Searching Case Laws & Precedent on Legal Query.....!
Scanned Judgements…!
Checking relevance for Gangadhar Narayan Nayak @ Gangadhar Hiregutti VS State of Karnataka...
Checking relevance for IN RE: Right to Privacy of Adolescents VS . ...
Checking relevance for State of Maharashtra VS Maroti S/o Kashinath Pimpalkar...
Checking relevance for Pramod Yadav VS State of Madhya Pradesh...
Pramod Yadav VS State of Madhya Pradesh - 2021 0 Supreme(MP) 364 : POCSO अधिनियम के तहत यदि कोई अपराध किया गया है, तो उसका परीक्षण विशेष अदालत (Special Court) द्वारा किया जाना चाहिए, जैसा कि धारा 28 और धारा 42‑A में निर्धारित है। इसलिए पुलिस द्वारा सामान्य (regular) अदालत में चार्ज‑शीट दाखिल करना, जब मामला POCSO अधिनियम के तहत है, उचित नहीं माना जाता; इसे विशेष अदालत में लाना आवश्यक है। यह दस्तावेज़ इस बात को स्पष्ट करता है कि POCSO के मामलों में सामान्य अदालत की बजाय विशेष अदालत को ही अधिकार प्राप्त है, जबकि यह धारा 11 या 12 के विशिष्ट प्रावधानों की व्याख्या नहीं करता।Checking relevance for LK (Prosecutrix) vs State of Delhi NCT...
Checking relevance for ASHISH KUMAR VS STATE OF U. P. ...
ASHISH KUMAR VS STATE OF U. P. - 2015 0 Supreme(All) 580 : सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के अनुसार, यदि पुलिस द्वारा दायर चार्ज‑शीट में कोई भी पोको (POCSO) अधिनियम की धारा (जैसे धारा 11‑रिपोर्टिंग या धारा 12‑बच्चे के बयान की रिकॉर्डिंग) के तहत अपराध नहीं है, तो मजिस्ट्रेट को वह चार्ज‑शीट विशेष पोको कोर्ट को नहीं भेजना चाहिए। मजिस्ट्रेट को पहले आईपीसी के तहत अपराधों की दायित्वता पर विचार करके संज्ञान लेना चाहिए और यदि बाद में यह पाया जाता है कि पोको अधिनियम की कोई धारा (जैसे धारा 11 या 12) लागू होती है, तो ही वह केस को पोको अधिनियम के विशेष कोर्ट (जो सत्र अदालत के बराबर माना गया है) में भेज सकता है। इसलिए, जब पुलिस ने चार्ज‑शीट सामान्य (नियमित) कोर्ट में दायर की है और उसमें पोको अधिनियम के तहत कोई आरोप नहीं है, तो वह विशेष पोको कोर्ट में नहीं भेजी जा सकती; इसे सामान्य कोर्ट में ही निपटाया जाना चाहिए।Checking relevance for Rabin Burman S/o Adar Burman VS State of Sikkim...
Checking relevance for Court On Its Own Motion VS State...
Court On Its Own Motion VS State - 2018 0 Supreme(Del) 1890 : पीओसीएसओ अधिनियम के तहत, पुलिस को अपराध की जांच के बाद धारा 173 सीआरपीसी के तहत चार्ज‑शीट दायर करनी होती है। इस निर्णय में कहा गया है कि पीड़ित के बयान को किसी निजी काउंसलर या एनजीओ द्वारा रिकॉर्ड कर उसे चार्ज‑शीट में शामिल करना कानून द्वारा मान्य नहीं है; ऐसा करने की कोई विधि नहीं है और यह प्रथा न्यायालय की स्पष्ट मार्गदर्शन की मांग करती है। इसलिए, यदि पुलिस ने नियमित अदालत में, विशेष पीओसीएसओ कोर्ट के बजाय, धारा 173 के तहत चार्ज‑शीट दायर की है, तो यह प्रक्रिया वैध है, परंतु पीड़ित के बयान को निजी काउंसलर द्वारा रिकॉर्ड कर शामिल करना अवैध माना जा सकता है।Checking relevance for Court on its Own Motion VS State...
Checking relevance for Hem Prasad Subedi S/o Shri Deo Narayan Subedi VS Deo Narayan Dahal S/o Late Manohar Dahal...
Checking relevance for Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi)...
Ms. Eera Through Dr. Manjula Krippendorf VS State (Govt. of NCT of Delhi) - 2018 4 Supreme 33 : POCSO अधिनियम की धारा 11 के तहत विशेष न्यायालय में मुकदमा चलाने की व्यवस्था है, परन्तु इस मामले में FIR में अपराध को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(l) के तहत दर्ज किया गया था, इसलिए पुलिस ने चार्ज शीट सामान्य अदालत में दायर की। उच्च न्यायालय ने धारा 11 के तहत विशेष न्यायालय में स्थानांतरण की याचिका को अस्वीकार कर दिया।Checking relevance for Independent Thought VS Union of India...
Checking relevance for NIPUN SAXENA VS UNION OF INDIA...
Checking relevance for RAM NARESH PRASAD VS STATE OF JHARKHAND...
Checking relevance for STATE OF BIHAR VS RAJBALLAV PRASAD @ RAJBALLAV PD. YADAV @ RAJBALLABH YADAV...
Checking relevance for T. T. Antony VS State Of Kerala...
Checking relevance for T. T. Antony etc. etc. VS State of Keralaetc. ...