चाहिए।Checking relevance for Rabin Burman S/o Adar Burman VS State of Sikkim...

Checking relevance for Court On Its Own Motion VS State...

2018 0 Supreme(Del) 1890 : पीओसीएसओ अधिनियम के तहत, पुलिस को अपराध की जांच के बाद धारा 173 सीआरपीसी के तहत चार्ज‑शीट दायर करनी होती है। इस निर्णय में कहा गया है कि पीड़ित के बयान को किसी निजी काउंसलर या एनजीओ द्वारा रिकॉर्ड कर उसे चार्ज‑शीट में शामिल करना कानून द्वारा मान्य नहीं है; ऐसा करने की कोई विधि नहीं है और यह प्रथा न्यायालय की स्पष्ट मार्गदर्शन की मांग करती है। इसलिए, यदि पुलिस ने नियमित अदालत में, विशेष पीओसीएसओ कोर्ट के बजाय, धारा 173 के तहत चार्ज‑शीट दायर की है, तो यह प्रक्रिया वैध है, परंतु पीड़ित के बयान को निजी काउंसलर द्वारा रिकॉर्ड कर शामिल करना अवैध माना जा सकता है।Checking relevance for Court on its Own Motion VS State...

Checking relevance for Hem Prasad Subedi S/o Shri Deo Narayan Subedi VS Deo Narayan Dahal S/o Late Manohar Dahal...

Checking relevance for Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi)...

2018 4 Supreme 33 : POCSO अधिनियम की धारा 11 के तहत विशेष न्यायालय में मुकदमा चलाने की व्यवस्था है, परन्तु इस मामले में FIR में अपराध को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(l) के तहत दर्ज किया गया था, इसलिए पुलिस ने चार्ज शीट सामान्य अदालत में दायर की। उच्च न्यायालय ने धारा 11 के तहत विशेष न्यायालय में स्थानांतरण की याचिका को अस्वीकार कर दिया।Checking relevance for Independent Thought VS Union of India...

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Checking relevance for RAM NARESH PRASAD VS STATE OF JHARKHAND...

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Checking relevance for T. T. Antony VS State Of Kerala...

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निष्कर्ष और विश्लेषण: सेक्शन 11 या 12 POSCO अधिनियम के आरोपों का चुनाव और पुलिस द्वारा चार्जशीट का फाइल होना

मुख्य बिंदु और अंतर्दृष्टि

  • सेक्शन 11 और 12 POSCO अधिनियम का प्रयोग: ये सेक्शन बालिका की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित हैं। सेक्शन 11 में बालिका के यौन शोषण से संबंधित अपराध और सेक्शन 12 में शिकायत दर्ज करने का प्रावधान है। इन सेक्शनों के तहत आरोपों का चुनाव और चार्जशीट फाइलिंग का तरीका महत्वपूर्ण है।
  • उदाहरण: Sections 8 and 12 of the POSCO Act deals with the the POSCO Act and Sections 354(D) and 448 of IPC. ["

    SHANKRAPPA S/O YANKAPPA KANNAPETE vs THE STATE OF KARNATAKA - Karnataka

    "]
  • पुलिस का चार्जशीट फाइल करना: कई मामलों में, पुलिस ने चार्जशीट फाइल की है और आरोप पत्र (charge sheet) कोर्ट में प्रस्तुत किया है, जबकि मामला POSCO की धारा 11 या 12 के तहत दर्ज नहीं किया गया है।

  • उदाहरण: Later chargesheet was filed u/s. 363, 354A(1)(i) IPC, 370(4) IPC, Sec.11(vi) r/w Sec.12 and Sec.7 r/w Sec.8 of the POCSO Act, 2012... ["2023 Supreme(Online)(Ker) 55452"]
  • विशेष ध्यान: कई मामलों में, पुलिस ने चार्जशीट POSCO अधिनियम की धाराओं के बजाय IPC या अन्य कानूनों के तहत दाखिल की है, और कोर्ट ने इन आरोपों पर विचार किया है।

  • चार्जशीट का कोर्ट में फाइल होना: आरोप पत्र सामान्यतः विशेष कोर्ट (POSCO कोर्ट) में फाइल किया जाता है। हालांकि, कभी-कभी पुलिस ने यह चार्जशीट सामान्य कोर्ट या बाल संरक्षण कोर्ट में भी फाइल की है।

  • उदाहरण: The case was taken on file on 11.08.2021 in Special S.C. No.55 of 2021 by the Special Court for Exclusive Trial of POSCO Act cases at Cuddalore. ["2022 Supreme(Online)(Mad) 98453"]

  • चार्जशीट और चार्जिंग प्रक्रिया में अंतर: पुलिस ने पहले चार्जशीट फाइल की है, और बाद में कोर्ट ने आरोप तय किए हैं। अक्सर, आरोपों का चुनाव POSCO की धाराओं के आधार पर किया जाता है, लेकिन कभी-कभी ये IPC या अन्य कानूनों के तहत भी हो सकता है।

विश्लेषण और निष्कर्ष

  • चार्जशीट फाइलिंग का स्थान: पुलिस ने कई मामलों में चार्जशीट POSCO अधिनियम की धाराओं के बजाय IPC या अन्य संबंधित धाराओं के तहत फाइल की है, और कोर्ट ने इन आरोपों पर विचार किया है।
  • उदाहरण: The police investigated into the matter and filed a charge sheet which was taken on file as P.R.C. No. 22 of 2013... ["IND20047520"]
  • चार्जशीट का आरोपों से संबंधित होना: यदि आरोप पत्र में POSCO की धाराएँ नहीं हैं, तो कोर्ट इन धाराओं के तहत आरोप तय करने में सक्षम नहीं है।
  • पुलिस का चार्जशीट फाइल करने से पहले आरोप तय करना: कभी-कभी, पुलिस ने चार्जशीट फाइल करने से पहले ही कोर्ट में चार्ज तय कर दिए हैं, जो प्रक्रिया के अनुसार नहीं माना जाता।

संक्षेप में

  • पुलिस ने कई मामलों में चार्जशीट POSCO की धाराओं के बजाय IPC या अन्य कानूनों के तहत फाइल की है।
  • कोर्ट ने इन आरोपों पर विचार किया है, लेकिन यदि आरोप पत्र POSCO धाराओं के बिना फाइल हुआ हो, तो आरोप तय करने का अधिकार सीमित हो सकता है।
  • इन मामलों में, आरोप और चार्जशीट का स्थान, विधिवत प्रक्रिया का पालन और आरोपों का चुनाव मुख्य मुद्दा हैं।

संदर्भ:["2025 Supreme(Online)(KAR) 3669"], ["2023 Supreme(Online)(Ker) 55452"], ["2022 Supreme(Online)(Mad) 98453"], ["INDHHC_HCMD010599342022"]

Handling POCSO Cases Chargesheeted in Regular Courts: Legal Procedures for Jurisdiction Transfer

POCSO धारा 11 या 12 के आरोप: पुलिस ने नियमित अदालत में चार्जशीट क्यों दाखिल की?

POCSO अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून है। लेकिन कई मामलों में पुलिस FIR या पीड़ित के बयान में धारा 11 (यौन उत्पीड़न) या धारा 12 (यौन आकांक्षा) का उल्लेख होने के बावजूद चार्जशीट को POCSO विशेष अदालत के बजाय नियमित मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल कर देती है। यदि POCSO धारा 11 या 12 के तहत आरोप हैं लेकिन पुलिस ने चार्जशीट नियमित अदालत में दाखिल की, तो क्या करें? यह सवाल कई अभियोजन पक्ष और आरोपी पूछते हैं। इस ब्लॉग में हम इसकी विधिक स्थिति, अदालती निर्णयों और उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ध्यान दें, यह सामान्य जानकारी है, विशिष्ट कानूनी सलाह के लिए वकील से संपर्क करें।

मुख्य विधिक निष्कर्ष

यदि पीड़ित के बयान या FIR में POCSO की धारा 11 या 12 के आरोप हैं, लेकिन पुलिस ने चार्जशीट में POCSO धाराएं न लगाते हुए या लगाते हुए सामान्य मजिस्ट्रेट अदालत में प्रस्तुत की, तो मजिस्ट्रेट को चार्जशीट पर संज्ञान लेना चाहिए। जांच सामग्री से यदि POCSO अपराध बनता दिखे, तो धारा 209 CrPC के तहत मामले को POCSO विशेष अदालत में प्रतिबद्ध (commit) कर देना चाहिए। यदि चार्जशीट में POCSO धारा शामिल है, तो इसे सीधे POCSO विशेष अदालत में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, अन्यथा प्रक्रिया अनुचित है। 2015 0 Supreme(All) 580

मुख्य बिंदु:- पुलिस रिपोर्ट यदि POCSO अपराध से संबंधित है, तो इसे POCSO विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। 2015 0 Supreme(All) 580 1994 0 Supreme(All) 259- यदि चार्जशीट में POCSO धारा नहीं है, तो मजिस्ट्रेट संज्ञान ले सकता है और फ्रेमिंग ऑफ चार्ज स्टेज पर या धारा 209 CrPC के तहत विशेष अदालत को प्रतिबद्ध कर सकता है। 2015 0 Supreme(All) 580- POCSO विशेष अदालत अन्य जुड़े अपराधों (IPC आदि) का भी विचारण कर सकती है। 2021 0 Supreme(MP) 364

POCSO मामलों में चार्जशीट की प्रक्रिया और क्षेत्राधिकार

POCSO अधिनियम की धारा 33(1) के अनुसार, विशेष अदालत सीधे पुलिस रिपोर्ट या शिकायत पर संज्ञान ले सकती है यदि वह POCSO अपराध से संबंधित हो। एक conjoint reading of Sections 2(2), 28(2) and 33(1) of the Pocso Act read with Section 4(2) of the Code would go to show that if a police report or complaint relates to an offence punishable under the Pocso Act it will have to be presented before the Special Court constituted under the said Act even though it may also relate to offences other than those punishable under the Pocso Act। 2015 0 Supreme(All) 580

यदि चार्जशीट में POCSO धारा (जैसे 11 या 12) शामिल नहीं है, तो मजिस्ट्रेट को संज्ञान लेना चाहिए। एक मामले में IPC धाराओं (354-A, 352 आदि) वाली चार्जशीट पर मजिस्ट्रेट ने गलती से विशेष अदालत भेज दी, जो गलत था: since the police report did not include any offence punishable under Pocso Act, Magistrate could have taken cognizance of the offences mentioned in the police report and, thereafter, if he had found that other offences were also made out which were triable by a Court of Session or Special Court, could have committed matter to Special Court under provisions of Code.2015 0 Supreme(All) 580

अन्य स्रोतों से स्पष्ट है कि POCSO मामलों में एकाधिक FIRs एक ही घटना के लिए अमान्य हैं। उदाहरणस्वरूप, दो FIRs को एक ही chargesheet में मिलाया जाना चाहिए। 2023 0 Supreme(Bom) 2301 The court established that multiple FIRs arising from the same transaction are impermissible under the Code of Criminal Procedure, and such cases should be consolidated into a single chargesheet。

POCSO और अन्य अधिनियमों के संयुक्त मामलों में विशेष अदालत का क्षेत्राधिकार

POCSO और SC/ST अधिनियम दोनों के मामलों में भी POCSO विशेष अदालत ही विचारण करेगी: case under provisions of both Acts -- trial shall be conducted by Special Courts constituted under POCSO Act. धारा 28(2) POCSO के तहत विशेष अदालत अन्य अपराधों का भी विचारण कर सकती है। 2021 0 Supreme(MP) 364 2015 0 Supreme(AP) 765

POCSO अधिनियम की धारा 42A स्पष्ट करती है कि इसके प्रावधान अन्य कानूनों पर प्राथमिकता रखते हैं: The provisions of this Act shall be in addition to and not in derogation of the provisions of any other law for the time being in force and, in case of any inconsistency, the provisions of this Act shall have overriding effect2015 0 Supreme(AP) 765

मजिस्ट्रेट की शक्तियां और आरोप जोड़ना

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पुलिस चार्जशीट के बाद मजिस्ट्रेट धाराएं जोड़/घटा नहीं सकता। यह ट्रायल कोर्ट द्वारा फ्रेमिंग ऑफ चार्ज (धारा 216, 218 या 228 CrPC) के स्टेज पर होगा। यदि POCSO अपराध बनता है, तो मजिस्ट्रेट धारा 209 CrPC से सेशन/विशेष अदालत को प्रतिबद्ध कर सकता है, क्योंकि POCSO विशेष अदालत सेशन कोर्ट मानी जाती है (धारा 31 POCSO)। 2015 0 Supreme(All) 580

जॉइंट ट्रायल के लिए, विभिन्न अपराध एक ही transaction में होने पर संभव है। 2017 0 Supreme(Bom) 363Accused persons committing different offences under Act in course of same transaction, can be charged and tried together in a single trial.

अपवाद और सीमाएं

  • यदि चार्जशीट में POCSO धारा स्पष्ट रूप से शामिल है, तो नियमित मजिस्ट्रेट का संज्ञान अवैध; हाईकोर्ट से ट्रांसफर। 2015 0 Supreme(All) 580
  • FIR में POCSO न होने पर भी बच्चे का चिकित्सा परीक्षण अनिवार्य। 2018 4 Supreme 33
  • बहु-धारा मामलों में POCSO प्राथमिकता क्योंकि बाद का विशेष अधिनियम। 2021 0 Supreme(MP) 364

बेल के संदर्भ में, जांच पूरी होने पर और कोई हिरासत जरूरी न हो तो बेल मिल सकती है, खासकर परिवार समर्थन हो। 2025 Supreme(Online)(KAR) 12134

सिफारिशें और उपाय

  1. यदि चार्जशीट नियमित अदालत में है और POCSO सिद्ध, अभियोजन धारा 209 CrPC से प्रतिबद्धता या धारा 216 से आरोप जोड़ने का आवेदन करे।
  2. आरोपी/अभियोजन हाईकोर्ट में धारा 482 CrPC या 407/408 से हस्तांतरण याचिका दायर करे।
  3. विशेष अदालत में जमानत अस्वीकृति पर CrPC धारा 439 से अपील। 2021 0 Supreme(MP) 364
  4. तत्काल: अदालत से चार्जशीट समीक्षा करवाएं और प्रतिबद्धता आदेश लें।

निष्कर्ष और मुख्य takeaways

POCSO मामलों में विशेष अदालत का क्षेत्राधिकार प्राथमिक है। नियमित अदालत में दाखिल चार्जशीट को मजिस्ट्रेट धारा 209 CrPC से ट्रांसफर कर सकता है। हमेशा जांच सामग्री की समीक्षा करें। यह जानकारी सामान्य है; व्यक्तिगत मामलों में वकील की सलाह लें। बच्चे की सुरक्षा सर्वोपरि है।

संदर्भ:1. 2015 0 Supreme(All) 580: मजिस्ट्रेट की भूमिका और प्रतिबद्धता।2. 2021 0 Supreme(MP) 364: विशेष क्षेत्राधिकार और अपील।3. 2018 4 Supreme 33: चिकित्सा परीक्षण।4. 2015 0 Supreme(AP) 765: ओवरराइडिंग इफेक्ट।5. 2023 0 Supreme(Bom) 2301: मल्टीपल FIRs।

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